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Sunday, 9 September 2018

377 कलम भारतीय परम्परा के विरोध मे जा रही हे सरकार

#डेंज़रस_सोसाइटी
अगर मैं अप्राकृतिक यौन संबंधों का विरोध करूँ तो कथित प्रगतिशील तबका बिना एक मिनट की देरी किए मुझे कट्टरपंथी मुस्लिम, दकियानूसी अनपढ़ जाहिल घोषित कर देगा । परंतु सच्चाई ये है कि अननेचुरल सेक्स या गे अथवा लेस्बियन कल्चर के लिए रंग विरंगे झंडे लेकर प्रोटेस्ट करने वाले कथित प्रगतिशील इतने पिछड़े इतने अनाड़ी हैं कि यदि इनसे इस विषय पर बात करो तो इनके पास सिवाय वेस्टर्न कल्चर की मिसाल देने के अलावा कोई जानकारी कोई जगरुकता कोई आंकड़ा नहीं मिलता । बहरहाल इन प्रगतिशीलों को छोड़िए आइये हम आप इस विषय पर अपने सीमित ज्ञान के मद्देनज़र कुछ प्रकाश डालते हैं और इस केस की पेंचीदगियां समझते हैं ।

सबसे पहले तो ये जान लीजिए कि अप्राकृतिक सेक्स कहते किसे हैं ? मैथुन के कई प्रकार होते हैं
1- हस्थ मैथुन - धार्मिक और नैतिक लिहाज से देखा जाये तो हस्त मैथुन भी अपराध के दायरे में आता है परंतु संवैधानिक रूप से यह अपराध नहीं है । दूसरी बात मैथुन का यह तरीका सबसे सेफ और सिक्योर है, इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि हस्थ मैथुन में आपको किसी पार्टनर की ज़रूरत बिलकुल नहीं होती, हस्थ मैथुन करने हेतु आपको सिर्फ अच्छी इमैजिनेशन पॉवर की ज़रूरत होती है फिर आप अपनी कल्पनाओं में दुनियां की बड़ी से बड़ी हस्ती के साथ मैथुन का मज़ा ले सकते हैं पर याद रहे मैथुन के बाद किसी भी तरह की ग्लानि से बचें ।

अविवाहित, तलाकशुदा, विधवा अथवा विधुर लोगों के लिए मैथुन का यह तरीका बहुत ही कारगर है । इसकी बुराई यह है कि हस्त मैथुन करने के आदी लोग अधिकतर एकाकी हो जाते हैं और जैसे जैसे एकाकी होते हैं मैथुन की अति कर देते हैं, अति मैथुन के कारण उनमें कुछ कमज़ोरी आ जाती है जिसका फायदा नीम हकीम बचपन की गलतियां बताकर नपुंषकता का डर दिखा कर खूब उठाते हैं ।

2- दूसरा है मुख मैथुन - मुख मैथुन कानूनी या सामाजिक अथवा नैतिक आधार पर अपराध हो या न हो पर यह बहुत ही घातक है इससे कई तरह के जख्म कई तरह के इनफेक्शन कई तरह की बीमारियाँ जिनमें कैंसर भी शामिल है आपको लग सकती हैं इसलिए इससे बचें तो बेहतर है । हालांकि सामाजिक दृष्टिकोण से घिनावना होने को बावजूद आज पोर्न मूवी और पोर्न साहित्य के दौर में मुख मैथुन आम हो चला है ।

3- तीसरा है नैचुरल योनिक क्रिया जिससे यह सृष्टी चलती है यह प्राकृतिक क्रिया पशु, कीट, मत्स्य सभी करते हैं । यह क्रिया धर्मानुसार, नैतिकतानुसार, एवं दुनियाँ भर के देशों में उनके संविधान के अनुसार बिलकुल भी ग़लत या पाप नहीं है बल्कि पुण्य है ।

4- गुदा मैथुन - गुदा मैथुन हमारे धर्म शाष्त्रों, हमारी सामाजिक मान्यताओं और हमारे देश के संविधान में धारा 377 के तहत कानूनन अपराध । आमतौर पर इसी गुदा मैथुन को अन नेचुरल सेक्स कहा जाता है । परंतु दो महिलाओं द्वारा एक दूसरे को संतुष्ट करने की क्रिया भी अन नेचुरल सेक्स के दायरे में आती है या नहीं आती या किस तरह आती है मुझे नहीं मालूम, जिसे मालूम हो वह कमेंट में जानकारी साझा करे ।

गुदा मैथुन हमारे देश में या दुनियाँ भर में आज से नहीं सदियों से है. यदि इस्लामिक दस्तावेजों की मानें तो कौमे लूत का खात्मा गुदा मैथुन की अधिकता के कारण ही हुआ था । यदि आप अपने आस पास नज़र दौड़ायेंगे तो दो चार पुरुष ऐसे मिल जायेंगे जो गुदा मैथुन करवाने के आदी होते हैं । गुदा मैथुन करवाने के आदी यह लोग सबसे आसान शिकार किशोर उम्र बच्चों को बनाते हैं क्यूँ कि किशोरावस्था में कामोत्तेजना अधिक होती है किसी हल्के से स्पर्ष भर से लिंग में तनाव आ जाता है । चूंकि गुदा मैथुन करवाने के आदी लोगों में भी पुरुषत्व होता है लिहाजा किशोरों और बालकों को बहला फुसला कर उनकी कामोत्तेजना बढ़ाकर या ब्लैकमेल करके यह लोग उसको भी गुदा मैथुन करवाने का आदी बना देते हैं और इस तरह एक गुदा मैथुन करवाने वालों की एक नई पीढ़ी तय्यार होती है ।

