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Wednesday, 26 October 2016

घारा १२३ घर्म के आघार पर

👉🏿मुलनीवासी योघ्घा👈🏿
नुयुज कोपी 📋
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट हिन्दुत्व के संबंध में 1995 के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने से मंगलवार को इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली सात-सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि वह हिन्दुत्व को जीवन पद्धति बताने वाले 1995 के फैसले की व्याख्या नहीं करेगी। संविधान पीठ के अन्य सदस्य हैं न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल, न्यायमर्ति उदय उमेश ललित, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव।

संविधान पीठ ने कहा कि 20 साल पुराने फैसले में यह बात कहीं नहीं लिखी गई है कि संविधान पीठ को हिन्दुत्व की व्याख्या करनी है। फैसले के किसी भी हिस्से में इस बात का जिक्र नहीं है। न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा, जिस बात का जिक्र ही नहीं है उस हम कैसे सुन सकते हैं? कोर्ट ने यह टिप्पणी सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सितलवाड़, सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर शमसुल इस्लाम और पत्रकार दिलीप मंडल की अर्जी पर की है।

हालांकि कोर्ट ने याचिका लंबित रखी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विचार नहीं करेगी कि हिन्दुत्व का अर्थ हिन्दू धर्म से है या चुनावों में इसके इस्तेमाल की अनुमति है या नहीं? कोर्ट ने कहा कि वह जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 (तीन) के तहत धार्मिक नेताओं और उम्मीदवारों के बीच साठगांठ की वैधता पर विचार करेगा।

इस कानून की धारा 123 (तीन) कहती है कि चुनाव में किसी उम्मीदवार या उसके एजेंट या उम्मीदवार की सहमति से किसी व्यक्ति द्वारा अन्य व्यक्ति धर्म, नस्ल, जाति, सम्प्रदाय अथवा भाषा के आधार पर विभिन्न समुदायों के लोगों के बीच नफरत या दुश्मनी को बढ़ावा देना या इसका प्रयास करना अनुचित है।

इस फेसले पर अपनी राय जरुर दे ......

आप का पयारा भाइ हुजैफा पटेल

बहोत अछा लेख हे अेक बार जरुर परहेगा

रिफाइन तेल के बारे में आदरणीय राजीव दीक्षित जी का व्याख्यान;-

मित्रो, क्या आपने कभी विचार नहीं किया ? कि आखिर जिस Refine तेल से आप अपनी और अपने छोटे बच्चों की मालिश नहीं कर सकते, जिस Refine को आप बालों मे नहीं लगा सकते, आखिर उस हानिकारक Refine तेल को कैसे खा लेते हैं ?

दो मिनट का समय देकर Refine तेल की पूरी कहानी जरूर पढ़ें ।

आज से 50 साल पहले कोई रिफाइन तेल के बारे में नही जानता था, ये पिछले 20-25 वर्षो से हमारे देश में आया है। कुछ विदेशी कंपनी और भारतीय कंपनियाँ इस धंधे में लगी हुई हैं । इन्होने चक्कर चलाया और टेलीविजन के माध्यम से जमकर प्रचार किया लेकिन लोगों ने माना नहीं इनकी बात को, तब इन्होने डॉक्टरो के माध्यम से कहलवाना शुरू किया। डॉक्टरो ने अपने प्रेस्क्रिप्सन में रिफाइन तेल लिखना शुरू किया कि तेल खाना तो सफोला का खाना या सनफ्लावर का खाना, ये नहीं कहते कि तेल सरसों का खाओ या मूंगफली का खाओ,  क्यों ?
आप सब समझदार हैं, समझ सकते हैं।

ये रिफाइन तेल बनता कैसे हैं ? मैंने देखा है और आप भी कभी देख लें तो बात समझ जायेंगे ।किसी भी तेल को रिफाइन करने में 6 से 7 केमिकल का प्रयोग किया जाता है और डबल रिफाइन करने में ये संख्या 12 -13 हो जाती है। ये सब केमिकल मनुष्य के द्वारा बनाये हुए हैं प्रयोगशाला में, भगवान का बनाया हुआ एक भी केमिकल इस्तेमाल नहीं होता, भगवान का बनाया मतलब प्रकृति का दिया हुआ जिसे हम ऑर्गेनिक कहते हैं। तेल को साफ़ करने के लिए जितने केमिकल इस्तेमाल किये जाते हैं सब Inorganic हैं और Inorganic केमिकल ही दुनिया में जहर बनाते हैं और उनका combination जहर के तरफ ही ले जाता है। इसलिए रिफाइन तेल, डबल रिफाइन तेल गलती से भी न खाएं ।

