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Sunday, 28 March 2021

क्या भारत बनेगा विकासशील देश? भारत के नागरिकों के हालात कैसे हे?


किसी भी भारतीय से पूछिए कि भारत का विकास कैसा होना चाहिए?तो अधिकतर का जवाब यही होगा कि अमेरिका की तर्ज़ पर भारत भी विकसित राष्ट्र बने। लेकिन ठहरिए! अमेरिकी अपने एक निर्दोष नागरिक की कस्टोडियल मौत के बाद आंदोलित हो गए थे। लेकिन भारतीय गृह मंत्रालय के मुताबिक़ भारत मे हर दिन पांच लोग पुलिस के ज़ेरेहिरासत मरते हैं। यह रिपोर्ट 2019-20 की है, जिसमें गृहमंत्रालय ने बताया था कि भारत में हर दिन औसतन पांच लोग पुलिस के ज़ेरेहिरासत जान गंवाते हैं। अकेले उत्तर प्रदेश में 2019-20 में 400 लोग न्यायिक हिरासत मारे गए हैं। इसके बाद मध्यप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब और महाराष्ट्र का नंबर है। इन राज्यों में भी 2019-20 में न्यायिक हिरासत में औसतन प्रत्येक राज्य में 100 से अधिक लोग मारे गए हैं। ये ऐसी मौतें हैं जिसके खिलाफ कोई आंदोलन नहीं होता, कहीं काली पट्टी बांधकर मोमबत्ती जुलूस भी नहीं निकाला जाता है। आपको याद होगा कि बीते वर्ष कोरोना काल में अमेरिका में जार्ज फ्लाॅयड नाम के काले शख्स की पुलिस द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस हत्या के खिलाफ अमेरिका समेत कई पश्चिमी देश #BlackLivesMatter की तख़्तियां हाथों में लेकर सड़को पर उतर आए थे। इधर भारतीय गृहमंत्रालय तो खुद स्वीकार कर रहा है कि हर दिन औसतन पांच लोग पुलिस कस्टडी या न्यायिक हिरासत में अपनी जान गंवाते हैं लेकिन इसके बावजूद इन घटनाओं के ख़िलाफ विरोध के स्वर सुनाई नहीं देते। शनिवार को यूपी के अंबेडकरनगर मे पुलिस के ज़ेरे हिरासत ज़ियाउद्दीन की हत्या हो गई। सवाल फिर वही है कि भारतीय समाज अमेरिकियों की तर्ज़ पर इस तरह के अपराध के ख़िलाफ कब अभियान चलाएगा? क्या सिर्फ चमचमाती सड़कें, ऊंची-ऊंची इमारतें बनाना ही विकसित राष्ट्र का पैमाना हैं? हक़ीक़त यह है कि मानवाधिकारों एंव मानवीय मूल्यों की रक्षा के बिना ये तमाम चीज़ें बेईमानी हैं। जिस समाज में मानवीय मूल्यों, मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, वह समाज कुछ भी हो सकता है लेकिन उसे विकसित समाज नहीं कहा जा सकता।।

*Wasim Akram Tyagi✍✍*

Monday, 21 September 2020

अस्तख फिरुल्लाह याजिद जिंदा. . . . के नारे लगे पाकिस्तान मे देखे परहे.

SAFTEAM GUJARAT
DATE. 21 SEP 2020

      अस्सला मुअलयकुम व.व.

साथियों दोस्तों  दुनिया मे  इस कोरोना काल मे दज्जाल केआने से पेहले इस्लामी  लिबाज मे  इस्लाम  और मुसलमानो के दुस्मनो ने  अजीब सा  माहोल बनाना सुरु कर दिया हे.

     पिछले  दिनो  4 sep 2020 मक्का हरम शरीफ की मस्जिद मे जुम्मा के दिन  हरम  इमाम  ने   इज़रायल  और  अमेरिका   को  लेकर जो खुत्बा  दिया  वे बहोत ही    हैरत   अंगज   वाकिया  था  जिसकी    लिंक  निचे मे   शेर करता हु.
उपर जो  तस्वीर  हमने आपतक शेर कि हे  वो  पाकिसतान  करांची  मे  13 sep 2020 के रोज  अजमते सहाबा के नामसे रेली का  आयोजन  किया गयाथा जिसमे  यजिद जिंदाबाद के नारे लगाये गये  और शिया समुदाय को  खुल कर चिल्ला चिल्ला कर काफिर कहा गया  ये दिन और सहाबा की  आरमे   मिल्लर को बातने  और  मजलुम बनाने का जो प्रयास हो रहा हे   बहोत ही   हैरत अंगेज हे.
  इस   प्रगाम  मे   एहले  हदीश  और  देवबंद   से जुडे उल्मा  की हाजरी  को नोध किया गया हे, चुंके  इस  मुद्दे  को  ने सोशल मिडिया  से  जानकारी  हासिल की हे  बहोत से   अलग अलग विचारो से जुडे   लोगो ने  इसका पुर जोर विरोध किया हे, बताया जाता हे, ये बहोत बड़ी  साज पाकिस्तान के खिलाफ हो रही हे एहले सुन्नत और शीया समुद्र  मे  नफरत   पैदा करने की साजिश हे.