गुदा मैथुन करवाने वाले लोग वेश्याओं से भी अधिक निर्लज्ज होते हैं यह लोग कहीं भी बस में ट्रेन में बाज़ार में माता के जागरण तक में अपने शिकार की तलाश में लगे रहते हैं, इनकी नज़रें अति कामुक पुरुषों को तुरंत पहचान लेती हैं और ये उसी जगह पर बिना भीड़ की परवाह किए छेड़छाड़ करके उत्तेजित करना शुरू कर देते हैं और फिर किसी एकांत की तरफ निकल जाते हैं ।

आज के दौर में यदि अनसेफ सेक्स का कोई सर्वे किया जाये तो गुदा मैथुन उसमें पहला स्थान पायेगा, मेरा दावा है एड्स जैसा गंभीर रोग वेश्याओं से, ट्रक ड्राइवरों से उतना नहीं फैलता जितना इन गुदा मैथुन करने और करवाने वालों से फैलता है । यह दावे मैं हवा हवाई नहीं कर रहा हूँ चूँकि मैं देश के कोने कोने में घूमा हूँ आखों से देखा है गहन विचार किया है तब कह रहा हूँ ।

मिसाल के तौर पर मुंबई में वेस्टर्न लाइन पर मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन विश्व भर में प्रशिद्ध है सबसे ज़्यादी भीड़ भाड़ वाले स्टेशनों में से एक है यहाँ से प्रतिदिन सैकड़ों लोकल और मेल ट्रेनें गुजरती हैं लाखों लोग रोज़ विजिट करते हैं पर इसी स्टेशन के मुख्य द्वार से लगा मेन रोड पर एक शौचालय है उस शौचालय में जो मुत्रालय है उसकी व्यस्तता का अंदाज़ा आप इसी से लगाइए कि हर मिनट एक व्यक्ति भीतर जाता है एक आता है । परंतु इतनी भीड़ के बावजूद वहाँ पर गुदा मैथुन के आदी लोग मौका मिलते ही अपना काम कर जाते हैं । यदि आप पेशाब करने गए और आप पेशाब करने के उपरांत एक मिनट भी रुक गए तो वहाँ पहले से खड़े लोग आपको अपने जैसा समझ कर गुदा मैथुन मुख मैथुन करना शुरू कर देंगे उसी में से कोई आपका लिंग भी पकड़ लेगा या आपके सामने अपना लिंग लहराना शुरू कर देगा ।

ये तो उदाहरण मात्र है वरना मुंबई के हर शौचालय में बने मुत्रालय का यही हाल है इसी कारण से रात के नौ दस बजते ही प्रत्येक मुत्रालय में ताला लग जाता है फिर स्वच्छ भारत अभियान गया तेल लेने यदि आपको आई है तो कहीं कोने में हल्का हो लीजिए ।
इसके अलावा वेश्यावृति मे लगे बहुत से किन्नर भी अपने ग्राहकों को गुदा मैथुन या मुख मैथुन से ही संतुष्ट करते हैं पर ध्यान रहे कि यह लोग भी सुरक्षा का ध्यान न के बराबर रखते हैं बल्कि यह लोग गे पुरुषों से अधिक घातक होते हैं इनसे पुलिस भी डरती है ।

भाई साहब ये हाल तब है जब गुदा मैथुन धारा 377 के तहत अपराध है । अब आप सोचिये यदि गुदा मैथुन को अपराध की श्रेणी से निकाल दिया गया तब क्या होगा ? क्यूँ कि महिला भले कितनी पतित क्यूँ न हो वेश्या क्यूँ न हो परंतु उसमें कहीं न कहीं थोड़ी सी लज्जा होती है परंतु पुरुषों में यह रंच मात्र भी नहीं होती । इसी लिए मुझे लगता है यदि गुदा मैथुन को लीगलाइज़ किया गया तो गुदा मैथुन के दृष्य चौराहों और सड़कों पर भी दिखाई देने लगेंगे ।

बकिया गुदा मैथुन भले ही अपराध है मगर बहुत से कपल आपसी सहमति से गुदा मैथुन इंजॉय करते हैं । इसी तरह यदि दो पुरुष भी आपसी सहमति से बंद कमरे में गुदा मैथुन या मुख मैथुन करते हैं तो उन्हें देखने या रोकने वाला कौन है फिर उन्हें किसी कानून और प्रमाण की आवश्यकता क्यूँ है ये बात मेरी समझ के बाहर है । क्यूँ कि हमारा संविधान किसी महिला को किसी महिला के साथ या किसी पुरुष को किसी पुरुष के साथ रूम शेयर करने से नहीं रोकता, बड़ी संख्या में बैचलर महिलायें और पुरुष समान लिंगी मित्रों के साथ एक ही रूम में रहते हैं समाज भी उनपर कोई शक़ नहीं करता फिर ऐसो लोगों को अलग पहचान क्यूँ चाहिए पता नहीं ।
रही बात सम लैंगिकता की तो मैं ऐसी महिलाओं को भी जानता हूँ जो रूम मेट हैं, आपस में बहन हैं, मां बेटी हैं और वे एक दूसरे को संतुष्ट कर लेती हैं परंतु मुंबई के मुत्रालय जैसी अराजकता नहीं फैलाती वे 377 का विरोध नहीं करती क्यूँ कि वे सेक्स के प्रति उदार हैं और अब्नॉर्मल नहीं हैं ।

