Followers

Showing posts with label हुजैफा पटेल भरुच गुजरात. Show all posts
Showing posts with label हुजैफा पटेल भरुच गुजरात. Show all posts

Tuesday, 21 January 2020

जमियते उलमाअे हिंद गुजरात

अस्लामुअ लय कुम व.व.व.
पत्र लिखने वाला गुजरात भरुच से
नाम: - हुजैफा इ.पटेल
समाज सेवक
पत्र लिखते हे जमियते उलमाअे हिंद गुजरात के पर्मुख
इस नाचीस की सलाम बाद मे अपने अनुभव अोर समाज के फिकर के ज्जबे के साथ ये लिखने की कोसीस करता हु ,
वे से मे इस काबिल नही हू लेकीन मुजे मेरा जमिर पिछले कुच दिनोसे ये लिखकर आप तक ये मेसेज के जरिये बात रखने की बारबार जिन्जोर रहा हे इस लिये ये मे लिखने की आपके समने खुसताखी करने जा रहा हु ,
मेने अपने जवान नी के इस दोर मे बहोत कुच सिखा हे कुच हालात ने सिखाया कुच समाज ने सीखाया हे अोर कुच समाज की वेव्सथा ने मुजे सिखाया हे ,
अनुभव तो बहोत हुवा लेकिन मे आपके सामने सिधे मोजु को जोरकर वात रखता हु ताके मेरा मेसेज अोर मेरे विचार आपको समज आसके अोर इसके बाद अाप जरर मुजे जवाब देंगे ,
मेने मुसलिम सारी अोर्गेनाय्जिसन का जाइजा लिया हे इसमे ज.उ.हि. के बारे मेने परहा अोर जाना के ये संगधन भारत देशका सबसे पुराना संगधन हे अोर ये उस व्कत बना जब इस देशमे अंगरेज हुकुम भारतमे आम लोगो पर बे पनाह जुलम कर रहे थे इस जुलमसे अोर अंगरेजो की गुलामी से आजादी के लीये  ज.उ.हि. ने अपना रोल बखुबी नीभाया हे ,
लेकीन अाज के जितने भी हे ज.उ.हि. के मेम्बर हे वो अपना काम सहि थंगसे करते मुजे नहि आरहे हे अोर मे खासकर मे भरुच की बात करता हु यंहातो ज.उ.हि. जेसे कोय हे हि नही अेसा लगता हे अोर इसवक्त मे जीतना आप अपना परचार कर रहे हे बिलकुल ज.उ.हि.के संगधन के विराध मे हे
मेरा आपको सवाल हे जवाब देना ताके मुजे ये मालुम हो के मे सही हु के नही ,
सवाल १ कया मुसलिम समाज को  अपके संगधन भविसय का काय फायदा हे ,
सवाल २  कया  आप मुसलिम समाजके युवा को अागे बरहाने का काम करते हो ,
सवाल ३  कया आप भविसय की नजर रक्ते कोय काम या कोय तंजिम चलाते हो ,
सवाल ૪  कया आप लोग इतनी बरी तंजिम का फायदा मुसलिम समाजो को बरे पलान के साथ संजाते हे ,
सवाल ५  कया आप मुसलिम युवा जो समाज के लिये कुच काम करने का ज्जबा रखते हे उनको आगे बरहा ने का काम करते हो ,
सवाल ६  कया आप समाज को अोर बेहतर आपकी तंजिम का फायदा हो अेसा कोय काम करते हे ,
अल्लाह हाफिज
आपके जवाब का आभारी
मे  मेरा नंबर भी देता हु अगर कोय मेसेज देना होता आप इस नंबर 9898335767वोटसअोप पर भेजे

Monday, 26 November 2018

भारत के संविधान की अनुसूचियाँ

संविधान हमारा हमारा अधिकार  दिलाता हे ।

संविधान को 26 नवम्बर 1949 जब संविधान सभा द्वारा पारित किया गया तब भारतीय संविधान में कुल 22 भाग, और 8 अनुसूचियां थीं । वर्तमान में संविधान में ये 22 भाग ,395 अनुच्छेद मूल संविधान में संवैधानिक संशोधनों के बाद अनुसूचियां की संख्या 12 हो गई है । संविधान संशोधन अधिनियम, 1992के अंतर्गत क्रमशः संविधान के 73वें और 74वें संशोधन द्वारा 11वीं एवं 12वीं अनुसूची को संविधान में जोड़ा गया हैं। नीचे भारत के संविधान की अनुसूचियाँ ,भाग एवं अनुच्छेद दिया गया है

भारत के संविधान की अनुसूचियाँ की सूची 
1) प्रथम अनुसूची :- इसके अंतर्गत भारत के 29 राज्य तथा 7 केंद्र शासित प्रदेशो का उल्लेख किया गया है|
2) दूसरी अनुसूची : इसमें भारतीय संघ के पदाधिकारियों (राष्ट्रपति ,राज्यपाल ,लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष , राजसभा के सभापति एवं उपसभापति ,विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष,विधान परिषद् के सभापति एवं उपसभापति,उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों और भारत के नियत्रंक महालेखा परीक्षक आदि ) को मिलने वाले वेतन, भत्ते तथा पेंशन का उल्लेख है |
3) तीसरी अनुसूची :- इसमें भारत के विभिन्न पदाधिकारियों(राष्ट्रपति , उप राष्ट्रपति , उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों ) की शपथ का उल्लेख है|
4) चौथी अनुसूची :- इसके अंतर्गत राज्यों तथा संघीय क्षेत्रो की राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का विवरण दिया गया है|
5) पाँचवी अनुसूची :- इसमें अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जनजाति के प्रशासन व नियंत्रण के बारे में उल्लेख है|
6) छठी अनुसूची :- इसमें असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में प्रावधान हैं|
7) सातवी अनुसूची :- इसके अंतर्गत केंद्र व राज्यों के बीच शक्तियों का बटवारे के बारे में दिया गया है| इसके अंतर्गत तीन सूचियां है :-
i) संघ सूची :- इसके अंतर्गत 100 विषय है| इन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केवल केंद्र को है | संविधान के लागू होने के समय इसमे 97 विषय थे |
ii) राज्य सूची :- इस सूची में 61 विषय है| जिन पर कानून बनाने का अधिकार केवल राज्य को है| लेकिन राष्ट्रहित से सम्बन्धित मामलो में केंद्र भी कानून बना सकता है | संविधान के लागू होने के समय इसमे 66 विषय थे |
iii) समवर्ती सूची :- इसके अंतर्गत 52 विषय है| इन पर केंद्र व राज्य दोनों कानून बना सकते है|परन्तु कानून के विषय समान होने पर केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून मान्य होता है|राज्य द्वारा बनाया गया कनून केंद्र द्वारा बनाने के बाद समाप्त हो जाता है| संविधान के लागू होने के समय इसमे 47 विषय थे |
8) आठवी अनुसूची :- इसमें भारतीय संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त 22 भाषाओं का उल्लेख किया गया है| मूल संविधान में 14 मान्यता प्राप्त भाषाए थी | सन 2004 में चार नई भाषाए मैथली, संथाली, डोगरी और बोडो को इसमें शामिल किया गया |
9) नौंवी अनुसूची :- यह अनुसूची प्रथम संविधान संसोधन अधिनियम 1951 द्वारा जोड़ी गयी थी| इस अनुसूची में सम्मिलित विषयों को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती| लेकिन यदि कोई विषय मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करे तो उच्चतम न्यायालय इस कानून की समीक्षा कर सकता है| अभी तक नौंवी अनुसूची में 283 अधिनियम है, जिनमे राज्य सरकार द्वारा सम्पति अधिकरण का उल्लेख प्रमुख है|
10) दसवी अनुसूची :- इसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम 1985 द्वारा मूल संविधान में जोड़ा गया| इस अनुसूची में दल-बदल सम्बन्धित कानूनों का उल्लेख किया गया है|
11) ग्यारहवी अनुसूची :- यह अनुसूची 73वें संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा मूल संविधान में जोड़ा गया| यह अनुसूची पंचायती राज से सम्बन्धित है, जिसमे पंचायती राज से सम्बन्धित 29 विषय है|
12) बारहवी अनुसूची :- यह अनुसूची 74वें संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा मूल संविधान में जोड़ा गया| इसमें शहरी क्षेत्रों के स्थानीय स्वशासन संस्थानों से सम्बन्धित 18 विषय है|


