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Sunday, 19 January 2020

मोदी सरकार अंग्रेज हुकूमत जैसी तानाशाहीका काला कानून लगाने में लगी है,जिसका एक ओर काला कानून ROWTALL 19 January 2020 से लागू करके किया है।

मुबारक हो दिल्ली, नया रॉलेट एक्ट आया है~

"तानाशाही वाली अंग्रेज के कदम के साथ कदम"

सुबह सबेरे जब आप अपने बिस्तरों से उठ रहे होंगे, चाय का इंतजार कर रहे होंगे, तब तक सरकार आपके जुबान सिलने का कानूनी इंतजाम कर चुकी है. 19 जनवरी यानी कल से अगले 3 महीने तक दिल्ली में 'राष्ट्रीय सुरक्षा कानून' लागू कर दिया गया, मतलब कि 'रासुका' अब पूरे दिल्ली में अगले तीन महीने तक रहेगी. आपके सामने, आपकी नाक के नीचे, लोकतंत्र को मिडिल फिंगर दिखाकर धीरे-धीरे रामराज्य इंस्टाल किया जा रहा है. 

'रासुका', धारा 144 की तरह एक नॉर्मल सेक्शन भर नहीं है, कि इस गली में हिरासत में लिया अगली गली में छोड़ दिया, ये इतना बड़ा काला कानून है कि आप प्री आपातकाल में पहुंच चुके हैं.

1. इस कानून के हिसाब से सरकार को आपको ये बताने की जरूरत ही नहीं कि आपका अपराध क्या है? सरकार को जिसपर भी शक हो उसे गिरफ्तार कर सकती है, सरकार जिसे भी संदिग्ध मानती है उसे डिटेन कर सकती है. बिना कुछ बताए.

2. बिना आरोप तय किए ही सरकार आपको 1 साल तक जेल में रख सकती है, जबकि सामान्य स्थिति में गिरफ्तारी के 24 घन्टें के अंदर आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है. 

3. इसके आंकड़े एनसीआरबी (नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो) में भी दर्ज नहीं किए जाते, मतलब जब रिपोर्ट ही नहीं होगी, चार्जेस ही नहीं होंगे तो पता ही नहीं चलेगा कि कितने लोग जेल में पटक दिए गए.

4. इस कानून के अनुसार आप कानूनी मदद के लिए वकील की सहायता भी नहीं ले सकते.

5. सरकार चाहे तो गिरफ्तार किए गए इंडिविजुअल पर्सन को बताने के लिए भी जिम्मेदार नहीं है कि किस कारण जेल में डाले जा रहे हो, उसकी गलती क्या है!

6. आप इस बाबत नॉर्मल जिला न्यायालय या सेशन न्यायालय में अपना केस नहीं लड़ सकते, इसके लिए हाईकोर्ट ही विकल्प है, हाईकोर्ट में ही अपका केस लड़ा जा सकता है, यदि वहां भी सक्षम अधिकारी यह साबित कर दे कि आरोपी को जेल में रखा जाना जरूरी है तो उसपर आगे कोई रोक नहीं है, जितने दिन सरकार चाहे जेल में रख सकती है. सक्षम अधिकारी से मतलब है कि सरकार का कोई नुमाइंदा जैसे डीएम, या पुलिस का कोई बड़ा अधिकारी.

इस कानून को शार्ट में समझें तो- "न वकील, न दलील, न अपील" 

इस कानून के कितने खतरे हैं इसका एक छोटा सा उदाहरण लीजिए, मणिपुर में एक पत्रकार थे, उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट लिखी, वह नॉर्मल पोस्ट थी, जिसमें मणिपुर के मुख्यमंत्री की कुछ आलोचना थी, केवल इसी बात के लिए उनपर रासुका लगा दी गई, और महीनों जेल में रखा गया. ये इतना बड़ा काला कानून है अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है. यूपी में भी 3 लोगों पर गो हत्या के फर्जी मुकदमें में रासुका लगा दी गई. हालांकि पिछली सरकारें भी इस कानून का सहारा लेती रहीं हैं. इंदिरा गांधी ने ही इस कानून को इंट्रोड्यूस किया था. इंदिरा ने तो इस देश में आपातकाल भी लगाया था. यही कारण भी हैं कि इंदिरा को इस देश ने आईना दिखाया. इंदिरा या कांग्रेस इस देश का आदर्श नहीं हैं. लेकिन पुराने उदाहरणों का तर्क लेकर वर्तमान का विध्वंस नहीं किया जा सकता. 

दिल्ली देशभर के लोकतांत्रिक अधिकारों को लागू करने का मंच है. तमिलनाडु के किसानों को भी कोई समस्या होती है तो दिल्ली आते हैं, दिल्ली पर कब्जे का मतलब है देश की जुबान पर कब्जा. एक ऐसे समय में जबकि लोग एनआरसी, नागरिकता कानून, फीस वृद्धि के मुद्दे पर सड़कों पर हैं, सरकार इस कानून की आड़ लेकर विरोधियों को कुचलने का पूरा प्लान तैयार कर चुकी है.

अब सरकार जिसे चाहे फेसबुक पोस्ट के लिए उठा सकती है, बिना कारण बताए जेल में डाल सकती है, न वकील मिलेगा, न कोई दलील चलेगी. जिसे चाहो जेल में डाल दो, मुझे लिखने के लिए, आपको पोस्ट लाइक-शेयर करने के लिए भी जेल में ठूंसा जा सकता है. राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा किससे है? लोकतंत्र बचाने के लिए सड़कों पर उतरीं औरतों से या पुलिस से उन्हें पिटवाने वाले क्रिमिनल गृहमंत्री से है? 

'राष्ट्रीय सुरक्षा' शब्द अपने आप में काफी वेग है, अपरिभाषित है, अमित शाह के बेटे पर पोस्ट लिखने को भी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा माना जा सकता है, मोदी पर बनाए मीम्स को भी. सरकार की आलोचना भी अब देश के लिए खतरा मानी जाएगी. 

धीरे धीरे आप प्री आपातकाल में पहुंच चुके हैं. लेकिन आप टेंशन मत लीजिए, जबतक कि व्हाट्सएप पर ॐ भेजने की सुविधा है, ट्विटर पर जय माता दी लिखने की सुविधा है. देश को कोई खतरा नहीं है।

तानाशाही वाली अंग्रेज हुकुमत जैसा बीजेपी सरकार लोकतंत्र विरोधी कानून लागते हुये.


