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Monday, 7 January 2019

अमेरिकन ख़ुफ़िया विभाग इस्लाम को लेकर खास एजेंटों से काम करती हे ।

अमेरिकन ख़ुफ़िया विभाग वैचारिक इस्लाम को चार भागो मे विभाजित करता है !!
1-फंडमेंटलिस्ट इस्लाम
2-पॉलिटिकल इस्लाम
3-ट्रेडिशनल इस्लाम
4-मॉडर्न/ लिबरल इस्लाम
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वैसे तो इनकी व्याख्या बहुत ही लंबी और इलमी है लेकिन यहाँ मैं मुख़्तसर से लफ़ज़ो मे मोटा-मोटी आपके सामने रखता हूँ !!
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पहला जो फंडमेंटलिस्ट इस्लाम है इसको वो लोग फॉलो करते है जो हथियार के ज़रिये सत्ता पे क़ाबिज़ होना चाहते है या अमेरिका के मफाद के लिये सबसे बड़ा ख़तरा है !!
इस नज़रिए के लोग इस्लाम को मज़हब नही बल्कि दीन जिसमे खिलाफत का तस्वव्वूर हो !!
जहाँ इस्लाम का मआशरे से लेकर सियासत और आर्थिक नीतिया भी इस्लाम की रोशनी मे बने और रियासत की हाकमियत अल्लाह के सुपुर्द हो इसके लिये कोशिश और जद्द-ओ-जहद करते है !!
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दूसरा जो वैचारिक इस्लाम है उसे पॉलिटिकल या सियासी इस्लाम कहते है इस नज़रिये के लोग क़ानून के दायरे मे रह कर लोकतांत्रिक तरीके से इस्लाम का निफाज़ चाहते है जैसे की मिस्र मे इखवान-ऊल-मुसलेमीन और ट्यूनीशिया मे अल नहदा या हमारे यहाँ बर्रे सग़ीर मे जमात-ए-इस्लामी और जमीयत उलमा-ए-इस्लाम है !!
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तीसरा तबका जो है उसे हम ट्रेडिशनल इस्लाम कहते है ये वो लोग जो खानकाहो,मस्जीदो और मदरसो मे पाय जाते है !!
जिनका पूरा ज़ोर नमाज़,रोज़ा,हज और दूसरी इस्लाही और इख्लाकि मामलात तक महदुद हो इस तरह के लोग हमारे तबलीगी जमात हो बल्कि हम आम मुसलमान भी इसी कैट्गरी मे आते है !!
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चौथा तबका जो है उसे सेक्युलर और लिबरल इस्लाम कहा जाता है जिनके यहाँ मज़हब की हैसियत वही होती है जो भूसे मे सुई की !!
इसकी मिसाल के लिये मैं आपका जाना पहचाना नाम देना चाहूँगा जिसे हम #शाहरुख_ख़ान के नाम से जानते है !!
और शाहरुख ख़ान ने अपने कई ब्यान मे ये स्वीकारा है की वो मॉडर्न इस्लाम को फॉलो करते है !!
आप इसे ऐसे समझे की जहाँ मज़हब से ज़यादा मगरिबियत की मरूबीयत हो वहाँ मॉडर्न इस्लाम है !!
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मेरे सामने जॉर्डन से निकलने वाली मैगज़ीन The Muslim 500 है जिसमे Ideological Divisions नाम से चैप्टर है !!
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जहाँ CIA चार भागो मे वैचारिक इस्लाम को विभाजित करता है !!