अब जो लोग समलैंगिक संबंधों की वकालत कर रहे हैं मैं उनसे पूछना चाहता हूँ क्या उन्होंने कभी इस पहलू पर भी गौर किया है ? यदि नहीं किया तो अब करें । और समलैंगिंग रिश्तों को यदि मान्यता मिल जाये तो ध्यान रखें मुंबई के मुत्रालय जैसा हाल पूरे देश का न हो जाये । समलैंगिंक संबंधों की मान्यता उन्हीं दो लोगों को ही मिले जो कानूनी रूप से रजिस्टर्ड हों ताकि वे रोज़ नए नए शिकार न कर सकें, देश एक बड़ी आबादी के साथ छेड़ छाड़ न कर सकें और किसी मुत्रालय में यदि कोई अन्य व्यक्ति जाये तो उसे असहजता न हो ।

Saturday, 8 September 2018

इमाम को मारने की घटना

गुजरात में शाकिल अभिषेक के उदय पर

शकील बन हनीफ का प्रलोभन विद्वानों और अरबाब फ़िक्रो नज़र के लिए मोहताज परिचय नहीं है पिछले कुछ वर्षों से देश के अन्य राज्यों की तरह उसने गुजरात में भी अच्छे खासे पैर पसार शुरू कर दिए हैं

ताजा घटना सूरत जिले के लिम्फोसाइट गांव है जहां इन लोगों ने उनकी राह में आने वाले और उनका मुकाबला करने वाले एक मौलवी के साथ सख्त पिटाई का मामला किया।

किस्सा संक्षेप है कि लिम्फोसाइट गांव में पिछले कुछ महीनों से यह मित्रों अपने विशिष्ट शैली भूमिगत मेहनत कर रहे थे इसी मेहनत के दौरान इमाम पी के एक बंगाली शिष्य उनके हत्थे चढ़ गया उन ने मिलकर विभिन्न प्रश्नों इस बंगाली मजदूर का मन खराब करना शुरू किया और वह इमाम पी जवाब लेकर अपना मन साफ ​​करता रहा मामला अत्यधिक बढ़ जाने पर अस्र की नमाज़ के बाद गांव के लोगों ने इमाम पी के साथ गांव के सक्रिय शकील की फहतिश और यह पिछले वारंटी ने यह भी कहा कि यदि इस तरह के कार्य हमारे दिल में पाए जाते हैं, तो नतीजा परिणाम होगा

इस धमकी फहतिश फलस्वरूप वह आदमी तो चला गया लेकिन इशा की नमाज़ के समय कामरेज चार रास्ते पाँच छह शकील उसके समर्थन में गांव आकर इमाम पी के साथ उलझने लगे लोग इकट्ठे हुए बात बढ़ने लगी टूटू में बढ़कर नौबत हाथापाई हालांकि, कुछ मामलों में, उन्हें मामले में स्थानांतरित कर दिया गया था

देर रात गए लगभग ग्यारह बारह बजे यह पांच छह सज्जनों लौटे और चौराहे पर बैठे चार पाँच नौजवानों को हथियार बताकर यह कह गए कि हिम्मत हो तो हमारे पीछे आओ हम दिखाते हैं

इन युवकों ने न आओ देखा न ताओ सवारी उठाकर उनके पीछे लपके उधर अल साद को खबर पहुंची वे युवाओं को रोकने के लिए दौड़े कि अब हम अंतिम बात कर ली है अब उनसे उलझन नहीं है भविष्य अगर उन्होंने कुछ हरकत तो नहीं छोड़ेगा

लेकिन इतने में यह युवा इन शकीलयों का पीछा करते हुए गांव के बाहर पहुंच गए पीछे अल साद भी पहुंचे वहां जाकर पता चला कि नियमित योजना के तहत पच्चीस तीस शकीलयों समर्थक वहाँ इकट्ठा उन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी इतना बड़ा भीड़ देखकर युवा भाग उठे ताकि गांव से दूसरे लोगों को बलालाए अल साद जो फहतिश को पहुंचे थे उनके प्रलोभन परवरों हाथ लग गए तो उन्होंने बड़ी बेरहमी से डंडे सलाखों और लोहे और चमड़े की पाइप से इमाम पी मारना शुरू पच्चीस आदमियों इमाम सॉ की उपस्थिति में, अपराधियों ने इमाम इमाम को बड़े पैमाने पर मारा विल इमाम पी: आशय यह था कि आज काम ही सभी दे भगवान के लिए सहमत एक पुलिसकर्मी गश्त करते हुए वहां आ पहुंचा जिसे देखकर यह लोग भाग गए पुलिसकर्मी ने गांव वालों को फोन किया भागे हुए युवक भी भीड़ ाठालाए लेकिन तब तक देर हो चुकी थी इमाम पी हाथ की दवहडयाँ निकचर गईं और पसली की हड्डी भी दरार गई इसके अलावा हड्डियों और शरीर के विभिन्न भागों पर जो पाइप मारे गए वे अलग हैं

तुरंत इमाम पी अस्पताल ले गए देर रात होने के कारण डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो सके सुबह साथ बजे ऑपरेशन हुआ और अब अल साद बहमदललह सर्वशक्तिमान सुप्रभात हैं

इमाम पी नाम मौलवी लुकमान खानपवरी तम खोलोड़िय है गुजरात की प्रमुख शैक्षणिक संस्था जामिया डाभेल महोदय और लिम्फोसाइट गांव सक्षम और लोकप्रिय इमाम हैं पिछले कुछ महीनों से वह शकीलयों के खिलाफ सक्रिय थे जामिया के शिबहय सुरक्षा युवा शिक्षक मुफ्ती शोएब बम्बवी पी ज़ैद फ़ैज़ी इस संबंध में भी संपर्क थे

