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Thursday, 6 August 2020

लिंचिंग का अर्थ है भीड़ द्वारा पीट पीट कर मार दिया जाना.WhatsApp


भारत में आजकल यह बढ़ता जा रहा है,

हम सब को इसके बढ़ने के कारणों पर विचार करना चाहिए,

ताकि इसे रोका जा सके,

लिंचिंग कौन करता है,

लिंचिंग उस समुदाय के लोग करते हैं जिन्हें लगता है कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता,

इसलिए लिंचिंग हमेशा सत्ताधारी समुदाय के लोग करते हैं,

इस समय भारत की सत्ता द्वारा भारत के एक समुदाय हिन्दू को यह संकेत दिए जा रहे हैं कि यह सत्ता हिन्दुओं की है,

इसलिए लिंचिंग के मामलों में हिन्दू समुदाय के लोग शामिल पाए जा रहे हैं,

यह एक समुदाय को अपराधी बना दिए जाने की प्रक्रिया है,

इसके अलावा लिंचिंग के लिए घृणा का होना बहुत ज़रूरी है,

अगर कोई समुदाय घृणा से भरा हुआ ना हो तो वह किसी को पीट पीट कर मार ही नहीं सकता,

भारत में सत्ता पर बैठा हुआ दल भाजपा और उनका वैचारिक आधार संगठन राष्ट्रीय सेवक संघ हिन्दू समुदाय के भीतर मुसलमानों और ईसाईयों के खिलाफ नफरत भरने का काम लम्बे समय से लगातार कर रहा है,

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और उसके अन्य हिंदूवादी संगठन इस नफरत को जिंदा रखने के लिए मुसलमानों के खिलाफ लगातार दंगे करवाते रहते हैं,

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने मुसलमानों के विरुद्ध दंगे को राष्ट्र निर्माण जैसा पवित्र कार्य बना दिया है,

इसके साथ ही जब दंगा करके दंगाई नेता नरेंद्र मोदी और अमित शाह सत्ता पर बैठे,

उससे पूरे देश में यह सन्देश गया कि मुसलमानों के खिलाफ दंगा करना राष्ट्र निर्माण का काम है,

अगर आप ध्यान से देखें तो मुसलमानों को पीटने वाली भीड़ इस काम को बहुत पुन्य और शान का काम मानती है,

पीट पीट कर मारे जाने के बाकायदा वीडिओ बनाये जाते हैं और हिन्दुत्ववादी सोशल मीडिया ग्रुप में फैलाए जाते हैं,

इससे यह साफ़ हो जाता है कि यह माब लिंचिंग राजनैतिक फायदे के लिए जान बूझ कर करवाया जा रहा है,

इस के द्वारा बहुसंख्यक समुदाय यानी हिन्दू युवाओं को ज्यादा साम्प्रदायिक बनाया जा रहा है,

क्योंकि भाजपा तभी जीत सकती है जब हिन्दू युवा अधिक साम्प्रदायिक बन जाएँ,

माब लिंचिंग को सत्ताधारी दल द्वारा बढ़ावा दिए जाने का दूसरा कारण यह है कि भाजपा हर मुद्दे पर फेल हो रही है,

रोज़गार भयानक रूप से घट गए हैं, व्यापार चौपट हो चुका है, 

ऐसे में भाजपा किसी भी राजनैतिक बहस का जवाब देने की हालत में नहीं है,

इसलिए भाजपा देश में गंभीर राजनैतिक विचार विमर्श को समाप्त कर देना चाहती है,

इसलिए भाजपा ने सोशल मीडिया पर भी विरोधियों को लिंच करने के लिए गुंडों को नौकरी पर रखा है,

जो कोई भी भाजपा सरकार की नीतियों की समीक्षा करने की कोशिश करता हैं,

या कोई विमर्श शुरू करने की कोशिश करता हैं,

तो भाजपा के यह तनख्वाह खाने वाले गुंडे आकर गाली गलौज और ऊलजलूल बातें करके पूरे विमर्श को असम्भव बना देते हैं,

ठीक यही काम सड़कों पर भी किया जा रहा है,

यह भाजपा ब्रांड राजनीति है,

लिंचिंग भाजपा की सोच समझ कर बनाई राजनैतिक गतिविधी है,

इस लिंचिंग का फायदा यह है कि भाजपा पूंजीपतियों के फायदे के लिए मजदूर नेताओं पर अपने लिंच माब द्वारा हमले करवा सकती है,

लिंचिंग द्वारा विरोधी राजनातिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को डराया जा सकता है और ज़रूरत पड़ने पर मरवाया जा सकता है,

अमीर पूंजीपतियों, साम्प्रदायिक गुंडों, अमीरों की संसद और बिकाऊ मीडिया के गठजोड़ का यह नया राजनैतिक दौर है,

इससे निकलने के लिए समाज को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी,

अन्यथा यह वाली राजनीति समाज को बुरी तरह बाँट कर बहुत खून बहा सकती है,

पड़ोसी देश से युद्ध करवा सकती है और राजनैतिक प्रगति को बहुत पीछे ले जा सकती है,

लिंच माब एक दिन में तैयार नहीं होती है इसे लम्बे समय की मेहनत के बाद तैयार किया जाता है,

इसलिए जब भी आपके आसपास लोग किसी एक समुदाय के खिलाफ नफरत भरी बातें करें तो तुरंत उन्हें सही बात बताइये,

भाजपा और संघ का सामना विचारधार के स्तर पर ही किया जा सकता है,

गलत इतिहास के सामने सही इतिहास, नफरत के सामने प्यार और मारने के स्थान पर बचाने की बात कीजिये,

हमारे दौर के युवाओं को नफरत के रास्ते से बचा कर समझदारी के रास्ते पर लाना ही इस युग का सबसे बड़ा राजनैतिक काम है,

नमाज मनुष्य के शारिरिक शक्ति के लिये सबसे बेहतरीन योग.