फिर आप कहेंगे कि, क्या खाएं ? तो आप शुद्ध तेल खाइए, सरसों का, मूंगफली का, या नारियल का ! अब आप कहेंगे कि शुद्ध तेल में बास बहुत आती है और दूसरा कि शुद्ध तेल बहुत चिपचिपा होता है । हम लोगों ने जब शुद्ध तेल पर काम किया या एक तरह से कहे कि रिसर्च किया तो हमें पता चला कि तेल का चिपचिपापन उसका सबसे महत्वपूर्ण घटक है । तेल में से जैसे ही चिपचिपापन निकला जाता है तो पता चला कि ये तो तेल ही नहीं रहा, फिर हमने देखा कि तेल में जो बास आ रही है वो उसका प्रोटीन कंटेंट है, शुद्ध तेल में प्रोटीन बहुत है, दालों में ईश्वर का दिया हुआ प्रोटीन सबसे ज्यादा है, दालों के बाद जो सबसे ज्यादा प्रोटीन है वो तेलों में ही है, तो तेलों में जो बास आप पाते हैं वो उसका Organic content है प्रोटीन के लिए ! 4 -5 तरह के प्रोटीन हैं सभी तेलों में, आप जैसे ही तेल की बास निकालेंगे उसका प्रोटीन वाला घटक गायब हो जाता है और चिपचिपापन निकाल दिया तो उसका Fatty Acid गायब । अब ये दोनों ही चीजें निकल गयी तो वो तेल नहीं पानी है, जहर मिला हुआ पानी । और ऐसे रिफाइन तेल के खाने से कई प्रकार की बीमारियाँ होती हैं, घुटने दुखना, कमर दुखना, हड्डियों में दर्द, ये तो छोटी बीमारियाँ हैं, सबसे खतरनाक बीमारी है, हृदयघात (Heart Attack), पैरालिसिस, ब्रेन का डैमेज हो जाना, आदि, आदि । जिन-जिन घरों में पूरे मनोयोग से रिफाइन तेल खाया जाता है उन्ही घरों में ये समस्या आप पाएंगे, अभी तो मैंने देखा है कि जिनके यहाँ रिफाइन तेल इस्तेमाल हो रहा है उन्ही के यहाँ Heart Blockage और Heart Attack की समस्याएं हो रही है ।

जब हमने सफोला का तेल लेबोरेटरी में टेस्ट किया, सूरजमुखी का तेल, अलग-अलग ब्रांड का टेस्ट किया तो AIIMS के भी कई डॉक्टरो की रूचि इसमें पैदा हुई तो उन्होंने भी इसपर काम किया और उन डॉक्टरों ने जो कुछ भी बताया उसको मैं एक लाइन में बताता हूँ क्योंकि वो रिपोर्ट काफी मोटी है और सब का जिक्र करना मुश्किल है, उन्होंने कहा “तेल में से जैसे ही आप चिपचिपापन निकालेंगे, बास को निकालेंगे तो वो तेल ही नहीं रहता, तेल के सारे महत्वपूर्ण घटक निकल जाते हैं और डबल रिफाइन में कुछ भी नहीं रहता, वो छूँछ बच जाता है, और उसी को हम खा रहे हैं तो तेल के माध्यम से जो कुछ पौष्टिकता हमें मिलनी चाहिए वो मिल नहीं रहा है |” आप बोलेंगे कि तेल के माध्यम से हमें क्या मिल रहा ? मैं बता दूँ कि हमको शुद्ध तेल से मिलता है HDL (High Density Lipoprotein), ये तेलों से ही आता है हमारे शरीर में, वैसे तो ये लीवर में बनता है लेकिन शुद्ध तेल खाएं तब । तो आप शुद्ध तेल खाएं तो आपका HDL अच्छा रहेगा और जीवन भर ह्रदय रोगों की सम्भावना से आप दूर रहेंगे ।

अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा विदेशी तेल बिक रहा है । मलेशिया नामक एक छोटा सा देश है हमारे पड़ोस में, वहां का एक तेल है जिसे पामोलिन तेल कहा जाता है, हम उसे पाम तेल के नाम से जानते हैं, वो अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा बिक रहा है, एक-दो टन नहीं, लाखो-करोड़ों टन भारत आ रहा है और अन्य तेलों में मिलावट करके भारत के बाजार में बेचा जा रहा है । 7 -8 वर्ष पहले भारत में ऐसा कानून था कि पाम तेल किसी दूसरे तेल में मिला के नहीं बेचा जा सकता था लेकिन GATT समझौता और WTO के दबाव में अब कानून ऐसा है कि पाम तेल किसी भी तेल में मिलाकर बेचा जा सकता है। भारत के बाजार से आप किसी भी नाम का डब्बा बंद तेल ले आइये, रिफाइन तेल और डबल रिफाइन तेल के नाम से जो भी तेल बाजार में मिल रहा है वो पामोलिन तेल है। और जो पाम तेल खायेगा, मैं स्टाम्प पेपर पर लिख कर देने को तैयार हूँ कि वो ह्रदय सम्बन्धी बिमारियों से मरेगा । क्योंकि पाम तेल के बारे में सारी दुनिया के रिसर्च बताते हैं कि पाम तेल में सबसे ज्यादा ट्रांस-फैट है और ट्रांस-फैट वो फैट हैं जो शरीर में कभी dissolve नहीं होते हैं, किसी भी तापमान पर dissolve नहीं होते और ट्रांस फैट जब शरीर में dissolve नहीं होता है तो वो बढ़ता जाता है और तभी हृदयघात होता है, ब्रेन हैमरेज होता है और आदमी पैरालिसिस का शिकार होता है, डाईबिटिज होता है, ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है ।

मुसलमान इत्तीहाद करले या तय्यार होजाये

इत्तिहाद करलें, वरना तो फसाद के लिये तैयार हो जाएं,
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"मेहदी हसन एैनी क़ासमी के क़लम से"

   29 सितम्बर को लखनऊ में बरेलवी विचारधारा के रहनुमा मौलाना तौक़ीर रज़ा खान और देवबंदी 
रहनुमा मौलाना महमूद मदनी के एक स्टेज पर आ जाने के बाद अगले ही दिन मौलाना तौक़ीर रज़ा साहब ने हम से कहा कि अब इत्तिहाद तो हो गया? 
आगे करना क्या है?
यह सवाल अब हर मुसलमान का है कि इत्तिहाद का लाईन आफ़ एक्शन क्या हो? हिन्दुस्तान में जब भी मुसलमानों के पिछड़ेपन और पसमानदगी की बात 
की जाती है तो उस की असली वजह उन के आपसी झगड़ों और दूरियों को बताया जाता है,
मुसलमानों के पतन और पिछड़ेपन की बात होती हे तो  इस की वजह आपसी कलह 
और असहमति ही बतलायी जाती है,

इस्लाम दुश्मनों ने  मिल्लत ए इस्लामिया को कभी भी एकजुट होने नहीं दिया क्योंकि उन्हें मालूम है कि 
जिस दिन एक ही पंक्ति में महमूद और अयाज आ गए तो दुनिया की कोई ताकत उनका बाल भी बांका नहीं कर सकती,
तो सारांश यह निकला कि इत्तिहाद  समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है, पर सवाल यह उठता है कि इत्तिहाद का पैमाना क्या हो?
तो इसके लिए सभी के पास अलग-अलग प्रतिक्रिया है,
कोई कहता है कि समस्याओं का विवाद समाप्त कर दिया जाए,
कोई कहता है कि पंथ व मशरब कुछ नहीं, मूल वही है जो नबी रहमत ने छोड़ा है, यों तो इस संबंध में  फैसला कुन  कलाम कुरान की आयत "है,

"और अल्लाह की रस्सी को मज़बूती के साथ थामो"