गाँधीजी ने व्यापक हड़ताल का आह्वान किया। रोलेट एक्ट गांधीजी के द्वारा किया गया राष्ट्रीय लेवल का प्रथम आंदोलन था। 24 फरवरी 1919 के दिन गांधीजीने मुंबई में एक "सत्याग्रह सभा"का आयोजन किया था और इसी सभा में तय किया गया और कसम ली गई थी की रोलेट एक्ट का विरोध 'सत्य'और 'अहिंसा' के मार्ग पर चलकर किया जाएंगा। गांधीजी के इस सत्य और अहिंसा के मार्ग का विरोध भी कुछ सुधारवादी नेताओं की और से किया गया था, जिसमें सर डि.इ.वादी, सुरेन्द्रनाथ बनर्जीतेज बहादुर सप्रुश्री निवास शास्त्री जैसे नेता शामिल थे।किन्तु गांधीजी को बड़े पैमाने पर होमरूल लीग के सदस्यों का समर्थन मिला था।

हड़ताल के दौरान दिल्ली आदि कुछ स्थानों पर भारी हिंसा हुई। इस पर गांधी जी ने सत्याग्रह को वापस ले लिया और कहा कि भारत के लोग अभी भी अहिंसा के विषय में दृढ रहने के लिए तैयार नहीं हैं।

13 अप्रैल को सैफुद्दीन किचलू और सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरोध में जलियाँवाला बाग में लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। अमृतसर में तैनात फौजी कमांडर जनरल डायर ने उस भीड़ पर अंधाधुंध गोलियाँ चलवाईं। हजारों लोग मारे गए। भीड़ में महिलाएँ और बच्‍चे भी थे। यह घटना ब्रिटिश हुकूमत के काले अध्‍यायों में से एक है जिसे जालियाँवाला बाग हत्याकांड के नाम से जाना जाता है।

इतिहाससंपादित करें

10 दिसम्बर 1917 को रॉलेट एक्ट की स्थापना हुई थी। इस समिति के द्वारा लगभग 4 महीनों तक “खोज” की गई और रॉलेट समिति की एक रिपोर्ट में भारत के जाबाज देशभक्तों द्वारा स्वतंत्रता के लिए किये गए बड़े-बड़े और छोटे आतंकपूर्ण कार्यों को बढ़ा-चढ़ाकर, बड़े उग्र रूप में प्रस्तुत किया गया था। नौकरशाही के दमन चक्र, मध्यादेशराज,युद्धकाल में धन एकत्र करने और सिपाहियों की भर्ती में सरकार द्वारा कठोरता बरते जाने के कारण अंग्रेजी शासन के खिलाफ भारतीय जनता में तीव्र असंतोष पनप रहा था। देश भर में उग्रवादी घटनाएं घट रही थीं। इस असंतोष को कुचलने के लिए अंग्रेजी सरकार रौलट एक्ट लेकर आई।

सरकार ने 1916 में न्यायाधीश सिडनी रौलट की अध्यक्षता में एक समिति गठित की, जिसे आतंकवाद को कुचलने के लिए एक प्रभावी योजना का निर्माण करना था। रौलट कमेटी के सुझावों के आधार पर फरवरी 1918 में केंद्रीय विधान परिषद में दो विधेयक पेश किए गए। इनमें से एक विधेयक परिषद के भारतीय सदस्यों के विरोध के बाद भी पास कर दिया गया। [1]


जलियांवाला बाग हत्याकांड: क्या था रोलेट एक्ट? जिसके विरोध में गई सैकड़ों लोगों की जान

आज जलियांवाला बाग हत्याकांड को 100 साल पूरे हो गए हैं। 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में रोलेट एक्ट के विरोध में हजारों लोग एकत्र हुए थे। अंग्रेज अफसर जनरल डायर ने इस बाग के मुख्य द्वार को अपने सैनिकों और हथियारंबद वाहनों से रोककर निहत्थी भीड़ पर बिना किसी चेतावनी के 10 मिनट तक गोलियों की बरसात कराई थी। 

इस घटना में तकरीबन 1000 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 1500 से ज्यादा घायल हुए थे। लेकिन ब्रिटिश सरकार मरने वाले लोगों की संख्या 379 और घायल लोगों की संख्या 1200 बताती है। ये लोग यहां रोलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एकत्रित हुए थे। 

क्या था रोलेट एक्ट? 

रोलेट एक्ट जिसे काला कानून भी कहा जाता है, भारत की ब्रिटानी सरकार द्वारा भारत में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलन को कुचलने के लिए बनाया गया। ये कानून सर सिडनी रौलेट की अध्यक्षता वाली सेडिशन समिति की सिफारिशों के आधार पर बनाया गया था। 

इस कानून से ब्रिटिश सरकार को ये अधिकार प्राप्त हो गया था, कि वह किसी भी भारतीय पर अदालत में बिना मुकदमा चलाए, उसे जेल में बंद कर सकती थी।

कानून का जमकर हुआ विरोध?

इस कानून के तहत अपराधी को उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले का नाम जानने का भी अधिकार नहीं था। इस कानून का पूरे देश में जमकर विरोध हुआ। देशव्यापी हड़तालें, जूलूस और प्रदर्शन होने लगे। महात्मा गांधी ने बड़े पैमाने पर हड़ताल का आह्वान किया। 

अमृतसर के दो बड़े सामाजिक नेता डॉ सत्यपाल और डॉ सैफुद्दीन किचलू भी गिरफ्तार कर लिए गए। तब अमृतसर समेत पूरे पंजाब में लोगों में रोष फैल गया। उन दिनों 13 अप्रैल 1919 को वैशाखी वाले दिन पंजाब के किसान अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में एकत्र हुए थे। इसी दिन जलियांवाला बाग में एक विरोध सभा का आयोजन हुआ। जिसमें जनरल डायर ने लोगों पर गोलियां बरसा दीं। इस घटना को ब्रिटिश भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है।
 
आपके लिए- 13 अप्रैल, 1919 ब्रिटिश भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है। इसी दिन अंग्रेज अफसर ने सैकड़ों लोगों पर गोलियों की बरसात करवा दी। वो भी बिना किसी चेतावनी के। ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरिजा मे ने भी बुधवार को इस घटना के प्रति खेद प्रकट किया है।

"अभितो बहोत कूच बाकी है, आगे आपकी खामोसी गुलामी के दलदल में इस फसा देगी जिसमे से निकलना मुश्किल होगा" 