Tuesday, 7 August 2018

मुस्लिम समाज कि संस्थाओं ओर लीडरों से सवाल,

Date:- 07/08/2018

मुस्लिम समाज कि संस्थाओं ओर लीडरों से सवाल,

विषय 👉🏿 मुस्लिम समाजमे फिलहाल के हालात देखते हुये कुच संस्थान  ओर लीडर एजुकेशन पर जोर दे रहे हे, इनसे सवाल हे,

सवाल 👉🏿 मुस्लिम समाजके टीचर ओर प्रोफेसर जेसे लोग कया समाज के बच्चो के एजुकेशन के लिये इमानदारी से अपना फर्ज नोभा ते हे?

सवाल 👉🏿 हमारे समाज की संस्थाओं ओर स्कुलो मे मुस्लिम बच्चो के साथ एजुकेशन के लिये भेदभाव ओर जातीवाद से हतकर इमानदारी के साथ बच्चो से सुलुक किया जाता हे?

सवाल 👉🏿 अगर स्कुलो मे बच्चो से गलत तरीके से किसीभी तरहा की "फ्रि" ली जाती हे ओर बच्चो के भविष्य को लेकर उनके एजुकेशन को कमजोर खुद हमारे लोग करते हे, इनके खिलाफ कुच आप लोग थोस कदम उथावोंगे कया?

इस तरहा के हजारों  मेरे पास रिपोर्ट हे जो ये साबीत करता हे, के हमे हमारे समाज के एजुकेशन  के लिये सबसे पेहले अंदर की बिमारी से लरना परेगा तब हम हमारे समाजके लिये बेहतर कार्य कर सकते हे,

मुजे उम्मीद हे , मेरे सवालों के जवाब जरुर मिलेंगे, अगर ये नही हुवा तो मे सोचने पर मजबुर हो जावुंगा के ये सिर्फ दिखावा हे,