मुफस्सिरीन के नज़दीक अल्लाह की रस्सी  कुरान और सुन्नत है, यानी "कलाम उ ल्लाह, 
सुन्नत ए  रसू्लुल्लाह , 
अब यह बात तो साफ़ हो गई कि इस्लाम के उसूल यानी अका़ईद ए इस्लाम में मतभेद स्वीकार्य नहीं होगा। 
यानी जिन फिरक़ों के विचार कुरान और सुन्नत के मुखालिफ़ होंगें,उन्हें अहले इस्लाम में शुमार नहीं किया जाएगा।
अलबत्ता जिन पंथों के फुरूई मसलों में आपस में 
मतभेद हैं उन्हें आपसी सहमति से सुलझाया जाएगा.और उन्हें ही यानी "उसूल ए इस्लाम पर मुत्तफिक़,विचारों में मुखतलिफ़" मसलकों  को अहले इस्लाम में से गरदाना जाएगा,

वैसे इस वक्त अगर हम इख्तिलाफ़ की बात करें तो उसे तीन हिस्सों में बाँटा जा  सकता है,

01.मसलक और मशरब का इख्तिलाफ़
02.मिल्ली इख्तिलाफ़ .
03.सियासी इख्तिलाफ़

जहां तक ​​बात पंथ यानी मशरब  के अलग अलग होने  की है, तो इस का मुख्य कारण वैचारिक मतभेद हैं, जिन को समाप्त कर पाना असंभव है, 
क्योंकि प्रत्येक पंथ और मशरब अपनी अपनी जगह अपने तर्क की रोशनी में सत्य है,
अलबत्ता कुछ फिरक़ों  का बातिल होना  
दलीलों से साबित होता है,
इस लिये मसलक व मशरब के  इत्तिहाद का ख्वाब 
तो शायद कभी भी पूरा ना हो सके,
लेकिन सभी पंथों में एकता का मिज़ाज बनाए रखने के लिए आपसी  समझ बूझ और सहयोग का वातावरण बनाना हर एक समझदार मुसलमान 
का दीनी  और मिल्ली  कर्तव्य है, 
और मिल्लत के पक्ष में मुसलमानों के बाहमी
असहमति और इख्तिलाफ़ को बंदे  और खुदा के बीच का  मामला समझ कर छोड़ देना चाहिए,

लेकिन इसका मतलब हरगिज़ नहीं कि  इस्लाम 
की हिफ़ाज़त का  काम छोड़ दिया जाए,

रही बात मिल्ली समस्याओं में गठबंधन की तो 
उसका पैमाना यह है कि जो समस्याएं मुसलमानों 
के बीच मुशतरक यानी  संयुक्त हैं, 
यानी मुसलमान समझे जाने वालों के जो शआईर 
और मसाईल हैं,
जैसे   कुरान और शरीयत की हिफ़ाज़त ,
मस्जिदों और मदरसों,खानक़ाहों,और अवक़ाफ़ 
की हिफ़ाज़त,
अज़ान व नमाज़ की स्थापना,
निकाह व तलाक़ की स्थापना,
दीन की तबलीग़, आदि तो उनके लिए एकजुट होकर आवाज उठाना प्रत्येक मुसलमान का शरई फरीज़ा है,

साथ ही मुस्लिम  पर्सनल लॉ और मुसलमानों के वैवाहिक व परिवारिक  मसाईल भी इसी श्रेणी में 
आते हैं.
इस लिये इनकी हिफाज़त के लिये मुसलमानों का 
एक होना फर्ज़ है,

इस लिए मौजूदा मुश्किल  परिस्थितियों में जरूरत
इस बात की है  अपने अपने पंथ व मशरब पर रहते हुए मुसलमानों के संयुक्त मुद्दों पर एकजुट होकर  कलमा गो मुसलमान,और अवाम उलमा व दानिशवरान  मिलकर आगे बढ़ें,
और मिल्लत को उसके हकूक़ दिलाने के लिए पीठ कस लें,

यह वह समस्याएं  हैं  जिनके लिये मिल्लत के
दर्द मंदों और मसीहाओं का एक होना समय की जरूरत है,
मसलहतों के जाल को  तोड़ कर दिफाई स्थिति 
से निकल कर  खुद से पहल  करना ही इस देश
के मुसलमानों लिए उनके इबादतखानों के लिये, व्यक्तिगत और सामूहिक जीवन के लिये, 
सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों के लिए ज़रूरी है,

रहा मुद्दा राजनीतिक इंतिशार व मतभेद का,
यह वर्तमान समय में महत्वपूर्ण और विचारणीय 
मुद्दा  है।
जिस के लिये सभी पहलुओं पर नज़र डाल कर 
कोई अंतिम रणनीति तै कर के  कदम उठाना ही इस देश में मुसलमानों के महफूज़ भविष्य की गारंटी होगी,
क्योंकि देश जिस ढर्रे पर जा रहा है,