दूसरे दिन घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद हिंदू सूरत के जमीयत उलमा प्रतिनिधिमंडल; राष्ट्रपति आदरणीय सदस्य वीरता जामिया डाभेल मौलाना अरशद मीर स मदठलह नेतृत्व में वकीलों की टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे गांव के लोगों से हाल अहवाल लिए मिल बैठकर सलाह हुआ और भविष्य के लिए रणनीति तय पाया अस्पताल पहुंचकर इमाम पी की अयादत इसके अलावा
कठोर से पाठक जुबैर पी भी पहुँचे वहाँ भी सलाह हुआ जामिया से विभाग सुरक्षा मउकर ज़िम्मेदार शिक्षक प्रिय मुफ़्ती महमूदुल पी बार्डोलिय मदठलह ने सारी जानकारी मांगे ताकि प्रकाश आगे की कार्रवाई की जा सके

एफआईआर दर्ज हो चुकी है अपराधियों की तलाश जारी है सारे अपराधी फरार बताए जा रहे हैं देर सवेर कार्रवाई जरूर होगी शा अल्लाह!

अंत में हम एक सवाल मुसलमानाने गुजरात विवेक पर छोड़ जा रहे हैं कि जूकाम हमें बहुत पहले करना था वह काम भूमिगत दीमक की तरह फैलने वाले कायर शकील खुल्लम खुल्ला नहीं हो गया?

वैसे भी इस क्षेत्र में काम करने वालों का अनुभव है कि यहाँ कभी-कभी भाषाई हारून से अधिक िसाए मूसा प्रभावी होता है और चिंता सिद्दीकी कई गुणा खिताबी अपना काम दिखाती है

گجرات میں شکیلی فتنہ عروج پر

شکیل بن حنیف کا فتنہ اہل علم اور ارباب فکر و نظر کے لیے محتاج تعارف نہیں ہے پچھلے چند سالوں سے ملک کے دیگر صوبوں کی طرح اس نے گجرات میں بھی اچھے خاصے پاؤں پسارنے شروع کردیے ہیں

تازہ حادثہ سورت ضلع کے لسکانا گاؤں کا ہے جہاں ان لوگوں نے ان کی راہ میں آنے والے اور ان کا مقابلہ کرنے والے ایک عالم کے ساتھ سخت زدوکوب کا معاملہ کیا.

قصہ مختصر یہ ہے کہ لسکانا گاؤں میں پچھلے چند مہینوں سے یہ احباب اپنے مخصوص طرز پر زیر زمین محنت کررہے تھے اسی محنت کے دوران امام ص کا ایک بنگالی شاگرد ان کے ہتھے چڑھ گیا ان لوگوں نے مل کر مختلف سوالات سے اس بنگالی مزدور کا ذہن خراب کرنا شروع کیا اور وہ امام ص سے جواب لے کر اپنا ذہن صاف کرتا رہا معاملہ حد سے زیادہ بڑھ جانے پر عصر کی نماز کے بعد گاؤں کے لوگوں نے امام ص کے ساتھ مل کر گاؤں کے فعال  شکیلی کی فہمائش کی اور اسے آخری وارننگ بھی دے دی کہ اگر اس کے بعد تو ہمارے دیار میں اس قسم کی حرکتیں کرتا پایا گیا تو نتیجے کا  ذمے دار تو ہوگا

اس دھمکی آمیز فہمائش کے نتیجے میں وہ آدمی تو چلاگیا مگر عشا کی نماز کے وقت کامریج چار راستے سے پانچ چھ شکیلی اس کی حمایت میں گاؤں آکر امام ص کے ساتھ الجھنے لگے لوگ جمع ہوگئے بات بڑھنے لگی توتو میں میں سے بڑھ کر نوبت ہاتھا پائی تک پہنچ گئی بہر حال کسی طرح ان کو بھگا کر  معاملہ رفع دفع کیا گیا

دیر رات گئے قریبا گیارہ بارہ بجے یہ پانچ چھ حضرات واپس آئے اور چوراہے پر بیٹھے چار پانچ نوجوانوں کو ہتھیار بتاکر یہ کہہ گئے کہ ہمت ہوتو ہمارے پیچھے آؤ ہم دکھاتے ہیں

ان نوجوانوں نے نہ آؤ دیکھا نہ تاؤ سواری اٹھاکر ان کے پیچھے لپکے ادھر امام ص کو خبر پہنچی وہ ان نوجوانوں کو روکنے کے لیے دوڑے کہ اب ہم نے فائنل بات کرلی ہے ابھی ان سے الجھنا نہیں ہے آئندہ اگر انہوں نے کچھ حرکت کی تو چھوڑیں گے نہیں