हुजैफा पटेल भरुच गुजरात,
मो.9898335767  (SAF Team)
social active force

Saturday, 15 April 2017

इस्लामकी पेहचान के लीये एक नजर

इस्लाम आ चुका है आपके जीवन में Islam means
1. हिंदू धर्म की कोई एक सर्वमान्य परिभाषा आज तक तय नहीं है जबकि इस्लाम कीपरिभाषा तय है।
2. हिंदू भाई बहनों के लिए कर्तव्य और अकर्तव्य कुछ भी निश्चित नहीं है। एक आदमी अंडा तक नहीं छूता और अघोरी इंसान की लाश खाते हैं जबकि दोनों ही हिंदू हैं।
जबकि एक मुसलमान के लिए भोजन में हलाल हराम निश्चित है।
3. हिंदू मर्द औरत के लिए यह निश्चित नहीं है कि वे अपने शरीर को कितना ढकें ?, एक अपना शरीर ढकता है और दूसरा पूरा नंगाही घूमता है।
जबकि मुस्लिम मर्द औरत के लिए यह निश्चित है कि वे अपने शरीर का कितना अंगढकें ?
4. हिंदू के लिए उपासना करना अनिवार्य नहीं है बल्कि ईश्वर के अस्तित्व को नकारने के बाद भी लोग हिंदू कहलाते हैं।
जबकि मुसलमान के लिए इबादत करना अनिवार्य है और ईश्वर का इन्कार करने के बाद उसे वह मुस्लिम नहीं रह जाता।
5. केरल के हिंदू मंदिरों में आज भी देवदासियां रखी जाती हैं और औरतों द्वारा नाच गाना तो ख़ैर देश भर के हिंदूमंदिरों में होता है। इसे ईश्वर का समीप पहुंचने का माध्यम माना जाता है।
जबकि मस्जिदों में औरतों का तो क्या मर्दों का भी नाचना गाना गुनाह और हराम है और इसे ईश्वर से दूर करने वाला माना जाता है।
6. हिंदू धर्म ब्याज लेने से नहीं रोकता जिसकी वजह से आज ग़रीब किसान मज़दूर लाखों की तादाद में मर रहे हैं।
जबकि इस्लाम में ब्याज लेना हराम है।
7. हिंदू धर्म में दान देना अनिवार्य नहीं है। जो देना चाहे, दे और जो न देना चाहे तो वह न दे और कोई चाहे तो दान में विश्वास ही न रखे।
जबकि इस्लाम में धनवान पर अनिवार्य है कि वह हर साल ज़रूरतमंद ग़रीबों को अपने माल में से 2.5 प्रतिशत ज़कात अनिवार्य रूप से दे। इसके अलावा फ़ितरा आदि देने के लिए भी इस्लाम में व्यवस्था की गई है।
8. हिंदू धर्म में ‘ब्राह्मणों को दान‘ देने की ज़बर्दस्त प्रेरणा दी गई है।
जबकि पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह व्यवस्था दी है कि हमारी नस्ल में से किसी को भी सदक़ा-ज़कात मत देना। दूसरे ग़रीबों को देना। हमारे लिए सदक़ा-ज़कातलेना हराम है।
9. सनातनी हिंदू हों या आर्य समाजी, दोनों ही मानते हैं कि वेद के अनुसार पतिकी मौत के बाद विधवा अपना दूसरा विवाह नहीं कर सकती।
जबकि इस्लाम में विधवा को अपना दूसरा विवाह करने का अधिकार है बल्कि इसे अच्छा समझा गया है कि वह दोबारा विवाह करले।
10. सनातनी हिंदू हों या आर्य समाजी, दोनों ही यज्ञ करने को बहुत बड़ा पुण्य मानते हैं।
जबकि इस्लाम में यह पाप माना गया है कि आग में खाने पीने की चीज़ें जला दी जाएं।खाने पीने की चीज़ें या तो ख़ुद खाओ या फिर दूसरे ज़रूरतमंदों को दे दो। ऐसा कहा गया है।
11. सनातनी हिंदू और आर्य समाजी, दोनों ही वर्ण व्यवस्था को मानते हैं और वर्णों की ऊंच नीच और छूत छात को भी मानते हैं।
जबकि इस्लाम में न वर्ण व्यवस्था है और नही छूत छात। इस्लाम सब इंसानों को बराबर मानता है और आजकल हिंदुस्तानी क़ानून भीयही कहता है और हिंदू भाई भी इसी इस्लामीविचार को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
12. सनातनी हिंदू और आर्य समाजी, दोनों ही वैदिक धर्म की परंपरा का पालन करते हुए चोटी रखते हैं और जनेऊ पहनते हैं।
जबकि इस्लाम में न तो चोटी है और न ही जनेऊ।
13. सनातनी हिंदू और आर्य समाजी, दोनों ही वेद के अनुसार 16 संस्कार को मानते हैं, जिनमें एक विवाह भी है। इस संस्कार के अनुसार पत्नी अपने पति के मरने के बादभी उसी की पत्नी रहती है और उससे बंधी रहती है। पति तो पत्नी का परित्याग कर सकता है लेकिन पत्नी उसे त्याग नहीं सकती।
जबकि इस्लाम में निकाह एक क़रार है जो पति की मौत से या तलाक़ से टूट जाता है और इसके बाद औरत उस मर्द की पत्नी नहीं रह जाती। वह अपनी मर्ज़ी से अपना विवाह फिर से कर सकती है। इस्लाम में पति तलाक़ दे सकता है तो पत्नी के लिए भी पति से मुक्ति के लिए ख़ुलअ की व्यवस्था की गई है।
अब हो यह रहा है कि सनातनी और आर्य समाजी, दोनों ही ख़ुद वेद की व्यवस्था से हटकर इस्लामी व्यवस्था को फ़ोलो कर रहे हैं। विधवाओं के पुनर्विवाह वे धड़ल्ले से कररहे हैं। जब मुसलमानों ने अपने निकाह को विवाह की तरह संस्कार नहीं बनाया तो फिर हिंदू भाई अपने संस्कार को इस्लामी निकाह की तरह क़रार क्यों और किस आधार परबना रहे हैं ?
जिस व्यवस्था पर विश्वास है, उस पर चलने के बजाय वे इस्लामी व्यवस्था का अनुकरण क्यों कर रहे हैं ?
14. विवाह को संस्कार मानने का नतीजा यह हुआ कि विधवा औरतों को हज़ारों साल तक बड़ी बेरहमी से जलाया जाता रहा। यहां तक कि इस देश में मुसलमान और ईसाई आए और उनके प्रभाव और हस्तक्षेप से हिंदुओं कीचेतना जागी कि सती प्रथा के नाम पर विधवाको जलाना धर्म नहीं बल्कि अधर्म है और तबउन्होंने अपने धर्म को उनकी छाया प्रति बना लिया और लगातार बनाते जा रहे हैं।
15. विवाह की तरह ही गर्भाधान भी एक हिंदू संस्कार है। जब किसी पति को गर्भाधान करना होता है या अपनी पत्नि से किसी अन्य पुरूष का नियोग करवाना होता है तो वह 4 पंडितों को बुलवाता है और वे चारों पंडित पूरे दिन बैठकर वेदमंत्र पढ़ते हैं। उसके घर में खाते पीते हैं। उसके घर में यज्ञ करते हैं। उस यज्ञ से बचे हुए घी को मलकर औरत नहाती है और फिर पूरी बस्ती में घूम घूम कर बड़े बूढ़ों को बताती है कि आज उसके साथ क्या होने वाला है ?
बड़े बूढ़े अपनी अनुमति और आशीर्वाद देते हैं, तब जाकर पति महाशय या कोई अन्य पुरूष उस औरत के साथ वेद के अनुसार सहवासकरता है।
जबकि इस्लाम में गर्भाधान संस्कार ही नहीं है और पत्नि को किसी ग़ैर मर्द के साथ सोने के लिए बाध्य करना बहुत बड़ा जुर्म और गुनाह है।
मुसलमान पति पत्नी जब चाहे सहवास कर सकते हैं। शोर पुकार मचाकर लोगों को इसकी इत्तिला देना इस्लाम में असभ्यता और पाप है।
आजकल हिंदू भाई भी इसी रीति से अपनी पत्नियों को गर्भवती कर रहे हैं क्योंकियही रीति नेचुरल और आसान है।
धर्म सदा ही नेचुरल और आसान होता है।
मुश्किल में डालने वाली चीज़ें ख़ुद ही फ़ेल हो जाती हैं। लोग उनका पालन करना चाहें तो भी नहीं कर पाते। शायद ही आजकल कोई गर्भाधान संस्कार करता हो। इस्लामी रीति से पैदा होने के बावजूद इस्लाम पर नुक्ताचीनी करना केवल अहसानफ़रामोशी है। जिसका कारण अज्ञानता है।