मुसलमानों को पूरी तरह काठ का उल्लू बना दिया गया है, हम ना तो बोल सकते हैं, ना ही आह 
कर सकते हैं और ना ही अपनी राय खुलकर कर दे सकते हैं,
भारत की जेलें मुसलमानों के दम से ही आबाद हैं, 
मीडिया से लेकर सरकारी अधिकारी मुस्लिम नाम 
सुन कर ही आग बगूला हो जाते हैं, 
एैसे में अगर यही हालात चलते रहे तो मताधिकार
भी हमसे छिन जाएगा और हम  उफ़ तक करने के लिए अधिकृत नहीं होंगे, 
इसलिए हम सबको मिलकर राजनीतिक भविष्य के बारे में सोचना पड़ेगा,
2017 और फिर 2019 मुसलमानों के लिये बड़ी परीक्षा के दिन  होंगे,
राम मंदिर की निर्माण और हिंदू राष्ट्र की स्थापना 
का राग अलापने वाले 
किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं,
ऐसे में मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व क्या करेगी 
और उन से किस हद तक उम्मीद रखी जाए
यह  उत्तर प्रदेश का चुनाव तय करेगा,

लेकिन मौजूदा हालात में मुस्लिम राजनीतिक गठबंधन की बाँग देने वालों को इस तथ्य से नजर कभी नहीं चुराना चाहिए कि 
हम इस देश में महज 15 से 18  प्रतिशत है,
मुस्लिम एकता हो या ना हो पर इस बांग से 
बहूवर्ग नकारात्मक तरीके से एकजुट हो जाएगा 
और फिर उसका नुकसान क्या होगा इस का नज़ारा  2014 के लोकसभा चुनाव में बखूबी किया जा चुका है,
इसलिए फिलहाल सभी राजनीतिक दलों के मुस्लिम नेताओं की जिम्मेदारी है कि  वह जमीनी स्तर पर अपने-अपने क्षेत्रों में खूब मेहनत करें और 
रचनात्मक काम करें,
ताकि जनता का विश्वास जीत सकें,
फिर बिहार की तरह एक मज़बूत सेक्यूलर फ्रंट 
बनाने का माहौल तैयार करें,
एक मजबूत मोर्चा यानी महागठबंधन के गठन पर जोर दिया जाए जिसकी बुनियाद  धर्मनिरपेक्षता 
को ही रखा जाए 
इसमें सभी बड़ी छोटी बड़ी सेक्यूलर पार्टियों की भागीदारी हो,
इस देश और अल्पसंख्यकों की भलाई मिली जुली सरकार में ही है,
ताकि अपने अपने क्षेत्र की समस्याओं हल के लिए सरकार पर दबाव  बनाया जा सके ,
यही हालात की पुकार है,

लेकिन इस लिये करोड़ों लोगों को अपने पीछे लेकर चलने वाले मिल्ली व  राजनीतिक नेताओं को बंद कमरे में राजनीतिक दलों से सांठ गांठ का सिलसिला ख़त्म करके आम जनता के सामने खुले आम मुआहदा  करना होगा,
और यह तय करना होगा कि मुसलमान उसी पार्टी को वोट देंगे जो देश भर के  मुसलमानों को गरीबी, हिंसा, और भगवा आतंकवाद से निजात दिलाने का  पक्का वादा करती हो,
अंतिम बात यही है कि जिस दिन मुस्लिमों की मसीहाई का दम भरने वाले मिल्ली व सियासी  नेता  अपने हितों पर मिल्लत को प्राथमिकता देने लगेंगें 
क़ौम उसी दिन से विकास और तरक़्की का सफर शुरू कर देगी,इंशाअल्लाह ।
Mehdihasanqasmi44@gmail.com
09565799937
http://www.upuklive.com/2016/10/mehdi-hasan-aini-qasmi_24.html

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मुसलमानों अपने हक को जानों :



तमाम मुस्लिम बाशिंदों से गुज़ारिश है


कि हमारे देश में चारों ओर साजिशों का दौर चल पड़ा है


RSS एवं BJP हर रोज़ हिन्दू समाज को घर-घर जाकर मुसलमानों के खिलाफ जहर पिला रहे हैं।