مگر اتنے میں یہ نوجوان ان شکیلیوں کا تعاقب کرتے ہوئے گاؤں کے باہر پہنچ گئے پیچھے پیچھے امام ص بھی پہنچے وہاں جاکر معلوم ہوا کہ باقاعدہ پلاننگ کے تحت پچیس تیس شکیلیوں کے حمایتی وہاں جمع ہیں انہوں نے پتھر بازی شروع کردی اتنا بڑا مجمع دیکھ کر نوجوان بھاگ اٹھے تاکہ گاؤں سے دوسرے لوگوں کو بلالائے اور امام ص جو فہمائش کے لیے پہنچے تھے ان فتنہ پروروں کے ہاتھ لگ گئے چنانچہ انہوں نے بڑی بے رحمی سے ڈنڈوں سلاخوں اور لوہے اور چمڑے کی پائپوں سے امام ص کو مارنا شروع کیا پچیس آدمیوں کے سامنے امام ص کی کہاں تک چل پاتی ان ظالموں نے امام ص کو بڑے جابرانہ انداز میں مارا بقول امام ص: ارادے یہ تھے کہ آج کام ہی تمام کردے خدا کا کرنا کہ اتفاقا ایک پولیس والا گشت کرتے ہوئے وہاں آ پہنچا جسے دیکھ کر یہ لوگ بھاگ گئے پولیس والے نے گاؤں والوں کو فون کیا بھاگے ہوئے نوجوان بھی مجمع اٹھالائے مگر تب تک دیر ہوچکی تھی امام ص کی ہاتھ کی دوہڈیاں فیکچر ہوگئیں اور پسلی کی ہڈی بھی کریک ہوگئی اس کے علاوہ ہڈیوں اور جسم کے مختلف حصوں پر جو پائپ مارے گئے وہ الگ ہیں

فورا امام ص کو ہسپتال لے گئے رات دیر ہوجانے کے باعث ڈاکٹر دستیاب نہ ہوسکے صبح ساتھ بجے آپریشن ہوا اور اب امام ص بحمدللہ تعالی بخیر ہیں

امام ص کا نام مولوی لقمان خانپوری ثم کھولوڑی ہے گجرات کی معروف درسگاہ جامعہ ڈابھیل کے فاضل اور لسکانا گاؤں کے فعال و مقبول امام ہیں پچھلے چند مہینوں سے وہ شکیلیوں کے خلاف سرگرم تھے جامعہ کے شعبہء تحفظ کے نوجوان استاد مفتی شعیب بمبوی ص زید فیضی  سے اس سلسلے میں رابطے میں بھی تھے

دوسرے دن صبح واقعے کی اطلاع ملتے ہی جمعیت علما ہند سورت کا وفد;  صدر محترم رکن شوری جامعہ ڈابھیل مولانا ارشد میر ص مدظلہ  کی قیادت میں وکلا کی ٹیم کے ساتھ جائے وقوعہ پر پہنچا گاؤں کے لوگوں سے حال احوال لیے مل بیٹھ کر مشورہ ہوا اور آئندہ کے لیے لائحہ عمل طے پایا ہسپتال پہنچ کر امام ص کی عیادت بھی کی
کٹھور  سے قاری زبیر ص بھی پہنچے وہاں بھی مشورہ ہوا جامعہ سے شعبہ تحفظ کے مؤقر ذمے دار استاد محترم مفتی محمود ص بارڈولی مدظلہ نے ساری تفصیلات طلب کیں تاکہ اس کی روشنی میں آگے کی کارروائی کی جاسکے

ایف آئی آر درج ہوچکی ہے مجرموں کی تلاش جاری ہے سارے مجرم مفرور بتائے جارہے ہیں دیر سویر کارروائی ضرور ہوگی ان شاء اللہ!

اخیر میں ہم ایک سوال مسلمانان گجرات کے ضمیر پر چھوڑے جارہے ہیں کہ جوکام ہمیں بہت پہلے کرنا تھا کیا وہ کام زیر زمین دیمک کی طرح پھیلنے والے بزدل شکیلی کھلم کھلا نہیں کرگئے?

ویسے بھی اس فیلڈ میں کام کرنے والوں کا تجربہ ہے کہ یہاں بسا اوقات لسانِ ہارون سے زیادہ عصائے موسی مؤثر ہوتا ہے اور فکرِ صدیقی سے زیادہ ضربِ خطابی اپنا کام دکھاتی ہے

Friday, 7 September 2018

સમલૈંગિકતા ની કલમ 377 રદ્દ .