Saturday, 18 January 2020

સુલ્તાન સલાહુદ્દીન અય્યુબી ।

दुश्मन से जंग जीतना है तो पहले अपने बीच मौजूद ईमान फ़रोश क़ौम के गद्दारों को ख़त्म करना होगा.!सुल्तान_सलाहुद्दीन_अय्यूबी......
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સુલ્તાન સલાહુદ્દીન અય્યુબી ફક્ત ઇસ્લામિક અને મુસલમાનોના ઇતિહાસમાં જ નહીં બલ્કે સમગ્ર વિશ્વનાં ઇતિહાસની એક મહત્વપૂર્ણ પ્રતિભા છે જેણે સમકાલીન સમયની બે મહાશક્તિઓ (યહૂદી-ખ્રિસ્તી) ના જોડાણ ને પરાજિત કરી હતી. ઇસ્લામી આલમ ભલે એમને ઇસ્લામના વિજેતાના રૂપમાં પ્રસ્થાપિત કરતું હોય પણ માનવીય શક્તિઓના ઘણા પાસાઓ એમનામાં દ્રશ્યમાન થાય છે. 
          જાસૂસીની સામે પ્રતિજાસૂસી તંત્ર એમના સમયમાં એમનાં દ્વારા કરાય છે તો ગરમ પ્રદેશના લડાકુઓને ઠંડા પ્રદેશોમાં લડવાની તાલિમ આપવાં મહાકાય પગલાઓ એમણે ભર્યાં છે અને સાથોસાથ આ પગલાઓને વિજયના પરિણામમાં પરિવર્તિત કરવાનું બહુમાન આદરણીય અય્યુબી સાહબના ભાગ્યમાં લખાયું છે. 
       યુરોપના સમ્રાટોને એકબીજાના વિરોધને છોડીને એક થવાની મજબૂરી ફક્ત અય્યુબી સાહબની બહાદૂર આગેકૂચ ને આભારી હતી પણ આવી પ્રખર એક્તા  પણ અય્યુબી સાહબના ઇરાદાઓને પરાજિત કરી શકી નહીં. શત્રુની બહેન દીકરીઓના શિયળની રક્ષા માટે કોઇની સાડાબારી નહીં રાખનાર વિજેતા અય્યુબી સાહબને દુનિયા કદી નહીં ભૂલાવી શકે. પોતાના કટ્ટર શત્રુને મરણ પથારીએ પટકી દેનાર રોગની સારવાર કરાવવાની ઉદારતાનો ઇતિહાસમાં જોટો જડતો નથીં કારણ કે આ ગૌરવ પણ અય્યુબી સાહબની કિસ્મતમાં લખાણુ છે. 

       વિશ્વના એક મહાન યોદ્ધા એવા અય્યુબી સાહબનો ઉપરનો ઉપદેશ ખૂબ માર્મિક છે એ સારી રીતે સમજવા એમનું સંઘર્ષમય જીવન વાંચવુ પડે. ઇસ્લામ અને મુસલમાનોના બલ્કે માનવતાના શત્રુઓ સામે ખૂબ લાંબુ યુદ્ધ લડવાની તૈયારી કરનારા અય્યુબી સાહબને ડગલે ને પગલે આંતરિક નડતરોનો સામનો કરવો પડ્યો એ ખૂબ વિચિત્ર અને આંચકાજનક તથ્યો છે. 

ઇસ્લામના ઉદયકાળથી એક વાસ્તવિકતા એ રહી છે કે યહૂદીઓએ ખૂબ ષડયંત્રો રચી અમલમાં મૂક્યાં છે. એ જ કારણ છે કે મુસ્લિમ કર્મશીલો યહૂદીનો જરા પણ ભરોસો કરવા તૈયાર હોતા નથી. ખાસ કરીને મુસ્લિમોની ધાર્મિક નેતાગીરી યહૂદીઓ પ્રત્યે સજાગ રહેવાની તાલીમ આપે છે પણ અય્યુબી સાહબના કિસ્સામાં એનાથી ઉલ્ટું ચિત્ર સામે આવે છે કે જ્યારે યહૂદીઓના આટલા મોટા દુશ્મન બની એઓની વાટ લગાવવા એડીચોટીનુ જોર લગાડનાર મુસ્લિમ લડવૈયા અય્યુબી સાહબના લશ્કરમાં એમના સ્પષ્ટ અને બુલંદ ઇરાદાઓ જોઇ ભરતીમાં જે ઉછાળો આવવો જોઈએ તે એકાએક શમી ગયો બલ્કે એમા ઓટ આવી આ પરિસ્થિતિ જોઇ ચિંતામાં ગરકાવ થઈ એનુ કારણ જાણવા પોતાનુ નિષ્ણાત જાસૂસી તંત્રને કામે લગાડ્યું ત્યારે ચોંકાવી નાખનારી સત્ય બાબતો સામે આવી કે જે ઇસ્લામિક ધર્મગુરુઓ પોતાના પ્રવચનોમાં ભર્તી માટે પ્રેરણા આપવાની હોય તેઓ અય્યુબી સાહબની ચમકતી પ્રતિભાથી ઇર્ષાની આગમાં શેકાઈ એમની આગેકૂચને રોકવા ઇર્ષાની આગમાં આંધળા બની અય્યુબી સાહબની વિરુદ્ધ પ્રવચનો કરી રહ્યા હતાં. એમનાં સંઘર્ષ ને બિરદાવવાના બદલે એમની ટીકાઓ કરી એમના મિશનને પ્રસિદ્ધિ મિશન તરીકે ખપાવવાનો કૃપ્રચાર કરતા હતાં.  અત્રે ઉલ્લેખનીય છે કે મુસ્લિમ સમુદાયનો એક મોટો વર્ગ ધર્મગુરુઓ પ્રત્યે ખૂબ શ્રધ્ધા ધરાવતો હોય છે. 