बेशक योगा कई बीमारियों से जिस्म की हिफाज़त करता है और नमाज़ सबसे बड़ा योगा है। अगर रोज 5 वक़्त की नमाज़ सुकून और त्वज़्ज़ो के साथ सही तरीके से अदा की जाए तो कोई अलग से योगा करने की ज़रूरत नही पड़ेगी। नमाज़ में हमारे ज़िस्म के हर हिस्से की एक्सरसाइज होती है सुबह फ़ज़र से लेकर रात ईशा की नमाज़ तक। अल्लाह ने अपनी इबादत में भी इंसानों की भलाई छिपा रखी है बस इंसान अमल नही करता।

दिन में 5 बार नमाज़ से पहले वज़ु किया जाता है जिससे बॉडी सेनेटाइज होती है। नाक के अंदर पानी डाल जाता है जिससे फ़्लू का खतरा कम होता है।

नमाज़ में एक खास पॉइंट पर ही नज़र रखनी होती है जो मेडिटेशन का काम करती है।

रुकू की हालत में जिस्म 90 डिग्री पर मुड़ता है जिससे कन्धा, पेट,  कमर, गुर्दे और घुटने की बीमारियों में शिफा होता है, कैलोरी बर्न होती है पेट की चर्बी कम हिती है, गठिया रोग से हिफाज़त होती है।

सज़दे की हालत में पैर की उंगलियां मुड़ी हुई होती है जो बॉडी को एक्यूप्रेशर करती है फेफड़ों को आराम मिलता है,  खून ब्रेन तक पहुचता है जितना लम्बा सज़दा उतना दिमाग स्वस्थ रहेगा।

सलाम में सीधा बैठ कर गर्दन दोनो तरफ मोड़ने से माइग्रेन से हिफाज़त होती है।

दुआ की हालत में थोड़ी देर आंखे बंद होती है, नम होती है, आंखे फ्रेश हो जाती है। 

Tuesday, 4 August 2020

ALMPB Social Media Viral later 4 aug 2020 बाबरी मस्जिद के सिलसिले मे.


Da.05 Jul 2020 
   "बाबरी मस्जिद हमे माफ करना"

      बाबरी मस्जिद तेरी सर जमीन पर बुतपरस्ती की सुरुआत हमारी लीडरशिप की रेहबरी को लेकर ये तारीख  हमेशा हमे याद दिलाती रहेगी हम मजबूर हे सौदागरों ने तेरी अजमत का सौदा किया हे बाबरी मस्जिद हमे माफ करना.

     आज की तारीख़ आने वाली नशलों और आज के डोर मे सोचने और समझने वाले हक परस्त  मुसलमानों को हमेशा बाबरी की एतिहासिक तारीख याद रहेगी.

     हमारी नाकारा, फिरका परस्त ,सुद परस्त और सुस्त , सौदागर सहूलत वाली लीडरशिप पर हमेशा सवाल करने पर मजबूर करेगी.


     बाबरी मस्जिद को लेकर सबसे पेहले जिम्मेदार हमारी धार्मिक लीडरशिप जिम्मेदार हे, उसके बाद हमारी पोलिटिकल लीडरशिप दुसरे नंबर पर जिम्मेदार हे, और इस के बाद हमारी सामाजिक लीडरशिप तिसरे नंबर पर जिम्मेदार हे, फिर अवाम बाबरी मस्जिद की सर जमीन पर बुतपरस्ती को लेकर जिम्मेदार हे.
ओल इन्डिया मुस्लिम प्रसनल लो बोर्ड.

ता. 04 Aug 2020 social media letar 


बाबरी मस्जिद  थी  और हमेशा रहेगी  गास्बाना  क्बजे से हक्कित खतम नही होती .
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला जरुर दिया हे मगर इन्साफ को शर्मसार किया हे.

नई देहली 4 aug 2020 आज जब के बाबरी मस्जिद के मकाम पर एक मंदीर की बुनियाद रखी जा रही हे. ओल इन्डिया मुस्लिम प्रशनल लो बोर्ड अपने डेरीना मौकुफ दोहराना जरुरी समझता हे, शरीयत की रोशनी मे जंहा एक बार मस्जिद काईम हो जाती हे, वो ता कयामत मस्जिद रेहती हे, लिहाजा बाबरी मस्जिद कलभी मस्जिद थी आज मस्जिद हे,और  इन्शाअल्लाह आइंदा मस्जिद ही रहेगी, मस्जिद मे मुर्तीया़ रख देने से पुजा पाथ सुरु कर देने से या एक लंबे अरसे तक नमाज पर रोक लगा देने से मस्जिद की हेसियत खतम नही होती ओल इन्डिया मुस्लिम प्रशनल लो बोर्ड के जनर्ल सेक्रेटरी  हजरत मोलाना मुहमद वली रेहमानी ने अपने एक  प्रेश बयान मे कहा हे के हमारा हमेशा से ये मौकुफ रहा हे के बाबरी मस्जिद कीसी मंदिर हिंदू इबादतगाह को तोर कर नही बनाइ गइ अल्लह दुर्रिल्लाह सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले मे  (नवेंबर 2019)  हमारे इस मौकुफ की तसदीक़  करदी हे सुप्रीम कोर्ट येभी कहा हे के बाबरी मस्जिद के निचे खुदाई मेजो आसार मिले वो 12 मी सदी के कीसी इमारत के थे बाबरी मस्जिद की तामिर से  ૪०० साल कब्ल लिहाजा किसी मंदिर को तोडकर मस्जिद नही बनाइ गइ सुप्रीम कोर्ट ने साफ तोर पर कहा के बाबरी मस्जिद मे 22 दिसम्बर  1949 की रात तक नमाज होती रही हे सुप्रीम कोर्ट का येभी मानना हे 22 दिसम्बर 1949  मे मुर्तियों का रख्खा जाना एक गैर कानूनी गैर दशतुरी अमल था  सुप्रीम कोर्ट येभी मानता हे  के  ६ दिसम्बर 1992  को बाबरी की शहादत एक गैर कानूनी गैर दस्तुरी और मुज़रिमाना फआल था अफसोस इन तमाम वाजेह हकाइद को तसलिम करने के बावजुद कोर्ट एक इंतिहाइ गैर मुंसिकाना फैसला दिया मस्जिद की जमीन उन लोगो के हवाले करदी जिन होने मुजरिमाना तरिका पर उसमे मिर्तियां रखी और उसके सहादत के मुरतकिब हुये. .