तो वही ये मैगज़ीन तीन भागो मे विभाजित करती है मेरे इस मैगज़ीन के हवाले की बुनियाद ये है की ये मैगज़ीन वैचारिक इस्लाम के विभाजित मतो के मानने वालो की संख्या विभाजित करती है !!
इस मैगज़ीन के अनुसार मुसलमानो का 90% ट्रेडिशनल इस्लाम जिसे इसमे ओर्थोडॉक्स इस्लाम भी लिखा है उसको फॉलो करता है वहीं 9%मुसलमान फंडमेंटलिस्ट इस्लाम के मत मे विश्वास करते है और मात्र 1% मुसलमानो का ताल्लुक मॉडर्न या लिबरल इस्लाम से है !!
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मेरे ये बताने का मक़सद क्या है अब उस पे मैं आता हूँ ??
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CIA ने जो इस्लाम को चार भागो मे विभाजित किया है ये उस प्लान का हिस्सा है जिसमे वो परखती है मौजूदा मुसलमानो की वैचारिक स्थिति क्या है इस्लाम और वेस्ट के मध्य तहज़ीब से लेकर युद्ध और उसके बाद हज़रत ईसा अलही सलाम के नज़ुल तक और इन समयो के बीच आने वाले कशमकश के बारे मे यकीन और तय्यरी तक और उस तय्यरी के खिलाफ शहूनियत की शाजिशो को समझने और उसके खिलाफ उठने तक !!
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मैं पहले भी कह चुका हू की अमेरिका को मज़हब-ए-इस्लाम से कोई ख़तरा नही उन्हे ख़तरा दीन-ए-इस्लाम से है !!
मामला ये है की अमेरिका भी ये जानता है की इन्फरादी ज़िंदगी से लेकर इज़माई ज़िंदगी मे दीन-ए-इस्लाम का निफाज़ सिर्फ़ वही लोग कर सकते है !!
जिसे वो फंडमेंटलिस्ट इस्लाम कहता है लेकिन पहले वो इनसे बेफ़िक्र था क्योंकि की इनकी तादाद बेहद मामूली थी आप इसे अफ़ग़ानिस्तान की स्वेत यूनियन के खिलाफ जंग और उसके बाद की परस्थितियो से समझ सकते की कैसे इस तबके को अमेरिका ने पहले हिमायत की लेकिन जब उसने ये देखा की जो ट्रेडिशनल और पॉलिटिकल तबका है वो भी जब भी मौका पड़ेगा फ़ौरन उनके साथ आ सकता है !!
जो अमेरिका के खिलाफ है और ये बात अफ़ग़ान जंग के आख़िर मे वो भाँप गये थे !!
पॉलिटिकल इस्लाम की नुमाइंदा जमात-ए-इस्लामी के और ट्रेडिशनल इस्लाम की नुमाइंदा पाक-ओ-अफ़ग़ान मदरसो के तालिब-ए-इल्मो की उनको हिमायत और फिर इन तीनो तबको की हिमायत मे बनने वाली होकूमत और वो होकूमत जो वेस्टर्न सिस्टम तक को चैलेंज कर दिया !!
और उस होकूमत के सिस्टम के दूसरे मुस्लिम मुल्क पे पड़ने वाले असर को भाँप कर बाद मे उस होकूमत को ही ख़त्म कर दिया !!
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मतलब ये की ये तीनो तबका कभी भी एक साथ आ सकता है
और यहूदियत व ईसाइयत को चैलेंज कर सकता है !!
इसके लिये उन्होने लिबरल और मॉडर्न इस्लाम का प्रचार शुरू किया !!
और इसके लिये उन दढ़छिल्ले स्कॉलर को जिनकी पूरी ज़िंदगी इस्लामी आकायद के साथ पूरे इस्लामी निज़ाम पे तनकीद करने मे गुज़री थी !!