અય્યુબી સાહબના કિસ્સામાં પણ આ પરિબળ કામ કરી ગયું અને ધર્મગુરુઓની ઇર્ષાનો ભોગ બનેલા અય્યુબી સાહબ આ વાસ્તવિકતા જાણી હતપ્રભ બની ગયા. પરંતુ સર્જનહાર પર અપાર શ્રધ્ધા ધરાવતા અને પોતાના નેક ઇરાદાઓ વિશે સભાન અય્યુબી સાહબે કોઇની પણ સાડાબારી રાખ્યાં વિના કઠોર નિર્ણયો લેવાના શરું કર્યાં.  માનવતા વિરોધી યહૂદી શક્તિ સામે બાથ ભીડવા તત્પર અય્યુબી સાહબે એક મોટા વર્ગની સહાનુભૂતિની પરવા કર્યા વિના આવા ધર્મગુરુઓ સામે કઠોર કાર્યવાહી શરૂ કરી. સૌપ્રથમા  ધર્મ ગુરુઓની જાસૂસી કરાવવી શરું કરી અને સફળ ઓપરેશનો કરાવ્યા ત્યારે ચોંકાવનારી હકીકતો એ સપાટી પર આવી કે આ ધર્મગુરુઓ યહૂદીઓના એજન્ટ નિકળ્યા.  વિવિધ પુરાવાઓ સાથે એઓની ધરપકડ શરું કરાઇ અને રાજ્ય વ્યવસ્થામાં મોટાપાયે ફેરફારો કરાયા. ધાર્મિક પ્રવચનકારોને આડેધડ પ્રવચનો પર રોક લગાવવામા આવી. એમની નિમણૂક વ્યવસ્થામાં નિયમો લાગૂ કરાયા જેથી બાહ્ય શકલ, પોશાક અને વાણીથી કોઇ સંમોહિત થઇ છેતરાઇ ના જાય. એમને મનમરજીના અને મનઘડત પ્રવચનોના બદલે સૂચનાપત્રના આધારે પ્રવચનો કરવાની ગોઠવણ કરાઇ. એમની ગતિવિધિઓ પર નિરીક્ષણ ગોઠવાયું.  ત્યાર પછી ભરતીમાં પુરજોશ વધારો થયો.  એજન્ટોને બદલે ઇસ્લામ પ્રત્યે સમર્પિત લોકોના પ્રવચનો શરું થયાં.  જનતા એમના સમર્થનમા જાનની બાજી લગાવવા તૈયાર થઈ. અય્યુબી સાહબના ઘણાં કમાન્ડરો પણ દુશ્મનોના એજન્ટ તરીકે પકડાયા હતા.  આમ ડગલે ને પગલે આંતરિક દુશ્મનોનો સામનો કરી, એમની ઓળખ કર્યા પછી એમનો સફાયો કરવા તંત્ર વિકસાવનાર અય્યુબી સાહબનો ઉપદેશ કે "दुश्मन से जंग जीतना है तो पहले अपनें बीच मौजूद ईमान फरोश कौम के गद्दारो को खत्म करना होगा ..!આ એમના જીવન અનુભવનો નીચોડ છે જેથી એની અવગણના કદાપિ ના કરી શકાય અને ખાસ કરીને જે સમુદાયની જંગ યહૂદી સામે કે યહૂદી દોસ્ત કે યહૂદી સમર્થકો સામે હોય એઓ કદાપિ કોઇનો આંધળો ભરોસો કરી શકે નહીં. પોતાના સમુદાયમાં મૌજુદ ઈમાન ફરોશોની સાચી ઓળખ કરી એ નડતર દૂર કર્યા વિના આપણા અસ્તિત્વની કઠિન જંગ જીતી શકાય નહી. (આંતરિક ગદ્દારોને ઓળખવા માટે એમની વાણી અને વર્તનને કસોટીની એરણ પર ચકાસવુ જરુરી છે. જેઓ સમુદાયની રાહબરી કરવાનો દાવો કરતા હોય એવા લોકોના જીવનને પણ મુશ્કેલ સમયનાં કસોટી કાળમાં એમની ભૂમિકા સક્રિય કે નિષ્ક્રિય રહી છે એ જાણમાં રાખી નિર્ણય લેવો જોઈએ)

➖સલાહુદ્દીન અય્યુબીના સાહસ, જાંબાઝ રાહબરી,  દિલેર મર્દાનગી અને અદમ્ય બહાદૂરી સાથેના અપ્રતિમ વિજયને  તથા માનવ સમાજના સૌથી મોટા શોષણખોર વર્ગને પછાડી માનવ ઉપકારક કાર્ય ને અંતરના ઉંડાણ થી સલામ..

Tuesday, 14 January 2020

आजाद भारत मे 8 सालमे 307 बार इंटरनेट बंध किया । 1912 से 2020

दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाने वाला देश बन भारत, 92 अरब का नुकसान।

सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को अपने फैसले में कहा कि इंटरनेट संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत लोगों का मौलिक अधिकार है।

इंटरनेट पर रोक के सरकार के आदेशों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद इस बारे में बहस तेज हो गई है। कश्मीर में जारी पाबंदियों की समीक्षा करते हुए सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने कहा कि यह लोगों का मौलिक अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को अपने फैसले में कहा कि इंटरनेट संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत लोगों का मौलिक अधिकार है। यानी यह जीने के हक जैसा ही जरूरी है।

क्या है अनुच्छेद 19: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 भारत के नागरिकों के लिए कुछ मौलिक अधिकारों की बात करता है। अनुच्छेद 19 (1) के तहत ये हमारे मौलिक अधिकार हैं : सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, बिना हथियार किसी जगह शांतिपूर्वक इकट्ठा होने, संघ या संगठन बनाने, कहीं भी स्वतंत्र रूप से घूमने, भारत के किसी भी हिस्से में रहने और बसने, कोई भी व्यवसाय- पेशा अपनाने या व्यापार करने का अधिकार। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2017 में एक फैसले में कहा था कि इंटरनेट एक्सेस नागरिकों का हक है।


इंटरनेट रोकने की कानूनी प्रक्रिया: भारत में इंटरनेट सेवाएं रोकने के लिए अभी दो कानूनी प्रावधान और एक नियमावली है। ये हैं- कोड आॅफ क्रिमिनल प्रासीजर- 1973 (सीआरपीसी), इंडियन टेलिग्राफ एक्ट- 1885 और 2017 का टेंपररी सस्पेंशनआॅफ टेलिकॉम सविर्सेज (पब्लिक इमरजेंसी या पब्लिक सेफ्टी) रूल्स। इनके आधार पर ही सरकारी एजंसियां भारत के जिलों या राज्यों में इंटरनेट बंद करने का फैसला करती हैं। इसकी पूरी प्रक्रिया है। केंद्र या राज्य के गृह सचिव इंटरनेट पर रोक करने का आदेश देते हैं। यह आदेश एसपी या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी के माध्यम से सेवा प्रदाता को भेजा जाता है।