बोर्ड के जनर्ल सेक्रेटरी ने आगे कहा चुंके अदालत अजमी मुल्के आला तरीन अदालत हे लिहाजा उसके हतमी फैसले को तसलीम करने के अलावा कोइ चारा नही हे ता हम हम ये जरुर कहेंगे के ये जालिमाना और गैर मुन्सिफाना  फैसला हे जो अक्सरियत जएम मे दिया गया हे सुप्रीम कोर्ट  09 नवेंबर 2019 को फैसला जरुर दिया हे मगर इन्साफ को स्रमशार किया हे. अल्हमदुरिल्लाह हिंदुस्तानी मुसलमाने के नुमाइंदा इसतिमाइ प्लेटफॉर्म  ओ.इ.मु.प.बोर्ड  और दिगर फिरको मे ने भी अदलती लडाई कोइ दकिका नही उथा रख्खा यंहा येभी केहना जरुरी हे के हिंदतो एनासर की पुरी तहरिक जुल्म जहेर दुंस  धांधली कजीब और इफतिराह पर बमनी तेहरिर थी ये सरासर एक सियासी तहरिक थी जिसका मजहब या मजहबी तालिमात से ताअलुक नही था जुठ और जुल्म पर मबनी इमारत कभी बी पाइदार नही होती . . . .

जनर्ल सेक्रेटरी साहाब ने अपने बयान मे आगे कहा के हालत चाहे जितने खराब हो हमे होशला नही हारना चाहिये और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिये. मुखालिफ हालात मे जिनेका मिजाज बनाना चाहिये हालात हमेशा यकशा नही रेहते अल्लाह ताआला कुरुन मजिद इरशाद फरमाता हे वतिल्कल अय्यामु लिहा नुदाविलु हा बयन्नाश येतो जमाना के नसिब व फराज  हे जिनहे हम लोंगों के दरमियान गरदिश देते रेहते हे. लिहाजा हमे नतो मायुश होना हे ना हालात के आगे सुपुर्ट होना हे हमारे समाने इस्तंबुल की आया सुफिल मस्जिद की मिशाल इस आयत की मुह पर बोलतिो तस्वीर हे  मुसलमानाने हिंद अपिल करता हु वो सुप्रीम कोर्ट के फैसला और मस्जिद की जमीन पर मंदिर की तामिर से हरगिज बी दिल बर्दाश्ता ना हो हमे येभी याद रखना चाहिये तौव्हिद का अलमी मरकज और अल्लाह का घर खानाए काबा भी एक लंबे अरसे तक सिर्को बुत परस्ती का मरकज़ बना रहा बिल आखीर फतहे मक्का के बाद प्यारे नबी स.अ.व. के जरिये वो दौ बारा मरकजे तौहव्हिद बना इन्शाअल्लाह हमे पुरी तव्वकु हे सिर्फ बाबरी मस्जिद ही नही ये पुरा चमन नगए तौव्हिद से माअमुर होगा हमारी जिम्मेदारी एसे नाजुक मोकेपर अपनी गलतियो से तौबाह करे अखलक और किरदार को सवारे घर और समाज दिनदार बनाये अपने होसले के साथ मुखालिफ हालत आगे बडने का फैसला करे.

Monday, 3 August 2020

सैनिटाइजर लगे हाथों से खाना खतरनाक हो सकता हे परहे पुरी खबर .

सैनिटाइजर लगे हाथों से खाना खतरनाक या सेफ? जानें सही तरीका.