date:-07/09/2018

સમલૈંગિકતા ની કલમ 377 રદ્દ ...! સમલૈંગિકતા હવે ગુન્હો નથી.
-ડૉ પાર્થિવ પટેલ
પરંતુ અજ્ઞાની અને કુમળા માનસ ના બાળકો ખાસ સમજી લે..!
સમલૈંગિકતા ભલે ગુન્હો નથી પણ મનોરોગ ચોક્કસ છે...! સૃષ્ટિ ના નિયમ થી વિરુધ છે...!
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કાયદાએ સમલૈંગિકતા ને ગુન્હા ના લિસ્ટ માંથી કાઢી છે પણ વિજ્ઞાને તેને માનાસિક રોગના અને વિકૃતિઓ ના લિસ્ટ માંથી નથી કાઢી.
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સમલૈંગિકતા સજાપાત્ર નથી તેનો મતલબ સમાજ મા તેની હાજરી પર ગર્વ લેવા જેવો પણ નથી. .!
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માણસ ના જીવન માં આનંદ અને સુખ ના સ્ત્રોત ખાલી થઈ જાય ત્યારે અનેક વિકૃતિઓ નો જન્મ થાય છે. સમલૈંગિકતા તેમાંની એક છે.
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માણસ ના બાળપણ માં ઉછેર દરમિયાન તેની સાથે થયેલા અનુભવો અને સંસ્કારો તેની પુખ્ત વયની માનસિકતા પર અસર કરે છે.
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આવા લોકો સમલૈંગિકતા નામની માનસિક વિકૃતિ (રોગ) નો ભોગ બને છે. તેને ગુન્હો ગણી સજા ન થાય તો કંઈ નહીં પણ તેને પ્રોત્સાહન ભૂલ થી પણ ન મળવું જોઈએ.
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સમલૈંગિક લોકો ને માનસિક સારવાર, સાહનુભૂતી ની ચોક્કસ જરૂર છે પણ પ્રોત્સાહન ની બિલકુલ નહીં..!
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સૃષ્ટિના સર્જકે સજીવ ના સજીવ તરીકે ના ગુણધરમો આપ્યાં છે.
જેમ સજીવ શ્વાસન કરે, ખોરાક લે, ઉત્સર્જન કરે તે જ રીતે પ્રજનન કરે છે...! પ્રજનન માટે ની શારીરિક સામગ્રી શરીર મા કુદરતે ફિટ કરીને મોકલી હોય છે. પરંતુ તેનો ઉપયોગ અન્ય રીતે કરે તો તે સૃષ્ટિ વિરુદ્ધ કહેવાય..!
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પશ્ચિમના ભદ્ર સમાજ મા જ્યારે આર્થિક રીતે અતિશય સમૃદ્ધી આવી ત્યારે વિચાર મુક્તિ, મૂકત સેક્સ ની સાથે આ દૂષણ ચાલ્યું. અન્ય કરતા અલગ થવા વિકૃતિઓ ની ઘેલછા થવા લાગી. ખોરાક, કપડાં, રહેઠાણ, રીત રિવાજ, કપડાં પહેરવેશ વગેરે માં વિકૃતિ ને ફેશન માં ખપાવી દીધી.
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રાજકારણ માં તેમની મત બેંક ઉભી થઈ. જેને રોકડે કરવા સામાજિક સંસ્થાઓ, ફિલ્મી દુનિયા ના લોકો એ બળતામાં ઘી હોમ્યું..! કરણ જોહરો તેને રસપ્રદ દર્શાવવા લાગ્યા. Homosexual લોકો ને સપોર્ટ કરવો તે ફેશનેબલ અને મોર્ડન ગણાવા લાગ્યું.
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અને આજે તેનું પરિણામ એ આવ્યું છે કે આજે ઉછરતું બાળક ભૂલ થી એવું માની લે છે કે પુરુષ પુરુષ અને સ્ત્રી સ્ત્રી વચ્ચે આકર્ષણ એ નોર્મલ કહેવાય.
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માટે જો કોઈ આ સમાચાર ને સાંભળીને ખુશ થઈ ગયા હોય તો ચેતી જજો..! વિજ્ઞાન ની દ્રષ્ટિએ આ વિકૃતિ છે અને માનસિક રોગ છે. જેની સારવાર મનોચિકિત્સક પાસે , સાઇકોથેરાપી વગેરે થી થઈ શકે છે.

Wednesday, 5 September 2018

छह कलमें और उनका तर्जुमा

date :- 05092018
Sab padho jisne nahi pada ho.. 🌹
1. पहला कलमा तय्यब:
*ला इलाहा इलल्लाहु मुहम्मदुर्रसूलुल्लाहि !*

» *तर्जुमा:* अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलैहि वसल्लम अल्लाह के नेक बन्दे और रसूल है.

2. दूसरा कलमा शहादत:
*अश-हदु अल्लाह इलाह इल्लल्लाहु वह दहु ला शरी-क लहू व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुहु.*

» *तर्जुमा:* मैं गवाही देता हु के अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं. वह अकेला है उसका कोई शरीक नहीं. और मैं गवाही देता हु कि (हज़रत) मुहम्मद सलल्लाहो अलैहि वसल्लम अल्लाह के नेक बन्दे और रसूल है।

3. तीसरा कलमा तमजीद:
*सुब्हानल्लाही वल् हम्दु लिल्लाहि वला इला-ह इलल्लाहु वल्लाहु अकबर, वला हौल वला कूव्-व-त इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यील अजीम.*

» *तर्जुमा:* अल्लाह पाक है और सब तारीफें अल्लाह ही के लिए है और अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं. इबादत के लायक तो सिर्फ अल्लाह है और अल्लाह सबसे बड़ा है और किसी में न तो ताकत है न बल लेकिन ताकत और बल तो अल्लाह ही में है जो बहुत शान वाला और बड़ा है.

4. चौथा कलमा तौहीद:
*ला इलाह इल्लल्लाहु वह्-दहु ला शरीक लहू लहुल मुल्क व लहुल हम्दु युहयी व युमीतु व हु-व हय्युल-ला यमूतु अ-ब-दन अ-ब-दा जुल-जलालि वल इक् रामि बियदि-हिल खैर व हु-व अला कुल्लि शैइन क़दीर.*

» *तर्जुमा:* अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं इबादत के लायक, वह एक है, उसका कोई साझीदार नहीं, सबकुछ उसी का है. और सारी तारीफ़ें उसी अल्लाह के लिए है. वही जिलाता है और वही मारता है. और वोह जिन्दा है, उसे हरगिज़ कभी मौत नहीं आएगी. वोह बड़े जलाल और बुजुर्गी वाला है. अल्लाह के हाथ में हर तरह कि भलाई है और वोह हर चीज़ पर क़ादिर है.

5. पांचवाँ कलमा इस्तिग़फ़ार:
*अस्तग़-फिरुल्ला-ह रब्बी मिन कुल्लि जाम्बिन अज-नब-तुहु अ-म-द-न अव् ख-त-अन सिर्रन औ अलानियतंव् व अतूबु इलैहि मिनज-ज़म्बिल-लजी ला अ-अलमु इन्-न-क अन्-त अल् आलमुल गुयूब व् सत्तारुल उयूब व् गफ्फा-रुज्जुनुब वला हो-ल वला कुव्-व-त इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यील अज़ीम.*

» *तर्जुमा:* मै अपने परवरदिगार (अल्लाह) से अपने तमाम गुनाहो कि माफ़ी मांगता हुँ जो मैंने जान-बूझकर किये या भूल कर किये, छिप कर किये या खुल्लम खुल्ला किये और तौबा करता हु मैं उस गुनाह से, जो मैं जानता हु और उस गुनाह से जो मैं नहीं जानता. या अल्लाह बेशक़ तू गैब कि बाते जानने वाला और ऐबों को छिपाने वाला है और गुनाहो को बख्शने वाला है और (हम मे) गुनाहो से बचने और नेकी करने कि ताक़त नहीं अल्लाह के बगैर जो के बोहोत बुलंद वाला है.