आप  इस लिंक  पर जाकर देख सकते हे.

Monday, 20 July 2020

समलैंगिकता Section 377 IPC Verdict in Hindi, IPC Section 377 India Supreme Court SC ... -

भारतीय न्यायपालिका का मानवजाति विरोध 377 का फैसला सुने...Section 377 IPC Verdict in Hindi, IPC Section 377 India Supreme Court SC ... - Jansatta

Section 377: क्या है धारा 377? अब सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध मानने से किया इनकार.

समलैंगिकता अपराध है या नहीं, ( Homosexuality) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो चुका है. समलैंगिकता को अवैध बताने वाली IPC की धारा 377 की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया.

नई दिल्ली: 

समलैंगिकता अपराध है या नहीं, ( Homosexuality) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो चुका है. समलैंगिकता को अवैध बताने वाली IPC की धारा 377 (Section 377) की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया और कहा कि समलैंगिक संबंध अब से अपराध नहीं हैं. संविधान पीठ ने सहमति से दो वयस्कों के बीच बने समलैंगिक यौन संबंध को एक मत से अपराध के दायरे से बाहर कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के एक हिस्से को, जो सहमति से अप्राकृतिक यौन संबंध को अपराध बताता है, तर्कहीन, बचाव नहीं करने वाला और मनमाना करार दिया. 

समलैंगिकता अपराध है या नहीं, यह तय करने का काम अब सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ करेगी। लेकिन समलैंगिक अधिकारों के पक्ष में खड़े लोगों के लिए यही बड़ी बात है कि सुप्रीम कोर्ट मामले की फिर से सुनवाई को तैयार हो गया है।

चीफ जस्टिस की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच ने पांच जजों की संविधान पीठ पर यह तय करने की जिम्मेदारी छोड़ी है कि आईपीसी की धारा 377 के तहत समलैंगिकता को जुर्म की श्रेणी से हटाया जाए या नहीं। हालांकि संविधान पीठ पहले तय करेगा कि यह याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं।

मामले में क्या हुआ था
इस मामले में 2009 में दिल्ली हाईकोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाने का फैसला दिया था, जिसे केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसने दिसंबर, 2013 में हाईकोर्ट के आदेश को पलटते हुए समलैंगिकता को IPC की धारा 377 के तहत अपराध बरकरार रखा। दो जजों की बेंच ने इस फैसले पर दाखिल पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी थी।
चार जजों ने दी थी इजाजत
इसके बाद, 23 अप्रैल, 2014 को चार जजों - तत्कालीन चीफ जस्टिस पी सदाशिवम, जस्टिस आरएम लोढा, जस्टिस एचएल दत्तू और जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय - की बेंच ने क्यूरेटिव पिटीशन पर खुली अदालत में सुनवाई करने का फैसला दिया था, लेकिन अब ये चारों जज भी रिटायर हो चुके हैं।

क्या है बड़ा आधार...?
वैसे 2013 में ही सुप्रीम कोर्ट की दूसरी बेंच ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रांसजेंडरों को तीसरी कैटेगरी में शामिल कर उन्हें ओबीसी के तहत आरक्षण और दूसरी सुविधाएं देने के आदेश दिए थे, हालांकि उस समय बेंच ने समलैंगिकता के आदेश पर कोई टिप्पणी नहीं की थी।

Monday, 20 January 2020

मूलनिवासी एकता मंच करजन दो.बाबा साहेब अंबेडकर की यादमें प्रोगाम।

मूलनिवासी एकता मंच-करजन दो.बाबा साहेब स्थम्ब ख़ातमूर्त पोग्राम.

#तारीख_19_जनवरी_2020  #mulnivasi_Akta_Manch_karjan 

आज रोज करजन तालुकाके गांव करँभा में मूलनिवासी एकता मंच की तरफसे दो.बाबा साहेब अंबेडकर की स्थम्ब खाटमूरत (ओपनिग) के प्रोग्राम में हमारी टीम को आमंत्रित किया गयाथा जिसमे में ओर हमारे साथी इम्तियाज पटेल उपस्थित रहेथे..