उन्हे हक़ीक़ी इस्लामिक स्कॉलर के नाम से पेश किया और पैसो के मूँह खोल दिए गये लेकिन इनको मूँह की खानी पड़ी !!
जिसके बाद अब इन्होने फिर से अपनी पॉलिसियो पे विचार विमर्श शुरू किया !!
और इसमे तब्दीली लाते हुए हुये ये किया की अब इन्हे तीन भागो मे बाँट दिया पहला फंडमेंटलिस्ट या रेडिकल इस्लाम दूसरा पॉलिटिकल इस्लाम और तीसरा सूफ़ी इस्लाम.....
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मामला ये है की जो पहला विभाजन था वो कम ख़तरनाक था जितना ये है क्योंकि उसमे सिर्फ़ वैचारिक विभाजन था !!
लेकिन इसमे वैचारिक विभाजन के साथ मसलकी विभाजन का भी तड़का लगा दिया गया है !!
और ये तड़का वहाबीयत और सूफिज़्म को विभाजन का है !!
जिसमे से इस्लाम के इत्तेहाद की हर कोशिश को सिर्फ़ फ़िक्री ही नही मसलक के आधार पे तोड़ दिया गया !!
और इसके लिये दुनिया भर मे यहूदी तंज़िमो ने NGO से लेकर मीडिया तक के ज़रिए सूफिज़्म इस्लाम का भरपूर प्रचार कर रहे है !!
और पैसो के मूँह खोल दिये है और मुस्लिम मुमालिक मे बेहद ख़ुफ़िया और ख़तरनाक तरीके से सत्ता पे क़ब्ज़ा कराने के लिये इनका इस्तेमाल करा रहे है !!
ताकि वो इनका अपने मफाद के लिये इस्तेमाल कर सके जहाँ पाकिस्तान मे ये काम ताहिर-ऊल-कादरी के ज़रिए हो रहा है !!
तो वही तुर्की मे फ़तेहउल्लाह गुलेन के नाम पे तख्तापलट की कोशिश की गयी !!
और जहाँ मुसलमान अल्पसंख्यक है उन्हे उनके इत्तेहाद को तोड़ने और दुनिया भर के मुसलमानो के साथ उनके कलबी रिश्ते को ख़त्म करने के लिये उन मुल्को की इस्लाम दुश्मन तंज़िमो का इस्तेमाल कर उन मफादपरस्त मुल्ले जिनकी बौद्धिकता का ये हाल हो की उन्हे वहाबियो के साथ जाने के बजाय यहूदियो के शाजिशो का इस्तेमाल होना पसंद करते हो !!
उनको अपनी शाजिश मे शामिल कर उनका इस्तेमाल कर रहे है !!
और मुसलामनो मे तफरका और नफ़रते फैला रहे है !!
और अपनी असली और हक़ीक़ी मंज़िल को भुला चुके है !!
और शाजिशो का शिकार हो रहे है!!
और इसकी सबसे बड़ी ख़तरनाक बात ये है की जो ट्रेडिशनल तबका था जिसकी तादाद सबसे अधिक थी !!
और वो यहूदियो के लिये ख़तरा बन रहा था उसमे उन्होने शगाफ़ डाल दिया है....
एक बात मैं यहाँ क्लियर कर दू की तसव्वूफ एक अलग चीज़ है और सूफिज़्म इस्लाम अलग !!
क्यों कि तसव्वूफ का ताल्लुक सियासत से कभी हो ही नही सकता !!
आप औलिया अल्लाह की तारीख उठा के देख ले किसी का भी अपने वक़्त के बादशाह के साथ मफाद नही जुड़ा था यानी की जैसे ही आप तसव्वूफ को सियासत से जोड़ते है वैसे ही फ़ौरन तसव्वूफ का रिश्ता आपसे ख़त्म हो जाता है !!
और जो बचता है वो सिर्फ़ सियासत होती है जो अपने मफाद की सियासत होती है !!
और तथाकथित सूफ़िज़म इस्लाम कुछ लोगो के मफादपरस्ती का नतीजा है जो यहूदी शाजिश का का हिस्सा है !!