4,196 घंटे रोक, 92 अरब नुकसान: साल 2019 में सरकार ने कई बार इंटरनेट बंद किया। पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाने वाला देश भारत ही है। इंटरनेटशटडाउंस डॉट इन के मुताबिक, 2012 से लेकर 2019 तक भारत में कुल 379 बार इंटरनेट बंद किया गया है। केवल 2019 में ही 103 बार इंटरनेट को बंद किया गया है। सबसे अधिक प्रतिबंध जम्मू-कश्मीर में 180 बार लगाया गया है। शोध संस्था टॉप10वीपीएस के मुताबिक, इससे भारत को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। भारत को करीब 1.3 बिलियन डॉलर यानी करीब 92 अरब 18 करोड़ 75 लाख 50 हजार रुपए का नुकसान हुआ है। केवल कश्मीर में करीब 78 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।


केरल में इंटरनेट मूलभूत अधिकार: केरल ने अब से करीब तीन साल पहले इंटरनेट को लोगों का मूलभूत अधिकार घोषित कर दिया था। मार्च 2017 में ही केरल ने हर नागरिक के लिए भोजन, पानी और शिक्षा की तरह इंटरनेट को भी मूलभूत अधिकार की श्रेणी में रख दिया था। अपने बजट में इस राज्य ने अपने 20 लाख गरीब परिवारों तक इंटरनेट की पहुंच देने के लिए योजना बनाई थी और फंड आवंटित किया था।

संयुक्त राष्ट्र और इंटरनेट अधिकार: संयुक्त राष्ट्र ने भी सभी देशों से लोगों के लिए इंटरनेट को मौलिक अधिकार बनाने की सिफारिश की है। कोस्ट रीका, एस्तोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, ग्रीस और स्पेन में इंटरनेट को नागरिकों का मूलभूत अधिकार घोषित किया जा चुका है। इन देशों ने अपने संविधान में इसे चिन्हित किया है। भारत और पाकिस्तान के बाद जिन देशों में इंटरनेट बंद किए जाने के सबसे अधिक मामले सामने आए, उनमें इराक (सात बार), यमन (सात बार), इथियोपिया (छह), बांग्लादेश (पांच और रूस (दो) शामिल हैं।


रूस की सरकार एक तरह का समानांतर इंटरनेट बना रही है, जो केवल रूस की सीमाओं में ही उपलब्ध होगा। तब रूस की सरकार का लोगों के इंटरनेट इस्तेमाल करने पर पूरा नियंत्रण होगा। चीन में सरकार या देश विरोधी कंटेंट रोकने के नाम पर कई फिल्टर लगाए गए हैं। चीन ने कई वेबसाइटों पर भी रोक लगा रखी है।


Huzaifa Patel.     

देश की सभी राजनीतिक दलों के सामने 35 पैेराग्राफ|ismail batliwala

देश की सभी राजनीतिक दलों के सामने 35 पैेराग्राफ का यह पत्र
2018 में पेश किया गया था मगर किसी पार्टी ने गंभीरता से नहीं लिया था।
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(1)आर्टिकल 341 के तहत पार्लियामेंट से पंचायत समिति तक लाखों सीटें ऐसी हैं जहां मुसलमान को सिर्फ वोट देने का अधिकार है चुनाव लड़ने का नहीं है इसलिए भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद के मंजूर किये गए आर्टिकल 341 के आर्डर को वापिस लिया जाये और संविधान के मंजूरशुदा पसमांदा मुस्लिम समाज को चुनाव में खड़े रहने का अधिकार दिया जाये I

(2) हुकुमत की जानिब से सरकारी तंत्र की मिली जुली पावर कमिटी तय होना चाहिए और आबादी के अनुपात मुस्लिमों को चुनाव में टिकट दिया जाये जिसमे संविधान के मंजूरशुदा पसमांदा मुस्लिम समाज की हिस्सेदारी हो।

(3)हिन्दू समाज मे दलित व अतिदलित हैं,उसी तरह संविधान के मंजूरशुदा मुस्लिम समाज में जो शोषित व वंचित है उन्हें भी अनसूचित जाति में शामिल किया जाये I

(4)हिन्दू मोची,धोबी को फिछड़ी जाति से जोडा गया है और उसी तरह संविधान के मंजूरशुदा मुसलमान भी पिछड़ा है जैसे बुनकर,क़साई,धोबी,तेली,नाई,मनिहार,कुंजड़ा,कलाल,मंसूरी आदि को पिछड़ी जाति में जोड़ा जाये जो हक़ उनको मिलता है वो हक़ इन को भी मिलना चाहिये I

(5) संविधान के मंजूरशुदा मुस्लिम समाज में तेली,मनिहार,धोबी, नाई,मंसूरी इत्यादि लोग OBC में आते हैं मगर उनकी गलती है कि वो लोग अपना सरनेम खान,पठान,सैयद इत्यादि लिख लिए हैं इसलिए उनको OBC का सर्टिफिकेट बनाने में दिक्कत होती है इसलिए उनकी नाम दुरुस्ती के लिए गजट को आसान किया जाये ताकि आसानी से उनक सर्टिफिकेट बन सके और OBC का लाभ ले सकें I

(6) नवंबर 30,2006 को जो सच्चर कमिशन आया था और जो कमीशन ने रिकमेंडेशन किया था मुस्लमानों के लिए वो लागू होना चाहिए और सरकार बनते ही जस्टिस रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिश के तहत संविधान के मंजूरशुदा पिछड़े मुस्लिमों को हर स्तर पर आरक्षण लागू हो I

(7) दलित वस्ती सुधार योजना जैसी मुस्लिम वस्ती सुधार योजना भी लागू किया जाये I

(8) मदरसों को दीनी तालीम के साथ इंग्लिश ,हिंदी,और मुकामी भाषा जोड़ा जाए और उसको अनिवार्य किया जाये और भारत के हर स्कूल में उर्दू को हिंदी के जैसा अनिवार्य किया जाए I

(9) मेडीकल, इंजिनियरींग, फार्मसी, बी. टेक, एम. टेक के पढाई मे फीस में सहुलियत,एज्युकेशन के लिए स्कोलरशिप की आसान सुविधा,सभी स्कूल और कालेज के मुस्लिम बच्चों को स्कालरशिप, एजुकेशन डेवलपमेंट एम्प्लॉयमेंट में आबादी के अनुपात मुस्लिमों की हिस्सेदारी होना चाहिए I