6. छठा कलमा रद्दे कुफ़्र :
*अल्लाहुम्म: इन्नी अऊज़ुबिक: मिन अन उशरिक: बिक: शयअन व अन: आलमो बेहि वस्तग़फ़िरुक: लिमा ला आलमु बेहि तुबतु अन्हो व तबररातो मिनल कुफरि वश्शीरकि वल किज़बि वल गीबति वल बिद्अति वन नमीमति वल फवाहिशि वल बुहतानि वल मआ‍

Sunday, 2 September 2018

विधि आयोग ने कहा- सरकार के खिलाफ बोलना राष्‍ट्रद्रोह नहीं

By AUGUST 31,2018

लॉ कमिशन ने कहा है कि किसी भी ऐसे शख्स पर देशद्रोह का आरोप नहीं लगाया जा सकता है जिसके विचार सरकार की वर्तमान नीतियों से मेल न खाते हों। वहीं लोगों को भी आजादी है कि वह जिस तरह से चाहें अपने देश के प्रति अपना प्रेम दिखा सकते हैं।

लॉ कमिशन ने उल्लेख करते हुए कहा है कि लोकतंत्र में ”एक ही किताब से गाना देशभक्ति का बेंचमार्क नहीं है।” वहीं लोगों को भी आजादी है कि वह जिस तरह से चाहें अपने देश के प्रति अपना प्रेम दिखा सकते हैं। लॉ कमिशन ने कहा है कि किसी भी ऐसे शख्स पर देशद्रोह का आरोप नहीं लगाया जा सकता है जिसके विचार सरकार की वर्तमान नीतियों से मेल न खाते हों। भारतीय दंड विधान के तहत आने वाले राष्ट्रद्रोह कानून (124ए) पर लाए गए सुझाव पत्र में कई मुद्दों को रखा गया, जिन पर विस्तृत चर्चा की जरूरत है। रिटायर्ड जस्टिस बीएस चौहान के नेतृत्व वाले लॉ कमिशन ने कहा कि सख्त राष्ट्रद्रोह कानून को सिर्फ उन्हीं मामलों में लगाया जाना चाहिए, जहां किसी काम को करने का उद्देश्य कानून व्यवस्था को बिगाड़ना या फिर हिंसा या अन्य अवैध रास्तों से सरकार को उखाड़ फेंकना हो”

पैनल ने अपने पेपर में कहा,” कमिशन को उम्मीद है कि न्याय क्षेत्र के विद्वानों, कानून निर्माताओं, सरकार और गैर सरकारी एजेंसियों, एकेडेमिक, विद्यार्थी और सबसे ऊपर आम जनता के बीच स्वस्थ बहस होनी चाहिए। ताकि जन हितकारी सुधार किया जा सके।” पैनल ने बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की पुरजोर वकालत की।
पैनल ने कहा कि लोकतंत्र में एक ही किताब से गाना देशभक्ति का बेंचमार्क नहीं है। वहीं लोगों को भी आजादी है कि वह जिस तरह से चाहें अपने देश के प्रति अपना प्रेम दिखा सकते हैं। सरकार की नीतियों में मौजूदा ​कमियों की ओर इशारा करते हुए पैनल ने कहा कि ऐसा करने पर कोई भी स्वस्थ बहस और आलोचना में शामिल हो सकता है। ऐसी अभिव्यक्ति करने में इस्तेमाल हावभाव कई बार कठोर और कुछ लोगों को अप्रिय हो सकते हैं। लेकिन ऐसी चीजों को देशद्रोह नहीं कहा जा सकता है।

पैनल ने कहा,” अगर देश के लोगों को सकारात्मक आलोचना का अधिकार नहीं होगा तो आजादी से पहले और बाद के वक्त में बहुत थोड़ा ही फर्क रह जाएगा। किसी के द्वारा अपने इतिहास की आलोचना का अधिकार और किसी बात का विरोध करने का अधिकार बोलने के अधिकार के तहत संरक्षित किए गए हैं। ये देश की अखंडता को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं, इसका बोलने के अधिकार को नियंत्रित करने के औजार के रूप में दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है।

Saturday, 1 September 2018

आखिर नोटबंदी का भयावह सच सामने आ ही गया

आखिर नोटबंदी का भयावह सच सामने आ ही गया.
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आखिरकार नोटबंदी का पूरा डरावना सच देश के सामने आ ही गया, ये एक विफल त्रासद प्रयोग था जो कि देशहित में अब नज़र न आकर विशुद्ध रूप से एक राजनीतिक हथकंडा नज़र आ रहा है और जिसका परिणाम देश के करोड़ों आमजनों के साथ साथ अर्थव्यवस्था और व्यापर को भुगतना पड़ रहा है !

प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी के चार बड़े लक्ष्य बताये थे इन चार लक्ष्यों में से तीन बड़े लक्ष्यों में सरकार आज भी निल बटे सन्नाटा की स्थिति में है, इनमें से तीन लक्ष्य बिलकुल फ्लॉप साबित हुए और चौथा लक्ष्य भले ही हासिल हुआ हो मगर ग्रामीण और दूर दराज़ के गांव इससे भी अछूते ही हैं !