16. सनातनी हिंदू और आर्य समाजी, दोनों के नज़्दीक धर्म यह है कि पत्नि से संभोगतब किया जाए जबकि उससे संतान पैदा करने की इच्छा हो। इसके बिना संभोग करने वाला वासनाजीवी और पतित-पापी माना जाता है।
जबकि इस्लाम में इस तरह की कोई पाबंदी नहीं है। इस्लामी व्यवस्था यही है कि पति पत्नी जब चाहें तब आनंद मनाएं। उन्हें आनंदित देखकर ईश्वर प्रसन्न होता है। आजकल हिंदू भाई भी इसी इस्लामी व्यवस्था पर चल रहे हैं।
18. शंकराचार्य जी के अनुसार हरेक वर्ण और लिंग के लिए वेद को पढ़ने और पढ़ाने की आज़ादी नहीं है।
जबकि क़ुरआन सबके लिए है। किसी भी रंगो-नस्ल के नर नारी इसे जब चाहंे तब पढ़ सकते हैं।
19. इसी के साथ हिंदू धर्म अर्थात वैदिक धर्म में चार आश्रम भी पाए जाते हैं।
ब्रह्मचर्य आश्रम, गृहस्थ आश्रम, वानप्रस्थ आश्रम, सन्यास आश्रम
अति संक्षेप में 8वें वर्ष बच्चे का उपनयन संस्कार करके उसे वेद पढ़ने के लिए गुरूकुल भेज दिया जाए और बच्चा 25 वर्ष तक वीर्य की रक्षा करे। इसे ब्रह्मचर्य आश्रम कहते हैं। लेकिन हमारे शहर का संस्कृत महाविद्यालय ख़ाली पड़ा है। शहर के हिंदू उसमें अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजते ही नहीं जबकि शहर के कॉन्वेंट स्कूल हिंदू बच्चों से भरे हुए हैं। जहां सह शिक्षा होती है और जहां वीर्य रक्षा संभव ही नहीं है, जहां वेद पढ़ाए ही नहीं जाते,
जहां धर्म नष्ट होता है, हिंदू भाई अपने बच्चों को वहां क्यों भेजते हैं ?
ख़ैर हमारा कहना यह है कि आजकल हिंदू भाईब्रह्मचर्य आश्रम का पालन नहीं करते और न ही वे 50 वर्ष का होने पर वानप्रस्थ आश्रम का पालन करते हुए जंगल जाते हैं औरसन्यास आश्रम भी नष्ट हो चुका है।
आज हिंदू धर्म के चारों आश्रम नष्ट हो चुके हैं और हिंदू भाई अब अपने घरों में आश्रम विहीन वैसे ही रहते हैं जैसे कि मुसलमान रहते हैं क्योंकि इस्लाम में तोये चारों आश्रम होते ही नहीं।
ज़रा सोचिए कि अगर इस्लाम हिंदू धर्म की छाया प्रति होता तो उसमें भी वही सब होताजो कि हिंदू धर्म में हज़ारों साल से चलाआ रहा है और उन बातों से आज तक हिंदू जनमानस पूरी तरह मुक्ति न पा सका।
चार आश्रम, 16 संस्कार, विधवा विवाह निषेध, नियोग, वर्ण-व्यवस्था, छूत छात, ब्याज, शूद्र तिरस्कार, देवदासी प्रथा, ईश्वर के मंदिर में नाच गाना, चोटी, जनेऊ और ब्राह्मण को दान आदि जैसी बातें जो किहिंदू धर्म अर्थात वैदिक धर्म में पाई जाती हैं, उन सबसे इस्लाम आखि़र कैसे बच गया ?
इन बातों के बिना इस्लाम को हिंदू धर्म की छाया प्रति कैसे कहा जा सकता है ?
हक़ीक़त यह है कि इस्लाम किसी अन्य धर्म की छाया प्रति नहीं है बल्कि ख़ुद ही मूलधर्म है और पहले से मौजूद ग्रंथों में धर्म के नाम पर जो भी अच्छी बातें मिलती हैं वे उसके अवषेश और यादगार हैं, जिन्हें देखकर लोग यह पहचान सकते हैं कि इस्लाम सनातन काल है, हमेशा से यही मानव जाति का धर्म है।
ईश्वर के बहुत से नाम हैं। हरेक ज़बान में उसके नाम बहुत से हैं। उसके बहुत से नामों में से एक नाम ‘अल्लाह‘ है। यह नाम क़ुरआन में भी है और बाइबिल में भी और संस्कृत ग्रंथों में भी।ईश्वर का निज नाम यही है लेकिन उसके निज नाम को ही भुला दिया गया। ईष्वर के नाम को ही नहीं बल्कि यह भी भुला दिया गया कि सब एक ही पिता की संतान हैं। सब बराबर हैं। जन्म से कोई नीच और अछूत है ही नहीं। ऐसा तब हुआ जब आदम और नूह (अ.) को भुला दिया गया जिनका नाम संस्कृत ग्रंथों में जगह जगह आया है। इन्हें यहूदी, ईसाई और मुसलमान सभी पहचानते हैं। हिंदू भाई इन्हें ऋषि कहते हैं और मुसलमान इन्हें नबी कहते हैं। इनके अलावा भी हज़ारों ऋषि-नबी आए और हर ज़माने में आए और हर क़ौम में आए। सबने लोगों को यही बताया कि जिसने तुम्हें पैदा किया है तुम्हारा भला बुराबस उसी एक के हाथ में है, तुम सब उसी की आज्ञा का पालन करो। ऋषियों और नबियों ने मानव जाति को हरेक काल में एक ही धर्म की शिक्षा दी। । वे सिखाते रहे और लोग भूलतेरहे। आखि़रकार पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इस दुनिया में आए और फिर उसी भूले हुए धर्म को याद दिलाया और ऐसे याद दिलाया कि अब किसी के लिए भूलना मुमकिन ही न रहा।
जब दबंग लोगों ने कमज़ोरों का शोषण करने के लिए धर्म में बहुत सी अन्यायपूर्ण बातें निकाल लीं, तब ईश्वर ने क़ुरआन के रूप में अपनी वाणी का अवतरण पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अन्तःकरण पर किया और पैग़म्बरसाहब ने धर्म को उसके वास्तविक रूप में स्थापित कर दिया। जिसे देखकर लोगों ने ऊंच नीच, छूतछात और सती प्रथा जैसी रूढ़ियों को छोड़ दिया। बहुतों ने इस्लाम कहकर इस्लाम का पालन करना आरंभ कर दिया और उनसे भी ज़्यादा वे लोग हैं जिन्होंने इस्लाम के रीति रिवाज तो अपनालिए लेकिन इस्लाम का नाम लिए बग़ैर। इन्होंने इस्लामी उसूलों को अपनाने का एक और तरीक़ा निकाला। इन्होंने यह किया कि इस्लामी उसूलों को इन्होंने अपने ग्रंथों में ढूंढना शुरू किया जो कि मिलने ही थे। अब इन्होंने उन्हें मानना शुरू कर दिया और दिल को समझाया कि हम तो अपने ही धर्म पर चल रहे हैं।
ये लोग हिंदू धर्म के प्रवक्ता बनकर घूमते हैं। ऐसे लोगों को आप आराम से पहचान सकते हैं। ये वे लोग हैं जिनके सिरों पर आपको न तो चोटी नज़र आएगी और न ही इनके बदन पर जनेऊ और धोती। न तो ये बचपन में ये गुरूकुल गए थे और न ही 50 वर्ष का होने पर ये जंगल जाते हैं। हरेक जाति के आदमी से ये हाथ मिलाते हैं। फिर भी ये ख़ुद को वैदिक धर्म का पालनकर्ता बताते हैं।
ख़ुद मुसलमान की छाया प्रति बनने की कोशिश कर रहे हैं और कोई इनकी चालाकी को न भांप ले, इसके लिए ये एक इल्ज़ाम इस्लाम पर ही लगा देते हैं कि ‘इस्लाम तो हिंदू धर्म की छायाप्रति है‘
ये लोग समय के साथ अपने संस्कार और अपने सिद्धांत बदलने लगातार बदलते जा रहे हैंऔर वह समय अब क़रीब ही है जब ये लोग इस्लाम को मानेंगे और तब उसे इस्लाम कहकर ही मानेंगे।
तब तक ये लोग यह भी जान चुके होंगे कि ईश्वर का धर्म सदा से एक ही रहा है। ‘
एक ईश्वर की आज्ञा का पालन करना‘ ही मनुष्य का सनातन धर्म है। अरबी में इसी को इस्लाम कहते हैं। इस्लाम का अर्थ है ‘ईश्वर का आज्ञापालन।‘