(10) मुसलमानों की 50000 आबादी पर सरकारी स्कूल,अस्पताल,डाकघर प्रदान किया जाये I

(11) मुस्लिम महिलाओं को एजुकेशन में और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना में और सस्किए,निम्सस्किए संस्थाओ में 33 परसेंट हिस्सेदारी होना चाहिए, और पार्टी के संगठन में मुस्लिम महिला को 33 % नुमाईंदगी होना चाहिए I

(12) बेसहारा मुस्लिम बुजुर्गों का आश्रम बनना चाहिए और मुस्लिम आबादि में कम्युनिटि हॉल बनाए जाए I

(13) मुस्लिम नौजवानो को भी अपने रोजगार के लिए लोन और लइसेंस मिलना चाहिए I

(14) कानून के मकड़जाल में फंसे मुस्लिम नौजवानों की रिहाई हो और बेवजह मुस्लिम नौजवानो पर ज्यादती करने वालो पर फौरी सजा होना चाहिए ।

(15) देश भर मे कभी भी मजहबी दंगा फसाद नही होता हैं बल्की सत्ता पक्ष और विपक्ष का शक्ति परीक्षण होता है जो आम आदमी पर आजमाया जाता है.

(16)दंगा फसाद सुरू होने के पहले हमारे हाथ मे बहुत कुछ होता है मगर सुरू होने के बाद दुसरो के हाथ चला जाता है और हमारे हाथ मे कुछ नही रहता है.
अगर चाहते हो कि दंगा फसाद ना हो तो हर एलाके मे 10 लोग की टीम हो और टीम इतना नजदीक हो कि एक घंटा के अंदर आपस मे मिल सकें हम कुछ असान तारिका समझायेंगे और ज़रूरत पड़ने पर एलाके मे आकर सहयोग भी करेंगे,दंगा विरोधी बिल पास करके दंगे बंद होने का कानून होना चाहिए,दोषियों का फास्ट ट्रैक कोर्ट में 100 दिन के अंदर फैसला होना चाहिये ।

(17) मुसलमानों की सुरक्षा के लिए मुस्लिम पर अत्याचार अपराध के विरूद्ध कठोर दंड का प्रावधान किया जाना चाहिए I

(18) पशु व्यपारियों की जान माल की सुरक्षा होनी चाहिए I

(19) हुकुमती तरक्कीयाती पॉलीसी मे जहां मुसलिम को नजर अंदाज और रुकावट किया हुआ है उसके उपर क़ानूनी कार्यवाही होनी चाहिए ।

(20) पुलिस का फ़र्ज़ी चालान साबित होने पर पुलिस पर मुक़दमा चलाने और बे गुनाह को मुवावजा दिलाने का अख्तियार उसी कोर्ट को दिया जाए जिस में की मुकदमा चला हो I

(21) संसद, विधिमंडल, स्थानिक स्वराज्य संस्था, सहकार संस्था, राज्यसभा सदस्य, विधान परिषद सदस्य कोरपोरेशन सदस्य / क्षेत्र में मोकामी आबादी के अनुपात मुस्लिमों की हिस्सेदारी होना चाहिए I

(22) लोकसभा,विधानसभा,कर्पोरशन,पंचायत समिति इत्यादि चुनाव के समय वोटर लिस्ट से मुसलमानो का नाम रद्द हो रहा है उसपर पाबन्दी लगना चाहिए और दोषियों पर कानूनी करवाई होनी चाहिए I

(23) लोकसभा,विधानसभा,कर्पोरशन इत्त्यादि की चुनाव विभाग को काटकर अलग चुनाव विभाग बनाया जाता रहा है उसमें मुस्लिम बहुल इलाका को बाँट कर मुसलमानो को ना जीतने लायक बनाया जाता है इस साजिश को नाकाम करना चाहिए और दोषियों को सजा होना चाहिए I

(24) वक़्फ़ बोर्डो के पास जो मुक़दमे की सुनवाई का अधिकार है वो ख़त्म किया जाए और मुक़दमे की सुनवाई ट्रिब्यूनल कोर्ट में चलाया जाये I

(25) देश में नफरत फ़ैलाने वाली सभी तंजीमो को गैर कानूनी करार देकर उनको बंद किया जाना चाहिए,जो लोग दंगे करके सरकारी या पब्लिक संपत्ति को नुक्सान पहोचते हैं और उनकी संपत्ति कुर्क किया जाये I

(26) मीडिया का ज़हरीला तरीका और प्रोपगंडा जुर्म करार दिया जाना चाहिए और उनपर पाबन्दी लगाना चाहिये I

(27) कश्मीर और आसाम के मुस्लिम लोग के साथ इंसाफ किया जाये I

(28) जल विभाग, सुरक्षा विभाग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट विभाग, वन विभाग, चेकपोस्ट विभाग, बांधकाम विभाग, सड़क विकास विभाग, न्यूज़ एजेंसी, स्वास्थ्य विभाग, आयात निर्यात विभाग, शिक्षण संस्था विभाग, फ़ूड कारपोरेशन, महामंडल, रेलवे विभाग, सेना विभाग, एयर फोर्स विभाग, बैंक विभाग टैक्स विभाग, ,स्वच्छता विभाग, मौसम विभाग, कृषि विभाग ,चुनाव आयोग, रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय, न्यायालय के सभी विभाग, सभी जांच एजेंसी चाहे वो केंद्रीय हो या सूबाई, कोर्ट,शैक्षणिक संस्था और अन्निये सस्किए और निम् सस्किए में मोकामी आबादी के अनुपात मुस्लिमों की हिस्सेदारी होना चाहिए i

(29) केन्द्रीय और राज्य स्तरीय उन सभी काले कानून को हटाया जाना चाहिए जिस के तहत बरसों बरस आरोपी की जमानत नहीं मिलती है और आरोपी बिना जुर्म साबित हुए दशकों जेल में होते हैं,उनकी और उनके परिवार की ज़िंदगी तबाह होती है I

(30) शराब बहूत सी बुराइयों की माँ है इसलिए पूरे देश में शराबबंदी होना चाहिए और नशीले पदार्थ का वयापार करने वालों पर सख्त करवाई हो क्यों की इस से हमारी युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है I

(31) नफरत की बयान बजी करने वालो पर मुकदमा हो और सियासी समाजी बाइकाट होना चाहिए, और देश और समाज में फुट दाल कर हुकूमत करने की पार्था ख़तम किया जाये I