याद कीजिये 8 नवंबर, 2016 को उन्होंने कहा था  ‘इसलिए, भ्रष्टाचार, काला धन, नकली नोटों और आतंकवाद के विरुद्ध इस लड़ाई में, देश के विशुद्धीकरण के इस अभियान में क्या हमारे लोग कुछ दिनों की कठिनाइयों को सहन नहीं करेंगे ? मुझे पूरा भरोसा है कि देश का हर नागरिक उठ खड़ा होगा और इस महायज्ञ में भागीदार बनेगा.’

उपरोक्त कथन को यहाँ समझिये कि क्या थे वो चार लक्ष्य जिसे बताकर जनता को बहलाया गया था, और कितने पूरे हुए  : 👇

1. आतंकवाद पर लगाम  : नोटबंदी के बाद मोदी जी ने कहा था कि इससे आतंकवाद पर लगाम लगेगी, मनी लांड्रिंग पर काबू पाया जायेगा, आतंकियों को फंडिंग पर रोक लगेगी !
हुआ क्या : -  8 नवंबर 2015 से नवंबर 2016 तक 155 आतंकी घटनाएं हुईं, इसके बाद 2017 तक 184 व 31 जुलाई 2018 तक 191 घटनाएं हुईं !

2. ब्लैक मनी : सबसे बड़ा दावा किया गया थे काले धन पर चोट का, बोले थे कि ढाई साल में 1.2 लाख करोड़ रु. कालाधन बाहर आया, तीन चार लाख करोड़ और आएगा !
हुआ क्या : - 99.3% पुराने नोट वापस आ चुके हैं, जो 10,720 करोड़ रु. नहीं आए, उन्हें भी सरकार पूरी तरह कालाधन नहीं मान रही, उधर उलटे स्विस बैंकों में 2017 में भारतीयों द्वारा जमा रकम में 50 % की और वृद्धि हो गयी !

3. भ्रष्टाचार : दावा किया गया था कि नोटबंदी से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी !
हुआ क्या : - ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के सर्वे में भारत एशिया में भ्रष्ट देशों की सूची में  69 प्रतिशत रिश्वतखोरी की रेट के साथ टॉप पोजीशन पर पहुँच गया, 175 देशों में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के सर्वे के अनुसार भ्रष्ट देशों की वैश्विक रैंकिंग में भारत 2016 में 79 नंबर से छलांग लगाकर 2017 में 81 पर पहुंच गया !

4. डिजिटल लेनदेन : दावा किया था कि डिजिटल ट्रांसक्शन से भ्रष्टाचार में कमी आएगी, नकदी के अधिक उपयोग का सम्बन्ध भ्रष्टाचार से है !
हुआ क्या : - 2016 के मुकाबले 2017 में पीछे साल के मुक़ाबले डिजिटल लेनदेन 40% बढ़ा है, जुलाई 2018 तक इसमें 5 गुणा वृद्धि दर्ज की गयी है, कह सकते हैं कि यहाँ सरकार को अपने केवल इसी दावे में सफलता मिली है !

नोटबंदी के कुछ और भयावह पहलू :  👇
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1 नोटों की छपाई का खर्च पिछले साल 133% बढ़ा
2015 में खर्च : 6 3,421 करोड़
2016 में खर्च : 17 7,965 करोड़
2017 में खर्च :18 4,912 करोड़

2 नए 500 रु. के नकली नोट 4171% बढे और 2000 रु. के 2710% बढ़े !

3 नक़ली करेंसी का ज़ोर बढ़ा : नोटबंदी के बाद कहा गया था कि नए नोट बहुत ही सुरक्षित और उच्च तकनीक से छापे गए हैं, इनकी नक़ल करना असंभव है, मगर हुआ इसका उलट :-

2000 रु. के नकली नोट 28 गुना ज्यादा पकड़े गए-
2016-17 में 500 रु. के 199 नकली नोट पकड़े गए-
2017-18 में यह संख्या बढ़कर 9,892 हो गई-
2000 रु. के नकली नोटों की संख्या 638 से बढ़कर 2017-18 में 17,929 हो गई !

50 के नकली नोट 154% बढ़े :-
2015-16 में : 6,453
2016-17 में : 9,222
2017-:18 में : 23,447

100 के नकली नोट 35% बढ़े
2015-16 में : 2,21,447
2016 -17 में : 1,77,195
2017 -18 में : 2,39,182

50 रु. के नकली नोटों में नए भी-
सबसे ज्यादा नकली नोट 100 रु. के !
(उपरोक्त सभी आंकड़े दैनिक भास्कर से)

इसी नोटबंदी के चलते ATM और बैंकों की लाइन में लगे 100 से ज़्यादा गरीब और बेक़ुसूर लोगों की मौत हुई !

कुल मिलाकर नोटबंदी से ‘भ्रष्टाचार, काला धन, नकली करेंसी तथा आतंकवाद’ के खात्मे जैसे दावे इस रिपोर्ट के आने के बाद औंधे मुंह गिरे नज़र आ रहे हैं !!

नोटबंदी का भयावह सच सामने आ ही गया. http://observerviews.com/2018/08/demonetisation-was-a-failure/#.W4oGjNjmHOU.whatsapp

कच्छ Demolition 2026 Riport।

कच्छ 2026 डिमोलिशन रिपोर्ट । सोशल मीडिया से तथ्य, घटनाक्रम और ज़मीनी चर्चाओं का संकलन .... साथियों,  इस रिपोर्ट को तैयार करने का...