प्रतिदिन देश के किसी न किसी कोने में मुसलमानों पर किसी भी बहाने से जुल्म को अंजाम दिया जा रहा है ।



RSS के लोग मुसलमानों पर ज्यादती के मौके तलाश रहे हैं ।



ऐसे में हमें भी चाहिए कि हम अपने अधिकारों को जाने



जो कि हमें भारत के संविधान ने दिये हैं

क्योंकि हम इस देश में किराएदार नहीं है इस मुल्क की एक एक इंच जमीन पर हमारा भी बराबर का अधिकार है ।



अगर कोई भी व्यक्ति आपसे बुरा व्यवहार करता है या आपसे मुस्लिम होने की वजह से मारपीट या गाली गलौज करता है



तो आप चुप न बैठें क्योंकि आपकी यही खामौशी इन देशद्रोहीयों के हौसलों को मजबूत करती है ।

आप एक इज्जतदार नागरिक होने का फर्ज निभाए

और ऐसे देश के दुश्मनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराएँ।




1. आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॅा आफ बोर्ड यानी की AIMPLB एक ऐसी संस्था है जो कई सालों से मुसलमानों के अधिकारों के लिये काम कर रही है।



जब बैरिस्टर असदउद्दीन औवेसी लंदन से वकालत की तालीम लेकर भारत आए


तो मुसलमानों के कमज़ोर हालात और उनके साथ हो रही नाइंसाफी को देखते हुए




उन्होंने हिन्दुस्तान के कुछ मशहूर मुस्लिम वकीलों और समाज सेवकों को साथ लेकर इस संस्था का गठन किया।




अगर किसी मुसलमान भाई को कोई भी परेशानी हो तो आप इस संस्था में कॅाल कर सकते हैं



जहाँ से आपको पूरी फ्री कानूनी मदद मिलेगी एवं वकील भी मुहैया कराए जाएंगे।





AIMPLB ( Delhi )
Contact: 91-11-26322991
Fax: 91-11-26314784
Email: aimplboard@gmail.com



खिदमत ( Delhi )
अल्पसंख्यक हेल्पलाईन
1800112001 (toll free)
09002354354




. और भी कई मुस्लिम संस्थाएं हैं जिनपर सम्पर्क किया जा सकता है:



CAVE ( A. R. Agwan )
011-29946037
9911526380




MCED ( Gaffar sheikh)
0240-2321223/24
09422206541




Muslim Yuva Manch
(Wasim Irfani )
01477-220137




मुस्लिम वक्फ बोर्ड:

Andhra Pradesh
( M.J. Akbar )
09440810006
040-66106248




Assam
( Nakibur Jaman)
09864021968
0361-2235285




Bihar
( Syed Sharim Ali )
07739323777
0612-2230581



Gujarat
( A.I. Sayed )
09909908299
079-23235467



Madhya Pradesh
( Shokat Mohammed Khan)
09425004331
0755-2543175




Utter Pradesh
( Zafar Ahmed faruqui )
09455557777
0522-2239378


Delhi
( S. M. Ali )
09650131666
011-23274417

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ताकि किसी मुस्लिम भाई के साथ नाइंसाफी न हो।

❗❗❗❗❗❗❗.   कोमेंट जरुर दे

मोदी जी को खुल्ला खत

📡📡📡📡📮📮FBP/16-400📮📮📡📡📡📡

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मेरा खुला खत :-

प्रधानमंत्री जी आप अपनी पत्नी जशोदाबेन को न्याय ना दे सके और मुसलमानों की औरतों को न्याय देने की बात करते हैं , अच्छाई की शुरुआत अपने घर से की जाती है और बेहतर होता कि करवाँचौथ के दिन आप अपनी पत्नी को न्याय देकर उस महिला को अधिकार और सम्मान देते जो 40 साल से अपने भगोड़े पति की राह देख रही है।

अदालत में मामले के होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आपने कहा कि '"मेरी मुसलमान बहनों का क्या अपराध कि कोई फ़ोन पर तलाक़ कह देता है और उनकी ज़िंदगी तबाह हो जाती है।"