❥➖➖➖➖➖➖➖➖➖❥

                    *Tanweer gsm*

                  *+917097341071*

❥➖➖➖➖➖➖➖➖➖❥

Baraye meharbani jiyada se jiyada share kijiye taki hamare hindu bhai bhi islam ko samajh sake

❥➖➖➖➖➖➖➖➖➖❥

Follow this link to join my WhatsApp group: https://chat.whatsapp.com/9w3bvWQR4rk3Rdxh6eYo0O

Wednesday, 15 February 2017

आजाद भारत मे मुस्लमानो की खुन रेजी की फेरीस्ट

*जागो मुसलमानो जागो मुस्लमानो*
DATE :-15/20/17
1947 के क़त्लेआम में लाखों मुसलमानों की शहादत से सबक़ ले लिया हाेता ताे 1948 हैदराबाद ना हुआ हाेता...।
हैदराबाद में क़त्ल किये गये 1200 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता ताे 1964 में राउरकेला और जमशेदपुर ना हुआ हाेता...।
राउरकेला और जमशेदपुर में 8 हज़ार मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 1967 में रांची ना हुआ हाेता...।
रांची में क़त्ल किये गये 1500 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता ताे 1969 में अहमदाबाद ना हुआ हाेता...।
अहमदाबाद समीत पूरे देश में 6 महीनाें तक चलने वाले दंगों में शहीद हुए 30 हज़ार से ज़्यादा मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 1970 में भिवंडी मुम्बई ना हुआ हाेता...।
भिवंडी मुम्बई में क़त्ल किये गये 450 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 1976 में दिल्ली ना हुआ हाेता...।
दिल्ली में पुलिस के ज़रिए क़त्ल किये गये 150 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 1979 में जमशेदपुर और वेस्ट बंगाल ना हुआ हाेता...।
जमशेदपुर और वेस्ट बंगाल में क़त्ल किये गये 500 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 1980 में मुरादाबाद ना हुआ हाेता...।
मुरादाबाद और उसके आस पास क़त्ल किये गये 4 हज़ार मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 1983 में आसाम ना हुआ हाेता...।
आसाम में क़त्ल किये गये 10 हज़ार से ज़्यादा मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 1985 में फिर अहमदाबाद ना हुआ हाेता...।
अहमदाबाद में क़त्ल किये गये 1200 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 1986 में दाेबारा अहमदाबाद ना हुआ हाेता...।
अहमदाबाद में क़त्ल किये गए 250-300 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 1987 में मेरठ ना हुआ हाेता...।
मेरठ में क़त्ल किये गए 300 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 1987 ही में हाशिम पुरा और मलयाना ना हुआ हाेता...।
हाशिम पुरा, मलयाना में फाेज के जरिए क़त्ल किये गये तक़रीबन 40-45 मुस्लिम नाेजवानाें की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 1989 में भागलपुर ना हुआ हाेता...।
भागलपुर समीत कई ज़िलाें में क़त्ल किये गये 3 हज़ार मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता
ताे 1990 में कश्मीर ना हुआ हाेता...।
कश्मीर में फाेज के ज़रिए क़त्ल किये गए 50-55 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 1992 में बाबरी मस्जिद शहीद ना हुई हाेती...।
बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद मुम्बई, अलीगढ़, गुजरात और हैदराबाद समीत पूरे देश में क़त्ल किये गये 20 हज़ार मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता ताे 1993 में फिर मुम्बई ना हुआ हाेता...।
मुम्बई में दाेबारा क़त्ल किये गये 800 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता ताे 1993 में फिर कश्मीर ना हुआ हाेता...।
कश्मीर में फाेज के जरिए क़त्ल किये गए 60 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता ताे 1993 में फिर कश्मीर ना हुआ हाेता...।
कश्मीर में फाेज के जरिए क़त्ल किये 58 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 1997 में अरवाल बिहार ना हुआ हाेता...।
अरवाल बिहार में क़त्ल किये गए 80 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 2000 में वेस्ट बंगाल ना हुआ हाेता...।
वेस्ट बंगाल में क़त्ल किये गए 11 मुस्लिम मज़दूरों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 2002 में गुजरात ना हुआ हाेता...।
गुजरात में क़त्ल किये गए 3500 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 2002 में ही नराेदा पाटिया गुजरात ना हुआ हाेता...।
नराेदा पाटिया गुजरात में क़त्ल किये गए 150 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 2003 में केरला ना हुआ हाेता...।
केरला में क़त्ल किये गए 8 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 2012 में दाेबारा आसाम ना हुआ हाेता...।
आसाम में क़त्ल किये गए 250 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 2013 में मुजफ्फरनगर, शामली बाग़पत ना हुआ हाेता...।
मुजफ्फरनगर, शामली और बाग़पत में क़त्ल किये गए तक़रीबन 120 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 2014 में दाेबारा मेरठ ना हुआ हाेता...।
मेरठ में क़त्ल किये गए 4 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 2014 में सहारनपुर ना हुआ हाेता...।
सहारनपुर में क़त्ल किये गये 3 मुसलमानों की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 2014 मणिपुर ना हुआ हाेता...।
मणिपुर में जेल से निकाल कर नंगा कर के शहर भर में घुमाए जाने के बाद क़त्ल किये गये मुस्लिम नाेजवान की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 2015 में दादरी नोएडा ना हुआ हाेता...।
दादरी नोएडा में घर में घुस कर क़त्ल किये गये अख़लाक़ की शहादत से सबक़ लिया हाेता तो 2016 में लातेहार झारखंड ना हुआ हाेता...।
लातेहार में क़त्ल किये गये 15 साला इब्राहिम और इम्तियाज खान की शहादत से सबक़ लिया हाेता
तो........................... इंतज़ार कराे...।
अगर सबक़ ना लिया ताे यह दास्तान साल दर सल बढ़ती जाएगी... बस फर्क इतना हाेगा कि हाे सकता है कल मैं इस दुनिया में ना रहूँ और इस से आगे काेई और लिखे...।
यह तारीख के कुछ ही पन्ने हैं... अगर तारीख काे इंसाफ़ के साथ पूरा पूरा बयान किया जाए तो आज़ादी के बाद से काेई साल काेई महीना शायद ही ऐसा गया हाेगा जिसमें मुस्लिम मुखालिफ दंगा ना हुआ हाे...।
एक दंगे से मुसलमानों को जिस क़दर जान माल का नुकसान हाेता है वह तरक्की से पचास साल पीछे चले जाने से भी ज़्यादा हाेता है...।
लेकिन मुसलमानों ने कभी दंगों से काेई सबक़ हासिल नहीं किया...।
दंगे दाेबारा ना हाें, हाें तो खुद को कैसे महफ़ूज़ किया जाए, इंसाफ़ कैसे मिले और उसके लिए कितनी महनत करनी पड़ती है कभी मुसलमानों ने नहीं साेचा...।
इंदिरा गांधी के क़त्ल के बाद 1984 में सिखाें का क़त्लेआम हुआ जिसमें तक़रीबन 2500 बे गुनाह सिखाें काे क़त्ल किया गया था...।
लेकिन फिर उसके बाद काेई सिख मुखालिफ़ दंगा नहीं हुआ... सिखाें ने खुद काे हर तरीक़े से मज़बूत किया... अपनी हिफाज़त, तालीम, सियासत, बिजनेस हर मैदान में सिख आगे आए...। इंसाफ की काेशिशें करते रहे, याद दिलाते रहे कि उन पर ज़ुल्म हुआ है...।
उन्होंने ना कभी कानपुर का मैदान भरा तो ना कभी लखनऊ का, उन्होंने ना कभी बंगाल में मुज़ाहिरा किया ना कभी मेरठ चलाे की आवाज़ लगाई, उन्होंने ना कभी तालकटोरा में हुंकार लगाई ना कभी रामलीला मैदान भर कर चींख़े चिल्लाये...।
बहरहाल!
मैं किसी भी सियासी पार्टी काे मुसलमानों के क़त्लेआम का ज़िम्मेदार नहीं मानता...।
सबसे ज़्यादा दंगे और क़त्लेआम कांग्रेस के दाेर में हुए, कांग्रेस ने ही कट्टर हिन्दू संगठनों काे परवान चढ़ाया, लेकिन मैं किसी भी पार्टी को इसका दाेष नहीं देता...।
इसके लिए अगर ज़िम्मेदार हैं ताे खुद मुसलमान हैं...।
मुसलमानों की जमाते हैं, मुसलमानों के रहबर हैं, मुसलमानों की लीडरशिप है, जिनकी सबकी वफ़ादारियां हमेशा मुसलमानों के साथ ना हाे कर पार्टी बेस पर रहीं...।
खैर!
जिस क़ौम काे खुद बदलने की फिक्र नहीं हाेती, जाे क़ौम ठाेकर खाने के बाद सबक़ हासिल नहीं करती, जाे क़ौम वक़्त और हालात के धारे में तिनकाें की तरह बहे जाती हाे और जो क़ाेम अपनी हिफाज़त की फिक्र ना करे उसके साथ ऐसा ही हाेता है...।
क्या मुसलमान भूल गए कि ख़ुदा ने भी आज तक उस क़ौम की हालत नहीं बदली, ना हो जिसे ख़्याल अपने आपको बदलने का...।
# नाेट:
सन् 1761, 1784-1799, 1857, 1858, 1872, 1919, 1922,1930 और 1946 में शहीद हुए मुसलमानों की शहादत पर हमें ना तो कोई शिकवा ना काेई गिला और ना ही ग़म है, बल्कि यह हमारे लिए फख्र की बात है कि हमनें लाखाें ही नहीं अन गिनत तादाद में अपने वतन के लिए जान दी, और ऐसी क़ुरबानी के लिए एक जान क्या हज़ार जान क़ुरबान... लेकिन अफ़सोस, गिला, शिकवा उस ज़ुल्म पर, उस नस्ल कशी पर, उस क़त्लेआम पर है जो मुसलमान आज़ादी के बाद से आज तक सहते आ रहे हैं...।
*समाजके लीये जिना मरना ही समाजसे वफादारी हे*
*समाजमे परिवर्तन लाना अोर समाज को मुत्तहीद करना अोर समाज को जागरुत करना अपने हक्क अोर अधीकार के लीये समाज की आवाज बुल्द करना हमारा मकस्द हे,*