इन दिनों लोग धड़ल्ले से सैनिटाइजर का कर रहे हैं प्रयोगसैनिटाइजर खरीदने से पहले जाने WHO की गाइडलाइनकोरोना वायरस का संक्रमण दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है. लोग जानते हैं कि इसे साफ-सफाई से ही हराया जा सकता है. इसलिए हाल के दिनों में सैनिटाइजर की खपत काफी बढ़ गई है. लोग धड़ल्ले से इसका प्रयोग कर रहे हैं. बिना यह जाने कि इसका आपके स्वास्थ्य पर क्या असर होगा? लोगों को यह तक पता नहीं है कि सैनिटाइजर के प्रयोग का सही तरीका क्या है. इस लेख के जरिए aajtak.in की कोशिश है कि लोगों के बीच सैनिटाइजर को लेकर सही जानकारी आप तक पहुंचाई जाए. ADS क्या आप जानते हैं कि बाजार में मिलने वाले सभी सैनिटाइजर प्रभावी नहीं हैं? तो ऐसे में सवाल उठता है कि सैनिटाइजर खरीदने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पूर्व सचिव, इंफेक्शन एक्सपर्ट और दिल्ली मेडिकल काउंसिल की साइंटिफिक कमेटी के चेयरमैन डॉक्टर नरेंद्र सैनी बताते हैं कि लोगों को अभी यह नहीं पता है कि सैनिटाइजर इस्तेमाल करने या खरीदने को लेकर WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) की सही गाइडलाइन क्या है? कभी कोरोना के संपर्क में नहीं आए, फिर शरीर में कैसे मिल गई इम्यूनिटी? डॉक्टर सैनी के मुताबिक साबुन और पानी से हाथ धोना सबसे अच्छा अभ्यास है. अगर आपके आस-पास साफ पानी मौजूद है तो फिर सैनिटाइजर के प्रयोग से बेहतर होगा कि आप अपने हाथों को साफ पानी से धोएं. सैनिटाइजर का प्रयोग तभी करें, जब ऐसा कर पाना मुमकिन ना हो. ज्यादातर लोग सैनिटाइजर हाथ में लेते हैं और 2-3 सेकेंड मल कर समझते हैं कि हाथ साफ हो गया. जबकि यह सही सोच नहीं है. सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते हुए इसे कम से कम 10-12 सेकेंड तक अपने हाथों पर मलें. आपके हाथों के गस्से-गस्से तक सैनिटाइजर पहुंचना चाहिए, तभी यह वायरस को हटाने में प्रभावी हो सकता है. जैसा कि WHO की गाइडलाइन भी कहती है कि हथेलियों को आपस में रगड़ें. दोनों हाथों की उंगलियों को जोड़कर मलें. अंगूठों को अच्छे से हल्के-हल्के रगड़ना न भूलें. उन्होंने सैनिटाइजर की मात्रा को लेकर कहा कि मटर के दाने जितना इस्तेमाल करने से कुछ नहीं होगा. क्योंकि लोगों के हाथों के आकार अलग-अलग होते हैं. इसलिए सही तरीका है कि सैनिटाइजर चुल्लू भर होना चाहिए. मात्रा में कहें तो 5 एमएल से ज्यादा. इसके साथ ही सैनिटाइजर इस्तेमाल करते हुए आपके हाथ दिखने में साफ सुथरे होने चाहिए. ऐसा नहीं कि आपके हाथ में पेंट या मिट्टी लगी है और आपने 5 एमएल सैनिटाइजर इस्तेमाल कर सबकुछ साफ कर लिया. अनलॉक-3 में खुलेंगे जिम और योगा सेंटर, जरूरी होंगे ये नियम? डॉक्टर सैनी ने कहा कि सैनिटाइजर खरीदते हुए यह सुनिश्चित करें कि उसमें 60-70 प्रतिशत एल्कोहल की मात्रा हो. वो भी ईथाइल या आइसोप्रोपाइल एल्कोहल होना चाहिए. इससे ज्यादा मात्रा भी ठीक नहीं है. सैनिटाइजर लगे हाथों से खाना खतरनाक हो सकता है. क्योंकि उसमें भारी मात्रा में एल्कोहल होता है, जो आपकी किडनी, लीवर और दिल को प्रभावित कर सकता है. सैनिटाइजर लगाने के 20 सेकेंड बाद ही खाना शुरू करें. इतनी देर में वो भाप बन जाता है. सैनिटाइजर कितने देर तक प्रभावी होता है? इस सवाल के जवाब में डॉक्टर सैनी ने कहा कि सैनिटाइजर लगाने तक. यानी कि जब आपने सैनिटाइजर से हाथ साफ किया तभी तक के विषाणु खत्म होते हैं. इस्तेमाल के 20 सेकेंड बाद अगर आपने फिर कोई सामान छुआ है तो आपको फिर से हाथ साफ करना होगा. उन्होंने बताया कि बार-बार सैनिटाइजर का प्रयोग करना भी ठीक नहीं है. इसलिए कोशिश ज्यादा से ज्यादा बार हाथ धोने की होनी चाहिए. क्या एल्कोहल पीने वालों में कोरोना का डर कम होता है? इस सवाल के जवाब में डॉक्टर सैनी ने कहा कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है. क्योंकि विषाणु जब आपके शरीर में घुसता है तो वो नली के अंदर बैठा नहीं रहता है. वो कोशिका के अंदर घुस जाता है. दूसरी बात पीने वाले एल्कोहल में उसकी मात्रा विषाणु को खत्म करने के लिहाज से बहुत कम होती है. क्योंकि अगर आपके शरीर में एल्कोहल की मात्रा बहुत ज्यादा होगी तो फिर हार्ट या किडनी फेल्योर हो सकता है. इसलिए लोगों के बीच में शराब को लेकर बहुत बड़ी गलतफहमी है. अयोध्या: प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए खास कैंप लगा कर की जा रही कोरोना टेस्टिंग सैनिटाइजर इस्तेमाल करते हुए इन दस बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी 1. सैनिटाइजर का इस्तेमाल साफ दिखने वाले हाथों में ही करें. 2. सैनिटाइजर में 60-70 प्रतिशत ईथाइल या आइसोप्रोपाइल एल्कोहल हो. 3. हाथ साफ करते हुए WHO की गाइडलाइन को ध्यान में रखें. 4. 15-20 सेकेंड तक हाथ को रगड़े, सभी हिस्से तक यह पहुंचना चाहिए. 5. हैंड सैनिटाइजर को प्राथमिकता बिल्कुल ना बनाएं. 6. साफ पानी से हाथ धोने के बाद सैनिटाइजर का इस्तेमाल ना करें. 7. सैनिटाइजर की मात्रा का ख्याल रखें. 8. अपने मुंह पर सैनिटाइजर का इस्तेमाल ना करें 9. सैनिटाइजर का इस्तेमाल उन्हीं जगहों पर करें, जहां हाथ धोने की व्यवस्था ना हो. 10. साबुन-पानी से हाथ धोना ज्यादा प्रभावी है, इसलिए जरूरत के हिसाब से ही सैनिटाइजर का प्रयोग करें.

Sunday, 2 August 2020

लीडरशिप के लिये जागृति लाना जरुरी हे.

बेहतरीन लीडरशिप  परिवार, समाज  और किसीभी  देश के लिये  कैसी होनी  चाहिये?
कीसी भी परीवार, समाज या देश को प्रगती के पंथ पर ले जाने के लिए एक अच्छे लीडर का होना बेहद आवश्यक है।
                    