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Saturday, 29 December 2018

किसी भी सरकारी विभाग की Vacancy निकलती हैं तो उसकी फार्म फीस 500-700 होती ही हैं

नौकरी

यह कैसा लॉजिक है ,
DATE :- 29/12/2018
किसी भी सरकारी विभाग की Vacancy निकलती हैं तो उसकी फार्म फीस 500-700 होती ही हैं

सरकार विद्यार्थियों से *पैसा कमाना* चाहती हैं या उन्हें *रोजगार देना* ??? अभी तक पता नहीं चला है ।

उदाहरण के लिए:-
पोस्ट होती हैं *50* (Seat)
फॉर्म पूरे *भारत* से भरवाते हैं ।

फॉर्म फीस होती हैं 500 रु ,
*50 लाख से 80 लाख विद्यार्थी* फॉर्म भरते हैं

_*आइये सरकार का फायदा देखते हैं*_

500 रु फॉर्म फीस × 50,00,000 विद्यार्थीयों ने फॉर्म भरें =
(कुल आय फॉर्म फीस से)
*2 अरब 50 करोड़ रु*

नौकरी देनी हैं *50* को
सैलेरी *25000* रु प्रति माह मान लेते , ज्यादा मानी गयी हैं इतनी होती नहीं हैं

25000 × 50 लोग = 12,50,000 महीना

12,50,000 × 12 महीने = 1 करोड़ 50 लाख

*चालीस साल की नौकरी करने पर*
1,50,00,000 × 40 साल = *60 करोड़*

सरकार की फॉर्म फीस कुल आय = *2 अरब 50 करोड़ रूपए*

*अप्पोइंटेड लोगों की 40 साल तक की सैलेरी*
60 करोड़ रु

2,50,00,00,000 – 60,00,00,000 = *1,90,00,00,000*

*सरकार की कुल आय = 1 अरब 90 करोड़ रु*

मेरा सवाल – सरकार व विभाग से यह हैं कि आप विद्यार्थीयों को नौकरी देना चाहते हैं या
पैसा कमाना चाहते हैं ???

इस संदेश को अपने जान पहचान के लोगों को अवश्य बांटे…...
    👉🏻  *घुमा दो सारे ग्रुप मैं*

Sunday, 2 December 2018

एटीएम, चेक से कैश निकालना पड़ेगा भारी, प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर देने होंगे कम से कम 25 रुपये

Huzaifa Patel  SAF Team gujarat:
02/12/2018

बैंक उपभोक्ताओं पर अब जीएसटी की बड़ी मार पड़ने वाली है। इसके चलते बैंक के अंदर या फिर बाहर होने वाले सभी तरह के लेनदेन पर टैक्स देना होगा। चेक भुनाने से लेकर के एटीएम से कैश निकालने पर अतिरिक्त पैसा देना होगा। 

*एटीएम-बैंक में नहीं मिलेंगी मुफ्त सेवाएं*

इससे ग्राहकों को बैंक और एटीएम पर मिलने वाली मुफ्त सुविधा भी खत्म हो जाएगी। अभी ग्राहक अपने बैंक के एटीएम से पांच बार मुफ्त ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। नई व्यवस्था लागू हो जाने के बाद यह मुफ्त ट्रांजेक्शन खत्म हो जाएंगे।  बैंक आपको ये सेवाएं मुफ्त देता हैं जबकि बैंकों को इस तरह की सेवाओं पर लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का सर्विस टैक्स देना पड़ता है।

*इतनी बढ़ेगी फीस*

बैंक इसके अलावा एटीएम पर होने वाले नॉन बैंकिंग ट्रांजेक्शन की फीस को भी 18 रुपये से बढ़ाना चाहते हैं। यह बढ़कर के 25 रुपये तक हो सकती है। इस फीस को 2012 में तय किया गया था और तब से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। एटीएम से एक ट्रान्जेक्शन की लागत एक दिन का 23 रुपये आती है।  

*अभी है यह चार्ज*

वर्तमान में सभी बैंक एटीएम पर होने वाले कैश ट्रांजेक्शन के लिए 15 रुपये और नॉन कैश ट्रांजेक्शन करने पर खाते से 5 रुपये काटते हैं। यह चार्ज हर महीने फ्री में मिलने वाले ट्रांजेक्शन के ऊपर लगता है। 

*इस वजह से बढ़ेगा चार्ज*

रिजर्व बैंक ने एटीएम पर होने वाले ट्रांजेक्शन के लिए काफी कड़े नियम बना दिए हैं, जिसके बाद एटीएम ऑपरेटर्स ट्रांजेक्शन चार्ज बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। एटीएम इंडस्ट्री ने ट्रांजेक्शन पर 3-5 रुपये बढ़ाने की मांग की है, ताकि वो अपने खर्चों को पूरा कर सके।