(32) नफरत फ़ैलाने वाले, ,दंगा,फसाद भड़काने वाले,शराब, जुवा ,नशीली पदार्थ का व्यापार करने वाले,बलात्कार करने वाले, वक्फ की प्रॉपर्टी हड़पने वाले या और किसी तरह का क्रिमिनल बैकग्राउंड रखने वाले मुसलमान को चुनाव में टिकट और पार्टी या सरकार में कोई वहदा नहीं दिया जाये बल्कि सिर्फ अच्छी छवि वाले मुसलमानो को चुनाव में,पार्टी और सरकार में वहदा दिया जाये I

(33) दूसरे समुदाय के लोग प्रशिक्षण शिविर में बम, बंदूक, तलवार और लाठी चलाना सीख कर खुलेआम मार काट रहे हैं,
(A)अल्पसंख्यक होने के कारण दूसरी कौम से जान को खतरा,
(B)घर की बहू बेटियों के लिए इज्जत का खतरा,
(C)घर और दुकान लुटे जाने या जलाए जाने का खतरा हैं,
अपनी आत्मरक्षा सबका अधिकार है इसलिए जहाँ मुसलमानों कि आबादी कम है वहाँ आत्मरक्षा के लिये लाइसेंसी हथियार दिया जाना चाहिए I

(34) यहूदी लॉबी से सम्बन्ध जोड़ना और मुस्लिम देश से सम्बन्ध तोडना हमारे देश के लिए घातक है इसलिए इसमें सुधार किया जाये I

(35) कुछ मुस्लिम देशो में राजनितिक दिक्कत है और उनकी दिक्कत के लिए उनके मामला में नहीं पड़ना चाहिए मगर फिलिस्तीन,म्यांमार में मुसलमानों की राजनिति से दूर का रिस्ता नहीं है और वो लोग मासूम हैं इसलिए हमारे देश को उनके साथ खड़ा होना चाहिए तो तुरंत उनको राहत मिल जाएगी और इस से हमारे देश की इज़्ज़त में इजाफा होगा I

इस पैकेज पर लिखित मुहायदा हो जिसमें गठबंधन के संयोजक और सभी पार्टीयों के राष्ट्रीय अध्यक्षो के दस्तख़त हो I

मजहबी और सियासी मुस्लिम लीडरो से गुजारिश है की मुस्लिम पैकेज के लिये 35 पैराग्राफ की एग्रीमेंट करने के बाद ही किसी पार्टी को सपोर्ट करो।

इस्माईल बटलीवाला 
(राष्ट्रीय कन्वेनर: पोलिटिकल यूनिटी कैंपेन)
Whatsapp . 9029341778 Mobile.9869569280,

Sunday, 12 January 2020

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*जागो हिंदुओ अब तो जागों!*
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*#CAA और #NRC हिंदुत्व के लिए नहीं हिंदुओ को मूर्ख बनाने के लिए हैं!*

*भारत की सरकार के पास पहले से ही किसी विदेशी  को नागरिकता देना या नागरिकता नहीं देना उसकी संपूर्ण सत्ता है,*
*और यह पुराने काननू के कारण ही आज भाजपा सरकारों के ही गुजरात के मुख्यमंत्री रूपानी बर्मा से, त्रिपुरा का मुख्यमंत्री बांग्लादेश से और उड़ीसा का मुख्यमंत्री नवीन पटनायक इंडोनेशिया से आये होने के बावजूद भारत के नागरिक बन गए थे!*
*#CAA/#NRC का लाने का असली मक़सद है नये विवाद से देश में आग लगाना और यह आग की गरमी से सत्ता बनाये रखना और देश को भयंकर लूटने का खेल जारी रखने का हैं!*
*यदि NRC लागू हुई तो बाहर होने वाले 14 करोड हिंदू ही होगे उसमें सबसे ज़्यादा मोदी के विरुध में मतदान करने वाले गरीब एंव पिछड़े वर्ग के बहुजन समुदाय के मतदाता ही होंगे, दूसरे जंगलों और खनिजों की रक्षा करनेवाले हिंदू आदिवासियों होंगे जिनकी #NRC की मदद से नागरिकता छीनकर प्राकृतिक संपत्तियों को लूट लिया जाएगा!*

*महा लुटेरे भाजपाइयों की यह सच्चाई अब हिंदू समाज के जागृत लोग समझ गए हैं!*
*इसीलिए सत्ता पर बने रहने 'गोदी' मीडिया की मदद से अपने मूर्ख 'अंधभक्तों' का ध्यान सच्चाई से भटकाने के लिए ठग फेंकू की गेंग देश जला रही हैं!*

*अब बिना सोचे समझे राजकीय हाथा बनकर नोटबंधि/GST/100%FDI/फ़सल विमा योजना/मेक इन इंडिया जैसी नौटंकियों को समर्थन करनेवाले....*

*अपने बुरे अनुभवों के बाद भी यदि आज हमारे संविधान के मूल्यों की हत्या करनेवाले #CAA और #NRC को समर्थन कर रहे हैं तो यह लोग अत्यंत पागल या राष्ट्रद्रोही ही हो सकते हैं!*

*यह रही उसकी कड़वी सच्चाई!*
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https://www.jagran.com/uttar-pradesh/meerut-city-praveen-togadia-said-if-nrc-is-implemented-14-crore-hindus-will-be-excluded-19911390.html?utm_source=JagranFacebook&utm_medium=Social&utm_campaign=Politics

Friday, 10 January 2020

दुनिया भड़के यहिडियों ने मुसलमानो के खत्म करने के लिये तमाम तैयार कर ली है, अब हमें करना है।

आज से हज़ार साल पहले यहूदियों ने पूरी दुनिया के मुस्लिम का सर्वे किया के किस-किस तरह के मुस्लिम हैं और उन्हें किस तरह बर्बाद करना है।

सर्वे के बाद उन्होंने 250 पेज की रिपोर्ट बनाई जिसमें उन्होंने मुस्लिमों को 4 कैटगरी में रखा।

1. "Fundamentalist"
परिभाषा:-  यह वो लोग होते हैं जो इस्लाम और क़ुरआन हदीस को हर क़दम पर रहनुमा मानते हैं। सिर्फ़ इस्लाम ही का सामाजिक (Social), आर्थिक (Economical), राजनीतिक (Political) व्यवस्था दुनिया में नाफ़िज़ करना चाहते हैं। यह लोग सोचने समझने वाले होते हैं। यह लोग हमारे (यहूदियों के) सबसे बड़े दुश्मन हैं।
इनका इलाज:- इनपर जितना हो सके दबाव डाला जाए, बदनाम किया जाये, इलज़ाम लगाया जाये, ताकि यह लोग अपना मक़सद भूल जाएं।