अच्छा लीडर वहीं इन्शान बन सकता है जीस के ख्वाब बुलंद हो और वह भी अपने स्वार्थ के लिए न हो यानी खूदगर्ज न हो अपने आप में समाज और देश की सकारात्मक सोच के साथ सेवा करने का जज्बा रखता हो और निस्वार्थ सेवा भाव से लोगों को और समुदायों को एक साथ जोड़ ने की सलाहीयत रखता हो लोगों के हितों के लिए काम करें सत्ता के लालच में नहीं बल्कि लोगों के दुःख दर्द बांटते हुए लोगों की आवाज बनें
                       वह अपने खौफ पर काबू पाने वाला इस का मतलब की अपने इरादों का मजबूत हो, अपने दिल की आवाज सूनने वाला हो क्योंकि एक अच्छे लीडर में चेलेंज को स्वीकार कर उस पर काबू पाने का हुनर भी चाहिए क्योंकि लीडर बनना इतना आसान नहीं आपको काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है बाज वक्त लोग आपका मजाक भी उड़ाते हैं जो लोग दो मिनट पहले आपके लिए जिन्दाबाद के नारे लगाते हैं वहीं लोगों को आपके लिए मुर्दाबाद के नारे लगाते ने भी देर नहीं लगती इस लिए एक अच्छे लीडर को लोगों के कहने पर नहीं जाना लोगों का क्या उनका तो काम ही आलोचना करते रहना है इस लिए आप हमेशा अपने दिल की सोचे और वही करें जो आप का दिल चाहे मुश्किल घड़ी में हिम्मत ना हारे बल्कि संघर्ष करते हुए आगे बढ़ते रहे क्योंकि जो गीर कर उठने का हूनर रखता है उस की ताकत दुगनी हो जाती है एवरेस्ट पर चढ़ने वाला अगर उस की उंचाई देखकर डर जाये तो क्या वह एवरेस्ट सर कर पायेगा इस लिए याद रहे अपने दिल से खौफ को नीकाल दे इतिहास गवाह है बुजदिल इन्शान कभी एक अच्छा लीडर नहीं बन सकता अच्छा लीडर बनने के लिए चट्टानों से टकराने का होंसला चाहिए.

                      अच्छा लीडर हमेशा सच बोलने वाला होना चाहिए क्योंकि सच में वह ताकत होती है कि सच्चा इन्शान जहां खड़ा हो जाए वहां इन्कलाब ला देता है और सच्चे के साथ अल्लाह की भी मदद हो जाती हैं.
                        आखरी बात यह की अच्छा लीडर इन्शाफ करने वाला हो जो इन्साफ पसंद होगा वह लोगों के साथ भी इन्साफ करेगा और यकीन मानीये अगर आप इन्साफ पसंद होंगे तो लोगों को आपके साथ जूडने में देर नहीं लगेगी
                        कुल मिलाकर हमारा रहबर ऐसा होना चाहिए कि जो हमेशा बुलंद ख्वाब देखता हो जो की खूद के स्वार्थ के लिए न हो, अपने खौफ पर काबू पाने वाला हो, सच्चा हो और इन्साफ करने वाला हो
                      यह मेरी अपनी नीजी सोच है जरूरी नहीं कि सब इस बात से सहमत हो.

                   अमीर मलेक
          राष्ट्रीय मुस्लिम महासभा
             खंभात तालुका अध्यक्ष

corona kal ki aethik mandi

દુનિયાભરમાં ભારતના લગભગ 2,81,98,352 લોકો છે. જે પાસપોર્ટ સાથે દુનિયાના અલગ અલગ દેશોમાં રહે છે.

યુનાઇટેડ અમિરાતમાં 34લાખ;
સાઉદી અરેબિયામાં 25,94,947;
કુવૈતમાં   10,29,861; 
ઓમાનમાં 7,81,141; 
કતારમાં  7,45,775;
બેહરીનમાં 3,26,658;
કુલ મળીને 89,03,526 ભારતીય લોકો અરબ વર્લ્ડમાં કામ કરે છે.

અમેરિકામાં રહેતા લોકોની સંખ્યા સાડા ચાર લાખ છે.
બ્રિટનમાં લગભગ 17,64,000
સિંગાપોરમાં 6,50,000
મલેશિયામાં 2,27,950
ઈટાલીમાં 2,03,000
જર્મનીમાં 1,85,000
ફિલિપિન્સમાં1,20,000  ભારતીય લોકો રહે છે.

2018 ના યુનાઈટેડ માઇગ્રેશન રિપોર્ટ મુજબ;
689બિલિયન ડોલર માત્ર માઇગ્રન કમાતા હતા.
તેમા સૌથી વધુ ભારતીય કમાતા હતા જે લગભગ 1.6 બિલિયન ડોલર જેટલું.

2020 ના રિપોર્ટ મુજબ,
પાછલાં વર્ષે દુનિયાના તમામ માઇગ્રેન વર્કરની લગભગ 714 બિલિયન ડોલરની કમાણી હતી.
જે ઘટીને 572 બિલિયન ડોલર થઈ ગઈ.

અમેરિકમાં 2020 માં 370લાખ નોકરીઓ જતી રહેશે. તેના વિવિધ ફિલ્ડમાં કામ કરતાં લોકોની સંખ્યા આ મુજબ છે:
ક્લોથિંગ એન્ડ રિટલ સેક્ટરમાં 65લાખ વર્કર 
સપોર્ટ એન્ડ એકૉમેડેશન સર્વિસમાં 58લાખ
ઓટોમોબાઇલ સર્વિસમાં 44લાખ
એજ્યુકેશન ફિલ્ડમાં 37લાખ
ટ્રાવેલ ફિલ્ડમાં 32લાખ
મેમ્બરશીપ એસોસિયેશન એન્ડ ઓર્ગેનાઇઝેશનમા 30લાખ
સ્પોર્ટ્સ એન્ડ એન્ટરટેઇનમેન્ટશિપમાં 20લાખ
રિયલ સ્ટેટમાં 14લાખ જેટલા વર્કર્સ કામ કરતા હતા.જેમા સૌથી વધુ ભારતીય છે.

બાંગ્લાદેશમાં લગભગ 10000 ભારતીયો કામ કરે છે.

Saturday, 1 August 2020

जो हमारे हिन्दू भाई कुर्बानी करने पर सवाल उठाते हैं उन के लिए खास.