इस प्रोग्राममें दो.बाबा साहब के विचारों को लेकर मेरी बात रखने के लिये मुजे समय दिया गया जिसमें बहोत अच्छे से हमारी तिमके विचार रखे और आने वाले समयमे हम सब मिलकर समाज ओर मानव हितमें हमेशा कार्य करेंगे।

https://m.facebook.com/watchparty/632864054143092/

आजके इस प्रोग्राममें  हमे दावत देने के लिए ओर हमे स्टेजसे दमी विचार रखने के लिऐ समय देने को लेकर मूलनिवासी एकता मंच करजन की टीम का तहेदिल से सुक्रिया अदाकर्ता करते है।

ख़ातमूर्त करते हुजैफा पटेल

Sunday, 15 December 2019

भारतीय संविधान अनुच्छेद 19 (Article 19 in Hindi) - वाक्‌-स्वातंत्र्य आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण

विवरण

(1) सभी नागरिकों को--
(क) वाक्‌-स्वातंत्र्य और अभिव्यक्ति-स्वातंत्र्य का,
(ख) शांतिपूर्वक और निरायुध सम्मेलन का,
(ग) संगम या संघ बनाने का,
(घ) भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण का,
(ङ) भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भाग में निवास करने और बस जाने का, [और] 

(छ) कोई वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारोबार करने का अधिकार होगा।
[(2) खंड (1) के उपखंड (क) की कोई बात उक्त उपखंड द्वारा दिए गए अधिकार के प्रयोग पर [भारत की प्रभुता और अखंडता], राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, लोक व्यवस्था, शिष्टाचार या सदाचार के हितों में अथवा न्यायालय-अवमान, मानहानि या अपराध-उद्दीपन के संबंध में युक्तियुक्त निर्बंधन जहाँ तक कोई विद्यमान विधि अधिरोपित करती है वहाँ तक उसके प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या वैसे निर्बंधन अधिरोपित करने वाली कोई विधि बनाने से राज्य को निवारित नहीं करेगी ।]
(3) उक्त खंड के उपखंड (ख) की कोई बात उक्त उपखंड द्वारा दिए गए अधिकार के प्रयोग पर [भारत की प्रभुता और अखंडता] याट लोक व्यवस्था के हितों में युक्तियुक्त निर्बन्धन जहाँ तक कोई विद्यमान विधि अधिरोपित करती है वहाँ तक उसके प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या वैसे निर्बन्धन अधिरोपित करने वाली कोई विधि बनाने से राज्य को निवारित नहीं करेगी।
(4) उक्त खंड के उपखंड (ग) की कोई बात उक्त उपखंड द्वारा दिए गए अधिकार के प्रयोग पर [भारत की प्रभुता और अखंडता] याट लोक व्यवस्था या सदाचार के हितों में युक्तियुक्त निर्बन्धन जहाँ तक कोई विद्यमान विधि अधिरोपित करती है वहाँ तक उसके प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या वैसे निर्बन्धन अधिरोपित करने वाली कोई विधि बनाने से राज्य को निवारित नहीं करेगी।

(5) उक्त खंड के [उपखंड (घ) और उपखंड (ङ)] की कोई बात उक्त उपखंडों द्वारा दिए गए अधिकारों के प्रयोग पर साधारण जनता के हितों में या किसी अनुसूचित जनजाति के हितों के संरक्षण के लिए युक्तियुक्त निर्बन्धन जहाँ तक कोई विद्यमान विधि अधिरोपित करती है वहाँ तक उसके प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या वैसे निर्बन्धन अधिरोपित करने वाली कोई विधि बनाने से राज्य को निवारित नहीं करेगी।


(6) उक्त खंड के उपखंड (छ) की कोई बात उक्त उपखंड द्वारा दिए गए अधिकार के प्रयोग पर साधारण जनता के हितों में युक्तियुक्त निर्बन्धन जहाँ तक कोई विद्यमान विधि अधिरोपित करती है वहाँ तक उसके प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या वैसे निर्बन्धन अधिरोपित करने वाली कोई विधि बनाने से राज्य को निवारित नहीं करेगी और विशिष्टतया [उक्त उपखंड की कोई बात--
(i) कोई वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारबार करने के लिए आवश्यक वृत्तिक या तकनीकी अर्हताओं से, या
(ii) राज्य द्वारा या राज्य के स्वामित्व या नियंत्रण में किसी निगम द्वारा कोई व्यापार, कारबार, उद्योग या सेवा, नागरिकों का पूर्णतः या भागतः अपवर्जन करके या अन्यथा, चलाए जाने से,
जहाँ तक कोई विद्यमान विधि संबंध रखती है वहाँ तक उसके प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या इस प्रकार संबंध रखने वाली कोई विधि बनाने से राज्य को निवारित नहीं करेगी।]


7/11 मुंबई विस्फोट: यदि सभी 12 निर्दोष थे, तो दोषी कौन ❓

सैयद नदीम द्वारा . 11 जुलाई, 2006 को, सिर्फ़ 11 भयावह मिनटों में, मुंबई तहस-नहस हो गई। शाम 6:24 से 6:36 बजे के बीच लोकल ट्रेनों ...