सीएटीएमआई के निदेशक के श्रीनिवासन ने कहा एटीएम ऑपरेटर्स के खर्चे पहले ही काफी बढ़ चुके हैं। कैश वैन के लिए बनाए गए इन नियमों के अनुसार कैश मैनेजमेंट कंपनियों के पास में कम से कम 300 कैश वैन, प्रत्येक कैश वैन में एक ड्राइवर, दो कस्टोडियन और दो बंदूकधारी गार्ड होने चाहिए ताकि कैश की सुरक्षा हो सके।

इसके साथ ही प्रत्येक गाड़ी में जीपीएस, लाइव मॉनेटरिंग के साथ भू मैपिंग और नजदीकी पुलिस स्टेशन का पता होना चाहिए ताकि इमरजेंसी के वक्त मदद ली जा सके। इसके साथ ही आरबीआई ने कहा है कि एटीएम का ऑपरेशन केवल वो ही व्यक्ति कर सकेगा, जिसने ट्रेनिंग के बाद सर्टिफिकेट हासिल किया हो। 

*18 फीसदी लगेगा इन सेवाओं पर जीएसटी*

जिन मुफ्त सेवाओं पर बैंकों ने 18 फीसदी जीएसटी लगाने का प्रस्ताव दिया है उसमें चेक बुक, एटीएम का प्रयोग, अतिरिक्त क्रेडिट कार्ड और पेट्रोल-डीजल का कार्ड से भुगतान पर मिलने वाले रिफंड शामिल है। फिलहाल भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक इस चार्ज को लगाना सबसे पहले शुरू करेंगे। इसके बाद अन्य बैंक भी इस तरह की घोषणा कर सकते हैं। 

*बेसिक बचत खाते पर भी लगेगा टैक्स*

जिन लोगों ने अपना बेसिक बचत खाता खुलवा रखा है, उनको भी एटीएम का प्रयोग करने पर टैक्स देना होगा। जो लोग अपने खाते में मिनिमम बैलेंस नहीं रखते हैं उन से भी जीएसटी वसूला जाएगा।   

COPY
SAF Team Gujarat

Wednesday, 28 November 2018

मुन्नवर_राणा सहाब की यह ग़ज़ल ने सच का मानो आईना दिखा दिया

अब फ़क़त शोर मचाने से नहीं कुछ होगा।।
सिर्फ होठों को हिलाने से नहीं कुछ होगा।।

ज़िन्दगी के लिए बेमौत ही मरते क्यों हो।।
अहले इमां हो तो शैतान से डरते क्यों हो।।

तुम भी महफूज़ कहाँ अपने ठिकाने पे हो।।
बादे अखलाक तुम्ही लोग निशाने पे हो।।

सारे ग़म सारे गिले शिकवे भुला के उठो।
दुश्मनी जो भी है आपस में भुला के उठो।।

अब अगर एक न हो पाए तो मिट जाओगे।।
ख़ुश्क पत्त्तों की तरह तुम भी बिखर जाओगे।।

खुद को पहचानो की तुम लोग वफ़ा वाले हो।।
मुस्तफ़ा वाले हो मोमिन हो खुदा वाले हो।।

कुफ्र दम तोड़ दे टूटी हुई शमशीर के साथ।।
तुम निकल आओ अगर नारे तकबीर के साथ।।

अपने इस्लाम की तारीख उलट कर देखो ।
अपना गुज़रा हुआ हर दौर पलट कर देखो।।

तुम पहाड़ों का जिगर चाक किया करते थे।।
तुम तो दरयाओं का रूख मोड़ दिया करते थे।।

तुमने खैबर को उखाड़ा था तुम्हे याद नहीं।।
तुमने बातिल को पिछाड़ा था तुम्हे याद नहीं।।।

फिरते रहते थे शबो रोज़ बियाबानो में।।
ज़िन्दगी काट दिया करते थे मैदानों में..