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▪️📜📜 *अल - बलाग* 📜📜▪️
▪️  ✍️ ⁩ *अली बारडोली वाला* ▪️
          الحمد لاهله و الصلاة و السلام على اهلهما
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▪️ हिन्दू धर्म और जानवर को मारना▪️
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जो हमारे हिन्दू भाई कुर्बानी करने पर सवाल उठाते हैं उन के लिए खास.
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1 👉 राम जी के पिता दशरथ भी शिकार के लिए जाया करते थे और एक दिन गलती से पानी पीता हुआ हाथी समझकर उन्होंने सरवन कुमार को अपने तीर से मार डाला अब सवाल ये उठता है क्या जंगल में शांति से पानी पीता हुआ हाथी हिंसक हो सकता है।

Reference

 *(वाल्मीकि रामायण जगदीश्वरानंद सरस्वती अयोध्या कांड,48/9-15)*

2 👉सीता जी के कहने पर राम हिरण को पकड़ने गए और जब हिरन ना पकड़े गए तो उन्होंने हिरण को जान से मारने के लिए तीर चलाया यहां भी वह सवाल उठता है कि भला हिरण हिंसक कैसे हो सकता है।

Reference

*(वाल्मीकि रामायण जगदीश्वरानंद सरस्वती अरण्यकांड 27/7-8)*

3 👉राम जी और लक्ष्मण जी दोनों ने मिलकर 4 किस्म के महा मुर्गों का तीर से प्रहार करके वध कर दिया।

Reference

 *(वाल्मीकि रामायण गीता प्रेस अयोध्या कांड 52/102)*

4 👉 साधु के भेष में रावण को सीता ने कहा कि उनके स्वामी आते होंगे  और जंगली सूअर को मारकर खाना लाते होंगे।

Reference

*( वाल्मीकि रामायण गीता प्रेस अरण्यकांड 47/23,24)*

5 👉 राम की सेना में निषाद लोगों को मुर्ग और मांस खाने को दिया गया।

Reference

*(वाल्मीकि रामायण गीता प्रेस 91/70)*

6 👉रामायण काल में पशु हत्या को बड़ी चीज नहीं थी असवा महंगा यज्ञ में राजा दशरथ ने कई पशुओं की बलि दी थी।

Reference

*( वाल्मीकि रामायण गीता प्रेस बाल कांड सर्ग ,14)*
 7 👉और यह बात कोई वेद विरुद्ध नहीं है शतपथ ब्राह्मण जो मध्याधीन वेद का ब्राह्मण ग्रंथ है मैं भी अश्वमेघ में पशु हत्या के बारे में लिखा है।

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*(शतपथ ब्राह्मण 13/5/2/1,2)*

8 👉 और वैदिक कोष में भी यही चीज है कि आव मेघ में 300 पशुओं की हत्या किया जाता है।

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*(वैदिक कौश पेज 29)*

9 👉 और हिंसक पशु सिर्फ मांस खाने वाले नहीं होते बल्कि घास खाने वाले भी होते हैं और उन दोनों को मारने का आदेश है और जो रूके उन लोगों को हिंसक जानवरों के मुंह में फेंकने का आदेश है|

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 *(यजुर्वेद दयानंद भाषा 10 46 14))*

10 👉रामायण के अनुसार राम जी इंदिरा के तुल्य है।

 और ऋग्वेद संयम भाषा के अनुसार इंद्रा15 से 20 सांड और बेल पकाकर खा खा कर मोटा होता हैं।

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 *(ऋग्वेद संयण भाष्य 10/ 86/14)*
👉 मैने सिर्फ कॉपी पेस्ट किया है 
बली प्रथा माँन्स भक्षण को कैसे प्रचलन.मे लाया गया निचे उदाहरण निये गये आये जानते हैं निम्न श्लोकों के माध्यम से 

ऋग्वेद के निम्न मंत्र को देखिए-
उक्ष्णो   हि    मे   पंचदश   साकं   पचन्ति   विंशमित्।
उताहमद्मि पवि इदुभा कुक्षी पृणन्ति में विश्वस्मादिन्द्र उत्तरः।।
(ऋग्वेद, 10-86-14)

भावार्थ – मेरे लिए इंद्राणी द्वारा प्रेरित यज्ञकर्ता लोग 15-20 बैल मार कर पकाते हैं, जिन्हें खाकर मैं मोटा होता हूँ। वे मेरी कुक्षियों को भी सोम रस से भरते हैं।
यजुर्वेद के एक मंत्र में पुरुषमेध का प्राचीन इतिहास इस तरह प्रस्तुत किया गया है।
देवा यद्यज्ञं तन्वानाऽ अवध्नन् पुरुषं पशुम।
(यजुर्वेद, 31-15)

भावार्थ – इंद्र आदि देवताओं ने पुरुषमेध किया और पुरुष नामक पशु का वध किया।
अथर्ववेद में स्पष्ट ‘ाब्दों में पांच प्राणियों को देवता के लिए बलि दिए जाने योग्य कहा है –
तवेमे पंच पशवो विभक्ता गावो अश्वाः पुरुषा अजावयः।
(अथर्ववेद, 11-29-2)
भावार्थ – हे पशुपति देवता, तेरे लिए गाय, घोड़ा, पुरुष, बकरी और भेड़ ये पांच पशु नियत हैं।

मनुस्मृति जो स्वामी दयानंद के चिंतन का मुख्य आधार रही है उसमें न केवल मांस भक्षण का उल्लेख और संकेत है, बल्कि मांस भक्षण की स्पष्ट अनुमति दी गई है। मनुस्मृति में मांस भक्षण की अनुमति के साथ मांस भक्षण की उपयोगिता और महत्व भी बताया गया है –
यज्ञे वधोऽवधः।
(मनु0, 5-39)
भावार्थ – यज्ञ में किया गया वध, वध नहीं होता।

या वेदविहिता हिंसा नियतास्ंिमश्चराचरे।
अहिंसामेव तां विद्याद्वेदाद्धर्मो हि निर्बभौ।।
(मनु0, 5-44)
भावार्थ – जिस हिंसा का वेदों में विधान किया गया है, वह हिंसा न होकर अहिंसा ही है, क्योंकि हिंसा, अहिंसा का निर्णय वेद करता है।