••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
🌙 *भारतीय मुस्लिम आरक्षण मोर्चा* 🌙
*आयोजक*👉🏻 *हुजैफा पटेल*
*गुजरात भरुच वोटसअोप 9898335767*
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

Tuesday, 14 February 2017

भारतीय मुस्लिम आरक्षण मोर्चा पार्त+1

🌙 *भारतीय मुस्लिम अारक्षण मोर्चा* 🌙
⏩⏩⏩ *BMAB आरक्षण मुहीम*⏪⏪⏪
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

*अबतक के मेरे अनुभव के बाद अब हम भारत देशके आम मुस्लमानो मे कीस तरहा का काम करे जीस्से उम्मत मे बेदारी हो अोर उम्मत मुत्तहीद हो इसके लीये अब 🌙 *भारतीय मुस्लिम आरक्षण मोर्चा* 🌙 *के नाम से काम करेंगे,*

⚜⚜⚜⚜⚜ *जिसका मकस्द*⚜⚜⚜⚜⚜⚜

👉🏻 *मुस्लिम समाज को बेदार करना अपने हक्क अोर अधीकार के लीये अोर अपना वुजिद बाकी रखने के लीये तय्यार करना रहेगा*

👉🏻 *मुस्लिम समाजको अपसी जगरे भुलाकर समजदार अोर फिकरबंद,अोर जानकार लोगोको इस पेलेट फोर्म मे जुरने की कोसिस करना अोर उन्को मुत्तहीद करना*

👉🏻 *मुस्लिम समाज को मिलने वाले हक्क अोर अधिकार से कीस तरहा दुर कीया गया अोर कीस तरहा पलानके साथ दलीत से बत्तर बनाया गयाहे इस की मालुमात उनतक पोहचाना अोर अपने समाजके पर्ती अवाज बुंद करने का होसला पेदा करना हे*

👉🏻 *BMAM आरक्षण मुहीम मे जागरुत युवअो को सबसे पेहले वोटसअोप, अोर फेशबुक मे जोरेंगे अोर इसबात की चरचा करते हुये इसको गांव गांव सहर सहर ले जाकर इस मुहीम को आगे बरहाने की कोसीस लगातार करते रहेंगे* इन्साअल्लाह