रह के महलों में हर आयते हक़ भूल गए।।
ऐशो इशरत में पयंबर का सबक़ भूल गए।।

अमने आलम के अमीं ज़ुल्म की बदली छाई।।
ख़्वाब से जागो ये दादरी से अवाज़ आई।।

ठन्डे कमरे हंसी महलों से निकल कर आओ।।
फिर से तपते हु सहराओं में चल कर आओ।।

लेके इस्लाम के लश्कर की हर एक खुबी उठो।।
अपने सीने में लिए जज़्बाए ज़ुमी उठो।।

राहे हक़ में बढ़ो सामान सफ़र का बांधो।।
ताज़ ठोकर पे रखो सर पे अमामा बांधो।।

तुम जो चाहो तो जमाने को हिला सकते हो।।।
फ़तह की एक नयी तारीख बना सकते हो।।।

खुद को पहचानों तो सब अब भी संवर सकता है।।
दुश्मने दीं का शीराज़ा बिखर सकता है।।

हक़ परस्तों के फ़साने में कहीं मात नहीं।।।।।।।।
तुमसे टकराए *"मुसलमानो"* ज़माने की ये औक़ात नहीं।।

✏______*Munawwar Rana*

Monday, 26 November 2018

भारत के संविधान की अनुसूचियाँ

संविधान हमारा हमारा अधिकार  दिलाता हे ।

संविधान को 26 नवम्बर 1949 जब संविधान सभा द्वारा पारित किया गया तब भारतीय संविधान में कुल 22 भाग, और 8 अनुसूचियां थीं । वर्तमान में संविधान में ये 22 भाग ,395 अनुच्छेद मूल संविधान में संवैधानिक संशोधनों के बाद अनुसूचियां की संख्या 12 हो गई है । संविधान संशोधन अधिनियम, 1992के अंतर्गत क्रमशः संविधान के 73वें और 74वें संशोधन द्वारा 11वीं एवं 12वीं अनुसूची को संविधान में जोड़ा गया हैं। नीचे भारत के संविधान की अनुसूचियाँ ,भाग एवं अनुच्छेद दिया गया है