एष्वर्थेषु पशून्हिसन्वेदतत्त्वार्थविद्द्विजः।
आत्मानं च पशुं चैव गमयत्युत्तमां गतिम्।।
(मनु0, 5-42)
भावार्थ – वेद-कर्मज्ञ द्विज यज्ञ-कर्म में पशु वध करता है तो वह पशु-सहित उत्तम गति को प्राप्त करता है।
उष्ट्रवर्जिता एकतो दतो गोऽव्यजमृगा भक्ष्याः।
(मनु0, 5-18)
भावार्थ- ऊंट को छोड़कर एक ओर दांतवालों में गाय, भेड़, बकरी और मृग भक्ष्य अर्थात् खाने योग्य हैं।
‘वभिर्हतस्य यन्मांसं ‘ाुचि तन्मनुरब्रवीत।
क्रव्याöिश्च हतस्यान्यैश्चाण्डालाद्यैश्च दस्युभिः।।
(मनु0, 5-134)
भावार्थ- मनु के अनुसार, कुत्तों द्वारा पकड़े गए मृग, ‘ोरों द्वारा खाया गया कच्चा मांस, चांडाल व चोरों द्वारा मारे गए मृग का मांस शुद्ध है।
दौ मासौ मत्स्यमांसेन त्रीन्मासान् हारिणेन तु।
औरभ्रेणाथ चतुरः ‘ााकुनेनाथ पत्र्च वै।।
(मनु0, 3-269)
भावार्थ- विधि-विधान के द्वारा प्रदत्त मछली के मांस से मानव-पितर दो महीने तक, मृग के मांस से तीन महीने तक, भेड़ के मांस से चार महीने तक, पक्षियों के मांस से पांच महीने तक तृप्त संतुष्ट होते हैं।
“ाण्मासांश्छागमांसेन पार्षतेन च सप्त वै।
अष्टावैणेस्यमांसेन रौरवेण नवैव तु।।
(मनु0, 3-270)
भावार्थ- बकरे, चित्रमृग, भेड़ व रूरूमृग के मांस से क्रमशः सात, आठ और नौ महीने तक मानव-पितर तृप्त-संतुष्ट रहते हैं।
दशामासांस्तु तृप्यन्ति वराहमहिषामिषैः।
‘ाशकूर्मयोस्तु मांसेन मासानेकादशैव तु।।
(मनु0, 3-271)
भावार्थ- सूअर और भैंस के मांस से मानव-पितर दस महीने तक संतृप्त रहते हैं और खरगोश व कछुए के मांस से ग्यारह महीने तक।

महाभारत में आया है –
गव्येन दत्तं श्राद्धे तु संवत्सरमिहोच्येत।
(अनुशासन पर्व, 88-5)
भावार्थ- गौ के मांस से श्राद्ध करने पर पितरों की एक साल के लिए तृप्ति होती है।
महाभारत में रंतिदेव नामक एक राजा का वर्णन मिलता है जो गोमांस परोसने के कारण यशस्वी बना। महाभारत, वन पर्व में आता है –
राज्ञो महानसे पूर्व रन्तिदेवस्य वै द्विज,
द्वे सहस्रे तु वध्येते पशूनामन्वहं तदा,
अहन्यहनि वध्येते द्वे सहस्रे गवां तथा,
समांसं ददतो ह्यन्नं रन्तिदेवस्य नित्यशः,
अतुला कीर्तिरभवन्नृपस्य द्विजसत्तम,
(वनपर्व 208-8,10)
भावार्थ- राजा रंतिदेव की रसोई के लिए दो हजार पशु काटे जाते थे। प्रतिदिन दो हजार गाय काटी जाती थी। मांस सहित अन्न का दान करने के कारण राजा रंतिदेव की अतुलनीय कीर्ति हुई।

उक्त से कमअक़्ल व्यक्ति भी समझ सकता है कि महाभारत काल में गोवध और गोमांस भक्षण सराहनीय कार्य था न कि निंदनीय।
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण में भी मांस भक्षण का स्पष्ट उल्लेख है। निम्न ‘लोक देखिए-
जब भरत सेना सहित भरद्वाज मुनि के आश्रम में जाते हैं तो भरद्वाज मुनि के आश्रम में भरत का सेना सहित मृग, मोर और मुर्गों के मांस से स्वागत सत्कार होता है।
वाप्यो मैरेयपूर्णाश्च मृष्टमांसचयैर्वृताः।
प्रतप्तपिठरैश्चापि मार्गमायूरकौक्कुटैः।।
(अयोध्या कांड, 91-70)
भावार्थ – भरत की सेना में आये हुए निषाद आदि निम्न वर्गों के लोगों की तृप्ति के लिए वहां मधु से भरी हुई बावड़ियां प्रकट हो गई थी तथा उनके तटोंपर तपे हुए पिठर (कुण्ड) में पकाये हुए मृग, मोर और मुर्गाें के स्वच्छ मांस भी ढेर के ढेर रख दिये गये थे। जब रावण सीता के हरण की नीयत से साधु का वेष बनाकर वन में सीता के पास जाता है तो सीता अपना परिचय देते हुए रावण से राम के विषय में बतलाती है-
रुरून् गोधान् वराहांश्च हत्वाऽ ऽदायामिषं बहु।।
स त्वं नाम च गोत्रं च कुलमाचक्ष्व तत्त्वतः।।
एकश्च दण्डकारण्ये किमर्थ चरसि द्विज।।
(अरण्यकांड, 47-23, 24)
भावार्थ- ‘रुरू, गोह और जंगली सूअर आदि हिंसक पशुओं का वध करके तपस्वी जनों के उपभोग में आने योग्य बहुत सा फल-मूल लेकर वे अभी आयेंगे। (उस समय आपका विशेष सत्कार होगा)। ब्रहान्! अब आप भी अपने नाम गोत्र और कुल का ठीक-ठीक परिचय दीजिए। आप अकेले इस दण्डकारण्य में किस लिये विचरते हैं ?
श्री राम जब गंगा पार करके समृद्धिशाली वत्स देश (प्रयाग) में पहुंचे तो वहां लक्ष्मण सहित दोनों भाइयों ने चार महामृगों का शिकार किया।
तौ तत्र हत्वा चतुरो महामृगान्
वराहमृश्यं पृषतं महारुरुम्।
आदाय मेध्यं त्वरितं बुभुक्षितौ
वासाय काले ययतुर्वनस्पतिम्।।
(अयोध्याकांड, 52-102)
भावार्थ- वहां उन  दोनों भाइयों ने मृगया विनोद के लिए वराह, ऋश्य, पृषत् और महारुरु- इन चार महामृगों पर बाणों का प्रहार किया। तत्पश्चात् जब उन्हें भूख लगी, तब पवित्र कंद-मूल आदि लेकर सायंकाल के समय ठहरने के लिए (सीताजी के साथ) एक वृक्ष के नीचे चले गये।