💪🏻 *🌙 भारतीय मुस्लिम आरक्षण मोर्चा 🌙 इस मुहीम  मे हमे जानकार अोर समजदार ,जागरुत, अोर कायदे कानुन के जानकार अोर संवीधान  कानुन के अभीयासी लोगो की सखत जरुरत हे जो साथी ये चाहते हे के मुस्लिम समाजको आरक्षण मिले अोर मुस्लिम समाज मुत्तहुिद हो अोर मुस्लिम समाजकी छोतीबरी मदत करने का काम या ज्जबा रखते हे अेसे साथी इसके बारे मे ज‍गरुत्ता रखते हे वो इस मुहीम मे जलद से जलद जुर जाये अोर अपने मुस्लिम समाजको बेदार करने अोर समाजके लीये अवाज बुंद करने मे अपना रोल पै करे अोर फर्ज अदा करे*

*हमे जरुरत हे मुस्लिम वकिलकी, पोर्फेसरकी, इसकोलरकी,दीनी अोर कायदे कानुन के मालुमात रखने वाले अोर अभियास करने वाले जीम्मेदार लोगो की,*

⏩⏩⏩⏩⏩⏩⏩⏩⏩⏩⏩⏩⏩⏩⏩

👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇👇

*इस मुहीम को आगे बरहाने के लीये हमे आपके साथ अोर सहकार की बहोत जरुत हे इसके लीेये सब से पेहले
हम वोटसआोप मे इसको आगे बरहाने की कोसीस करेंगे जिस्मे आप अपना रोलपै करे समाज पर्ती अपना फर्ज अदाकरे*

👆🏼👆🏼👆🏼👆🏼👆🏼👆🏼👆🏼👆🏼👆🏼👆🏼👆🏼👆👆

*BMAM आरक्षण मुहीम* नाम से गुरुप बनाया हे *मुहीम* मे आप सामील हो सकते हे

जीसके लीये आप को नीचे दीये नंबर पर अपना नंबर अोर पता देना रहेगा ,

🗓14/02/17 मंगलवार  टा‍इम:-11:00am
*आयोजक*
*हुजैफा पटेल*
🌙 *भारतीय मुस्लिम आरक्षण मोर्चा* 🌙
*गुजरात भरुच*
वोटसअोप के लीेये संपर्क करे 👉*9898335767*

Wednesday, 14 December 2016

हज़रत अली के 40 अनमोल वचन


date 14/12/2016
Hazrat Ali Sayings in Hindi
हज़रत अली के 40 अनमोल वचन
—————————-
मुश्किलों की वजह से चिंता में मत डूबा करो! सिर्फ बहुत अंधियारी रातों में ही सितारे ज्यादा तेज़ चमकते हैं.
एक अच्छी रूह और दयालु ह्रदय को कोई चीज़ इतनी दुःख नहीं पहुंचाती जितना उन लोगों के साथ रहना जो उसे नहीं समझ सकते.
महान व्यक्ति का सबसे अच्छा काम होता है माफ़ कर देना और भुला देना.
ज़िन्दगी में दो तरह के दिन आतें हैं एक जिसमे आप जीतते हैं,और दूसरा वो दिन जो आपके खिलाफ जाता है. तो जब तुम्हारी जीत हो तो घमंड मत करो और जब चीज़ें तुम्हारे खिलाफ जाएँ तो सब्र करो. दोनों ही दिन तुम्हारे लिए परीक्षा हैं.
जब दुनिया आपको घुटनों के बल गिरा देती है तब आप प्रार्थना करने की सर्वोत्तम स्तिथी में होते हैं.
Hazrat Ali Sayings in Hindi
सब्र से जीत तय हो जाती है.
शिष्टाचार अच्छा व्यवहार करने में कुछ खर्च नहीं होता पर यह सबकुछ खरीद सकता है.
सम्मान पूर्वक साफगोई से मना कर देना एक बड़े और झूठे वादे से बेहतर होता है.
इन्सान भी कितना अजीब है की जब वह किसी चीज़ से डरता है तो वह उससे दूर भागता है लेकिन यदि वह अल्लाह से डरता है तो उसके और करीब हो जाता
चुगली करना उसका काम होता है जो अपने आप को बेहतर बनाने में असमर्थ होता है.
Hazrat Ali Sayings in Hindi
तुम्हारे दोस्त भी तीन हैं और दुश्मन भी तीन.
तुम्हारे दोस्त ….एक तुम्हारा दोस्त, तुम्हारे दोस्त का दोस्त और
तुम्हारे दुश्मन का दुश्मन तुम्हारे दुश्मन ….. तुम्हारा दुश्मन, तुम्हारे दोस्त का दुश्मन और तुम्हारे दुश्मन का दोस्त
आँखों के आंसू दिल की सख्ती की वजह से सूख जातें हैं और दिल बार बार गुनाह करने की वजह से सख्त हो जाता है.
तुम्हारा एक रब है फिर भी तुम उसे याद नहीं करते लेकिन उस के कितने बन्दे हैं फिर भी वह तुम्हे नहीं भूलता.
सूरत बगेर सीरत के एसा फूल है जिसमे कांटे ज्यादा हो और खुशबू बिलकुल न हो.
Hazrat Ali Sayings in Hindi
अगर किसी का तरफ आज़माना हो तो उसको ज्यादा इज्जत दो वह आला तरफ हुआ तो आपको और ज्यादा इज्ज़त देगा और कम तरफ हुआ तो खुद को आला समझेगा
कभी भी किसी के पतन को देखकर खुश मत हो क्यों की तुम्हे पता नहीं है भविष्य में तुम्हारे साथ क्या होने वाला है.
खालिक से मांगना शुजाअत है अगर दे तो रहमत और न दे तो हिकमत. मखलूक से मांगना जिल्लत है अगर दे तो एहसान और ना दे तो शर्मिंदगी.
अपनी सोच को पानी के कतरों से भी ज्यादा साफ रखो क्यों की जिस तरह कतरों से दरिया बनता है उसी तरह सोच से इमान बनता है.
आज का इन्सान सिर्फ दोलत को खुशनसीबी समझता है और ये ही उसकी बदनसीबी है.
बात तमीज़ से और एतराज़ दलील से करो क्यों की जबान तो हेवानो में भी होती है मगर वह इल्म और सलीके से महरूम होते हैं .
Hazrat Ali Sayings in Hindi
जो दुनिया में विश्वास रखता है, दुनिया उसे धोखा देती है.
ज्यादा बोलने से बचो क्योंकि इससे गलत बात बोलने और लोगो के आप से बोर हो जाने का डर रहता है.
एक समझदार व्यक्ति के पास हमेशा कुछ कहने को होता है जबकि मूर्ख को कुछ कहने की ज़रुरत होती है.
निश्चित रूप से ख़ामोशी कभी कभी भावपूर्ण जवाब हो सकती है.
प्यास न हो तो पानी की कोई कीमत नहीं होती है, मोंत नहीं होती तो ज़िन्दगी की कोई कीमत नहीं होती और विश्वास ना हो तो दोस्ती की कोई कीमत नहीं होती.
सोने और चंडी की हिफाज़त करने के बजाए अपनी जबान की हिफाज़त करो.
शरीर की पुष्टि भोजन है जबकि आत्मा की पुष्टि दूसरों को भोजन करानें में है.
Hazrat Ali Sayings in Hindi
उस व्यक्ति को कभी सुकून नहीं मिलता जो इर्ष्या करता है और उसे कोई व्यक्ति प्रेम नहीं करता जिसका ख़राब व्यवहार होता है.
तुम विनम्र रहो क्यों की यह सबसे बड़ी प्रार्थना है.
भीख मांगने से बदतर कोई और चीज़ नहीं होती है.
तुम्हे हुक्म दिया गया है की तुम अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और तुम्हे इसलिए बनाया गया है ताकि तुम अच्छे कर्म करो.
ईमानदारी तुम्हे अच्छाई की तरफ ले जाती है और अच्छाई तुम्हे स्वर्ग (जन्नत) की दावत देती है.
लफ्ज़ आपके गुलाम होतें हैं मगर सिर्फ बोलने से पहले तक, बोलने के बाद इन्सान अपने अल्फाज़ का गुलाम बन जाता है, अपनी ज़बान की हिफाज़त इस तरह करो, जिस तरह तुम अपने माल की करते हो. एक शब्द अपमान कर सकता है और आपके सुख को समाप्त कर सकता है.
Hazrat Ali Sayings in Hindi
तुम सिर्फ अपने खुदा से उम्मीद रखो और किसी से मत डरो सिवाय अपने गुनाहों के.
जब तुम बीमार हो जाओ तो इससे घबराओ मत, और जितना अधिक हो सके उतना आशावान (Hopeful) बने रहो.
अगर इन्सान को तकब्बुर (घमंड) के बारे में अल्लाह की नाराज़गी का इल्म हो जाए तो बंदा सिर्फ फकीरों और गरीबों से मिले और मिट्टी पर बैठा करे.
सूरत और सीरत (चरित्र) में सबसे बड़ा फर्क ये हे की सूरत धोका देती है जबकि सीरत पहचान करवाती है.
जब तुम्हे खुशिया मिलने लगे तो तीन चीज़ों को ना भूलो
1 आल्लह हो 2 उसकी मखलूक से 3 अपनी असलियत को .
*******************************************