भारत के संविधान की अनुसूचियाँ की सूची 
1) प्रथम अनुसूची :- इसके अंतर्गत भारत के 29 राज्य तथा 7 केंद्र शासित प्रदेशो का उल्लेख किया गया है|
2) दूसरी अनुसूची : इसमें भारतीय संघ के पदाधिकारियों (राष्ट्रपति ,राज्यपाल ,लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष , राजसभा के सभापति एवं उपसभापति ,विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष,विधान परिषद् के सभापति एवं उपसभापति,उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों और भारत के नियत्रंक महालेखा परीक्षक आदि ) को मिलने वाले वेतन, भत्ते तथा पेंशन का उल्लेख है |
3) तीसरी अनुसूची :- इसमें भारत के विभिन्न पदाधिकारियों(राष्ट्रपति , उप राष्ट्रपति , उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों ) की शपथ का उल्लेख है|
4) चौथी अनुसूची :- इसके अंतर्गत राज्यों तथा संघीय क्षेत्रो की राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का विवरण दिया गया है|
5) पाँचवी अनुसूची :- इसमें अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जनजाति के प्रशासन व नियंत्रण के बारे में उल्लेख है|
6) छठी अनुसूची :- इसमें असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में प्रावधान हैं|
7) सातवी अनुसूची :- इसके अंतर्गत केंद्र व राज्यों के बीच शक्तियों का बटवारे के बारे में दिया गया है| इसके अंतर्गत तीन सूचियां है :-
i) संघ सूची :- इसके अंतर्गत 100 विषय है| इन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केवल केंद्र को है | संविधान के लागू होने के समय इसमे 97 विषय थे |
ii) राज्य सूची :- इस सूची में 61 विषय है| जिन पर कानून बनाने का अधिकार केवल राज्य को है| लेकिन राष्ट्रहित से सम्बन्धित मामलो में केंद्र भी कानून बना सकता है | संविधान के लागू होने के समय इसमे 66 विषय थे |
iii) समवर्ती सूची :- इसके अंतर्गत 52 विषय है| इन पर केंद्र व राज्य दोनों कानून बना सकते है|परन्तु कानून के विषय समान होने पर केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून मान्य होता है|राज्य द्वारा बनाया गया कनून केंद्र द्वारा बनाने के बाद समाप्त हो जाता है| संविधान के लागू होने के समय इसमे 47 विषय थे |
8) आठवी अनुसूची :- इसमें भारतीय संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त 22 भाषाओं का उल्लेख किया गया है| मूल संविधान में 14 मान्यता प्राप्त भाषाए थी | सन 2004 में चार नई भाषाए मैथली, संथाली, डोगरी और बोडो को इसमें शामिल किया गया |
9) नौंवी अनुसूची :- यह अनुसूची प्रथम संविधान संसोधन अधिनियम 1951 द्वारा जोड़ी गयी थी| इस अनुसूची में सम्मिलित विषयों को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती| लेकिन यदि कोई विषय मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करे तो उच्चतम न्यायालय इस कानून की समीक्षा कर सकता है| अभी तक नौंवी अनुसूची में 283 अधिनियम है, जिनमे राज्य सरकार द्वारा सम्पति अधिकरण का उल्लेख प्रमुख है|
10) दसवी अनुसूची :- इसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम 1985 द्वारा मूल संविधान में जोड़ा गया| इस अनुसूची में दल-बदल सम्बन्धित कानूनों का उल्लेख किया गया है|
11) ग्यारहवी अनुसूची :- यह अनुसूची 73वें संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा मूल संविधान में जोड़ा गया| यह अनुसूची पंचायती राज से सम्बन्धित है, जिसमे पंचायती राज से सम्बन्धित 29 विषय है|
12) बारहवी अनुसूची :- यह अनुसूची 74वें संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा मूल संविधान में जोड़ा गया| इसमें शहरी क्षेत्रों के स्थानीय स्वशासन संस्थानों से सम्बन्धित 18 विषय है|


Thursday, 1 November 2018

भारत का मुसलमान और मूलनिवासी मूवमेंट

date:- 22/10/2018
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▪मजहब ए इस्लाम क्या कहता है ?
▪ भारत मे मुस्लिम शासको  ने क्या किया ?
▪ आजादी के बाद मुस्लिम ने क्या किया ?
▪ दंगो के दौरान मुस्लिमो पर हमले कौन करता है और क्यो ?
▪ दंगे कौन कराता है ?
▪ क्या हकीकत मे भारत सेक्युलर मुल्क है ?
▪ क्या कोंग्रेस पार्टी सेक्युलर है  ?
▪ क्या सामाजिक मूवमेंट मे औरते हिस्सेदारी कर सकती है ?
▪मूलनिवासी मूवमेंट से जुड़कर काम करना  जोखिमपूर्ण  है या आसान ?
▪ मुसलमानो को इस मे जुडना चाहिए कि नही ?   क्यो ?
▪ मूवमेंट से जुड़े लोग जो कार्य कर रहे है वो अहम है कि नही ?
▪ आलिमो के लिए क्या अहम पैगाम ?

       *सोशल मीडिया मे मूलनिवासी मूवमेंट के बारे मे पढ सुन कर मुस्लिमो मे एक जिज्ञासा बनी हुई है तो साथ साथ जहनो मे कुछ सवालात भी होते है, जिस के जवाबात जरुरी है, जिसे हल करने के लिए आप की खिदमत मे एक विडियो जो सिर्फ 8 मिनट का है वो पेश है।*

   आप सुकून से सुनिए और खुद फैसला कीजिए।
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कच्छ Demolition 2026 Riport।

कच्छ 2026 डिमोलिशन रिपोर्ट । सोशल मीडिया से तथ्य, घटनाक्रम और ज़मीनी चर्चाओं का संकलन .... साथियों,  इस रिपोर्ट को तैयार करने का...