स्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस का भी एक दोहा देखिए-
बंधु  सखा  संग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई।।
पावन मृग मारहिं जियं जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी।
(बालकांड, 204-1)
भावार्थ- श्रीराम चन्द्र जी भाइयों और इष्ट-मित्रों को बुलाकर साथ ले लेते हैं और नित्य वन में जाकर शिकार खेलते हैं। मन में पवित्र समझकर मृगों को मारते हैं और प्रतिदिन लाकर राजा (दशरथ जी) को दिखलाते हैं।

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण में राजा दशरथ द्वारा किए गए अश्वमेध यज्ञ का वर्णन मिलता है। बाल कांड में आता है कि राजा दशरथ के कोई संतान नहीं थी। पुत्रोत्पत्ति की लालसा से राजा दशरथ ने सरयू नदी के उत्तर तट पर यज्ञ भूमि का निर्माण कर शास्त्रोक्त रीति से यज्ञ किया।
देखिए अयोध्या राजा दशरथ द्वारा किया गया अश्व-
मेध नामक महायज्ञ किस प्रकार संपन्न हुआ।
अथ संवत्सरे पूर्णे तस्मिन् प्राप्ते तुरंगमे ।
सरय्वाश्रचोत्तरे तीरे राज्ञो यज्ञोडभ्यवर्तत ।।
ऋष्यश्रृंग पुरस्कृत्य कर्म चक्रुद्र्विजर्षभाः ।
अश्वमेधे महायज्ञे राज्ञोडस्य सुमहात्मनः ।।
नियुक्तास्तत्रः पशवस्तत्तदुद्दिश्य दैवतम्।
उरगाः पक्षिणश्चैव यथाशास्त्रं प्रचोदिताः।।
‘ाामित्रे तृ हयस्तत्र तथा जलचराश्च ये।
ऋषिभिः सर्वमेवैतन्नियुक्तं ‘ाास्त्रतस्तदा।।
पशुनां त्रिशतं तत्र यूपेषु नियतं तदा ।
अश्वरत्नोत्तमं तत्र राज्ञो दशरथस्य ह।।
कौसल्या तं हयं तत्र परिचय समन्ततः ।
कृपाणैर्विससारैनं त्रिभिः परमया मुदा ।।
पतत्त्रिणा तदा सार्धे सुस्थितेन च चेतसा ।
अवसद् रजनीमेकां कौसल्या धर्मकाम्यया।।
होताध्वर्युस्तथोदाता हस्तेन समयोजयन ।
महिष्या परिवृत्त्याथ वावातामपरां तथा ।।
पतत्त्रिणस्तस्य वपामुद्धृत्य नियतेन्द्रियः ।
ऋत्विक्परमसम्पन्नः श्रपयामास ‘ाास्त्रतः।।
धूमगन्धं वपायास्तु जिघ्रति स्म नराधिपः।
यथाकालं यथान्यायं निर्णुदन् पापमात्मनः।।
हयस्य यानि चांगनि तानि सर्वाणि ब्राह्मणाः
अग्नौ प्रास्यन्ति विधिवत् समस्ताः“ाोडशत्र्विजः
इधर वर्ष पूरा होने पर यज्ञ सम्बन्धी अश्व भूमण्डल में भ्रमण करके लौट आया। फिर सरयू नदी के उत्तर तट पर राजा का यज्ञ आरम्भ हुआ।
महामनस्वी राजा दशरथ के उस अश्वमेध नामक महायज्ञ में ़ऋष्य श्रृंग को आगे करके श्रेष्ठ ब्राह्मण यज्ञ सम्बन्धी कार्य करने लगे।
वहाँ पूर्वोक्त यूपों में शास्त्र विहित पशु, सर्प और पक्षी विभिन्न देवताओं के उद्देश्य से बाँधे गये थे ।
‘ाामित्र कर्म में यज्ञिय अश्व तथा कूर्म आदि जलचर जन्तु जो वहाँ लाये गये थे, ऋषियों ने उन सबको शास्त्र विधि के अनुसार पूर्वोक्त यूपों में बाँध दिया।
उस समय उन यूपों में तीन सौ पशु बँधे हुए थे तथा राजा दशरथ का वह उत्तम अश्वरत्न भी वहीं बाँधा गया था।
रानी कौसल्या ने वहाँ प्रोक्षण आदि के द्वारा सब ओर से उस अश्वका संस्कार करके बड़ी प्रसन्नता के साथ तीन तलवारों से उसका स्पर्श किया।
तद्नन्तर कौसल्या देवी ने सुस्थिर चित्त से धर्मपालन की इच्छा रखकर उस अश्व के निकट एक रात निवास किया।
तत्पश्चात् होता, अध्वर्यु और उदªाता ने राजा की (क्षत्रिय जातीय) महिषी ‘कौसल्या’, (वैश्य जातीय स्त्री) ‘वावाता’ तथा (शूद्र जातीय स्त्री) ‘परिवृत्ति’- इन सबके हाथ से उस अश्व का स्पर्श कराया।
इसके बाद परम चतुर जितेन्द्रिय ऋत्विक् ने विधि पूर्वक अश्वकन्द के गूदे को निकालकर शास्त्रोक्त रीति से पकाया।
तत्पश्चात् उस गूदे की आहुति दी गयी। राजा दशरथ ने अपने पाप को दूर करनेे के लिये ठीक समय पर आकर विधि पूर्वक उसके धुएँ की गन्ध को सूँघा।
उस अश्वमेध यज्ञ के अंग्भूत जो-जो हवनीय पदार्थ थे, उन सबको लेकर समस्त सोलह ऋृत्विज ब्राह्मण अग्नि में विधिवत् आहुति देने लगे।
(बालकांड, 14-1,2,30-38)

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