2."Traditionalists"
परिभाषा:- यह लोग रिवायती (बाप दादा के नक़्ल करने वाले) होते हैं । सोचने समझने का काम नहीं करते, दुनिया में क्या हो रहा है इन्हें उससे कोई मतलब नहीं। बस जो बाप दादा करते हुए आये हैं वही करते हैं।
इनकी तादाद बहुत ज़्यादा है। इन्हें अल्लाह का क़ानून नाफ़िज़ (लागू) नहीं करना यह लोग बस इबादत में मगन रहते हैं।
इसलिए हमें (यहूदियों को) इनसे कोई ख़तरा नहीं।
इनका इलाज:- यह जिस चीज़ में मगन हैं इन्हें उसी चीज़ में आपस में लड़वा दो फ़िरक़े के नाम पर, इनकी ताक़त ख़त्म हो जाएगी।

3."Modernists"
परिभाषा:- यह वो लोग हैं जो अपनी दुनिया बनाने में लगे रहते हैं। इन लोगों को अपने career, future, study, buisness के अलावा किसी से मतलब नहीं। सिर्फ एक रिवायत (परम्परा) के तौर पर इस्लाम को जानते मानते हैं।
यह लोग हमारे काम के हैं।
इनका इलाज:-  इनके लिए career, buisness इतना मुश्किल कर दिया जाये की यह लोग उसी में उलझ कर रह जाएं। और students को इस तरह पढ़ाया जाये की उसे उसका मज़हब एक पुराने लोगो की चीज़ नज़र आये और हमारी (यहूदियों की) मॉडर्न शिक्षा उसे अच्छी लगने लगे।


4. "Secularism"
परिभाषा:-  यह लोग बिलकुल हमारे (यहूदियों) जैसे होते हैं।
यह इस्लाम की विपरीत (opposite) ही बोलते हैं।
इन्हें अपने धर्म से कोई मुहब्बत कोई लगाव नहीं होता।
यह लोग हमारे बहुत काम के हैं।
इनका इलाज:- इन्हें कैसे भी करके अपने साथ लेकर चलना है चाहे वो उन्हें उसका तरीक़ा लालच हो या दबाव । इनके साथ रहने से बाकी धर्म के लोग इस्लाम के ख़िलाफ़ होने शुरू हो जाएंगे। 
  
Note:- कैटेगरी न. 1 को किसी भी कैटेगरी से मिलने न दिया जाये वरना पूरी यहूदी क़ौम को ख़तरा होगा। और लोगों को इस्लाम की अच्छाइयां नज़र आने लगेगी और हमारी दुनिया पे हुकूमत करने वाली चाल नाकाम होजाएगी।

मुझे यक़ीन है कि आप अपनी कैटेगरी पहचान गए होंगे। और मुझे ये भी यक़ीन है कि आप इस साज़िश को नाकाम करने में हमारा साथ देंगे।

Thursday, 9 January 2020

સમાજના નાગરિકો એ સમાજનું ધન છે કોઈપણ સમાજના વિકાસનો મોટો આધાર સમાજના નાગરિકોના વિકાસ પર છે.

         સમાજના નાગરિકો એ સમાજનું ધન છે કોઈપણ સમાજના વિકાસનો મોટો આધાર સમાજના નાગરિકોના વિકાસ પર છે.સમાજનો વિકાસ સમાજના વિસ્તાર અને કુદરતી સંપત્તિ થકી થતો નથી,સમાજના વિકાસનો આધાર સમાજની વસ્તીનું કદ અને નાગરિકોની ગુણવત્તા પર રહેલો છે.* *સમાજના નાગરિકો ની ગુણવત્તાનો આધાર સમાજ દ્વારા નિર્માણ કરેલ સુવિધાઓ જેવી કે આરોગ્ય સુવિધાઓ, શૈક્ષણિક સુવિધાઓ અને સાંસ્કૃતિક સુવિધાઓ જેવી બાબતો પર આધાર રાખે છે.* જે સમાજ દરેક પ્રકારની ભૌતિક સુવિધાઓથી સજ્જ છે તે સમાજના નાગરિકો ની ગુણવત્તા ઉચ્ચ કક્ષાની હોય છે. એ સમાજ દરેક ક્ષેત્રે આગળ હોય છે. 
   સમાજની તાકાતનું મૂલ્યાંકન સમાજના નાગરિકો ની બૌદ્ધિકતા અને સાક્ષરતા પર રહેલું છે. 
ડોક્ટરો, એન્જિનીયરો, શિક્ષકો, કેળવણીકારો, રમતવીરો,IAS/IPS અધિકારીઓ, ઉદ્યોગપતિઓ, વેપારીઓ, ખેડૂતો, કલાકારો અને કામદાર વર્ગ એ સમાજની શક્તિના સ્ત્રોત છે. તેમના થકી સમાજ શક્તિશાળી બને છે. દરેક સમાજ આ સ્ત્રોત ઊભા કરીને શક્તિશાળી બને છે.
   *સમાજના નાગરિકો, યુવાનો અને બાળકો એ સમાજની મૂડી છે.*  મૂડીને સાચવવાની અને વૃદ્ધિ કરવાની મહેનત થાય તો નફો  ઉમેરાઈ મૂડી મજબૂત બને.
     સમાજની મૂડીને સાચવવી અને તેનો વિકાસ કરવો એ સમાજના આગેવાનોની નૈતિક જવાબદારી છે.
પોતાના ધંધામાં લગાવેલ મૂડી પર મહેનત કરવાથી ધંધાનો વિકાસ થતો હોય તો સમાજની મૂડી  નાગરિકો, યુવાઓ અને બાળકો ની ગુણવત્તા પર ધ્યાન કેન્દ્રિત કરવામાં આવે તો સમાજ ચોક્કસ શક્તિશાળી અને વિકાસશીલ બની શકે છે ।
ઇન્શાઅલ્લાહ ....✍✍✍copy

कच्छ Demolition 2026 Riport।

कच्छ 2026 डिमोलिशन रिपोर्ट । सोशल मीडिया से तथ्य, घटनाक्रम और ज़मीनी चर्चाओं का संकलन .... साथियों,  इस रिपोर्ट को तैयार करने का...