Sunday, 27 November 2016

यहुदी का पोर्पगंदा मुसलीम के वीरोध

Date 27/11/2016
बहुत पहले यहूदियों ने पूरी दुनिया के मुसलमानो का सर्वे किया के किस किस तरह के मुस्लिम हैं और उन्हें किस तरह बर्बाद करना है,,
सर्वे के बाद उन्होंने 250 पेज की रिपोर्ट बनाई जिसमे उन्होंने मुसलमानो को 4 कैटगरी में रखा,,
1-"Fundamentalist" ( कट्टरपंथी )
परिभाषा:- ये वो लोग होते हैं जो इस्लाम और क़ुरआन हदीस को हर क़दम पर रहनुमा मानते हैं।सिर्फ इस्लाम ही का सामाजिक(Social) , आर्थिक(economical)
राजनीतिक(Political)व्यवस्था दुनिया में नाफ़िज़ करना चाहते हैं। ये लोग सोचने समझने वाले होते हैं,,ये लोग हमारे (यहूदियों के) सबसे बड़े दुश्मन हैं,,
( इनका इलाज ):- इनपर जितना होसके दबाव डाला जाए, बदनाम किया जाये, इलज़ाम लगाया जाये, ताकि ये लोग अपना मक़सद भूल जाएं,,
2-"Traditionalists" ( परंपरावादी )
परिभाषा:- ये लोग रिवायती होते हैं,,,सोचने समझने का काम नहीं करते, दुनिया में क्या हो रहा है इन्हें उससे कोई मतलब नहीं,, बस जो बाप दादा करते हुए आये हैं वो ही करते हैं,,
इनकी तादाद बहुत ज़्यादा है,, इन्हें अल्लाह का कानून नाफ़िज़ नहीं करना ये लोग बस इबादत में मगन रहते हैं,,इसलिए हमें ( यहूदियो को) इनसे कोई ख़तरा नहीं।
( इनका इलाज ):- ये जिस चीज़ में मगन हैं इन्हें उसी चीज़ में आपस में लड़वा दो फिरके के नाम पर, इनकी ताक़त ख़त्म होजाएगी।
3:- "Modernists"( आधुनिकतावादि )
परिभाषा:- ये वो लोग हैं जो अपनी दुनिया बनाने में लगे रहते हैं,,इन लोगो को अपने career, future, study , buisness के अलावा किसी से मतलब नहीं। सिर्फ एक रिवायत के तौर पर इस्लाम को जानते मानते हैं,,ये लोग हमारे काम के हैं,,
( इनका इलाज ):- इनके लिए career, buisness इतना मुश्किल कर दिया जाये की ये लोग उसी में उलझ कर रह जाएं।
और students को इस तरह पढ़ाया जाये की उसे उसका मज़हब एक पुराने लोगो की चीज़ नज़र आये और हमारी (यहूदियों की) मॉडर्न शिक्षा उसे अच्छी लगने लगे,,,
4:- "Secularism"( धर्मनिरपेक्षतावादि )
परिभाषा:- ये लोग बिलकुल हमारे ( यहूदियो) जैसे होते हैं,,ये इस्लाम की विपरीत (opposite) ही बोलते हैं,,इन्हें अपने धर्म से कोई मुहब्बत कोई लगाव नहीं होता,,ये लोग हमारे बहुत काम के हैं,,
( इनका इलाज ):- इन्हें कैसे भी करके अपने साथ लेकर चलना है चाहे वो उन्हें उसका तरीका लालच हो या दबाव,इनके साथ रहने से बाकी धर्म के लोग इस्लाम के खिलाफ होने शुरू हो जाएंगे।
Note:- कैटेगरी नम्बर . 1 को किसी भी कैटेगरी से मिलने न दिया जाये वरना पूरी यहूदी क़ौम को ख़तरा होगा,,और लोगो को इस्लाम की अच्छाइयां नज़र आने लगेगी और हमारी दुनिया पे हुकूमत करने वाली चाल नाकाम होजाएगी॥
मुझे यक़ीन है कि आप अपनी कैटेगरी पहचान गए होंगे,,
और मुझे ये भी यकीन है कि आप इस साज़िश को नाकाम करने में हमारा साथ देंगे॥

Aamir Khan Lucknow

7/11 मुंबई विस्फोट: यदि सभी 12 निर्दोष थे, तो दोषी कौन ❓

सैयद नदीम द्वारा . 11 जुलाई, 2006 को, सिर्फ़ 11 भयावह मिनटों में, मुंबई तहस-नहस हो गई। शाम 6:24 से 6:36 बजे के बीच लोकल ट्रेनों ...