काश कि ऐसा कहते हुए आपने जशोदाबेन का भी सोचा कि किस अपराध में वह सभ्य महिला "ना विवाहित ना विधवा ना तलाकशुदा" रही और बर्बाद होकर चुपचाप अपना जीवन गुज़ार रही।

हज़ारों मुस्लिम माँओं की कोख , हजारों मुस्लिम महिलाओं को विधवा और हजारों मुस्लिम बच्चियों को यतीम बनाकर आज यदि आप मुस्लिम महिलाओं के हित की बात करते हैं तो मुझे "अरविंद केजरीवाल" की बात सच लगने लगती है कि आप "मानसिक रोगी" है जिसे संघी बिमारी ने इतना प्रभावित कर लिया है कि वह सिर्फ़ मुस्लिमों के विरुद्ध साजिश करते रहने की सतत प्रक्रिया का पालन करता है।

और यदि नहीं तो इमानदारी से मुस्लिम महिलाओं का भला ही करना चाहते हैं तो आइए ज़मीन पर और सर्वे कराईए कि किस तरह से सुधार की आवश्यकता है , मुस्लिम महिलाओं में "तलाक" कोई मुद्दा है ही नहीं क्युँकि पति से अलगाव की दर पूरी दुनिया में सबसे कम मुसलमानों की ही है और भारत में तो यही दर और कम है तथा सात जन्म के वैवाहिक सिद्धांत वाले हिन्दुओं से भी कम है।

प्रधानमंत्री जी भारत में मुस्लिम महिलाओं पर एक सर्वे करा लीजिए आपको कुछ 2-4 छद्म प्रगतिशील नास्तिक महिलाओं के अतिरिक्त समस्त मुस्लिम महिलाओं को इस्लाम की बताई वैवाहिक व्यवस्था से कोई समस्या नहीं मिलेगी , 1400 वर्षों से सब इसी व्यवस्था में खुशी खुशी अपना जीवन व्यतीत करती रहीं हैं , और उसका उदाहरण आपने अपने गृह राज्य गुजरात के जिले सूरत में देख लिया होगा।

प्रधानमंत्री जी , मुस्लिम महिलाओं में दरअसल जो वास्तविक समस्या है उसे दूर करने का प्रयास कीजिए तो कम से कम मैं लाख विरोध के बावजूद आपको समर्थन दूँगा और इस देश का हर मुसलमान देगा , मुस्लिम महिलाओं की असली समस्या शिक्षा की है तो उनके लिए बेहतर शिक्षा की व्यवस्था कीजिए , रोजगार की समस्या है तो उनके लिए रोजगार की व्यवस्था करिए , आर्थिक समस्या है तो मुस्लिम महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराईए , समाज में उनके परदे में रहने और हिजाब में रहने पर उनकी मुस्लिम पहचान के कारण होते भेदभाव की समस्या को दूर कराईए , पर यह सब आपसे नहीं होगा क्युँकि मुस्लिम महिलाओं के हक के लिए आप इमानदार ही नहीं , आपको तो येन केन प्रकरेण इस्लामिक व्यवस्था पर चोट करनी है तो कुछ लोगों के गलत कामों को इस्लामिक व्यवस्था से जोड़कर उसपर मुस्लिम महिला के उत्थान की आड़ में आक्रमण करिए , आपका स्वभाव ही है किसी की आड़ में सब काम करना। इतिहास गवाह है कि आपने जीवन भर यही किया है , अपनी पत्नी आपने देश सेवा की आड़ में छोड़ा , गुजरात आपने गोधरा की आँड में किया , और अपने 30 महीने के कार्यकाल की विफलता को आपने सेना की आड़ में छुपाया इत्यादि इत्यादि।

मोदी जी  , इस देश में महिलाओं की दुर्दशा का सर्वे करा लीजिए 99% बलात्कार पीड़ित , यौन शोषित महिलाएँ मुस्लिम नहीं होंगी तो उनके सम्मान का भी सोचिए , अदालतों में पति से अलग होने के लिए मुकदमे से जूझ रही और अपने चरित्र पर आक्रमण झेल रही महिलाओं का सर्वे करा लीजिए आपको उनमें भी 99% महिला मुस्लिम नहीं मिलेगी तो उनके स्वाभिमान का भी सोचिए , दहेज और घरेलू हिंसा के कारण गैस लीकेज में जलकर मरने और फाँसी पर लटक जाने वाली महिलाओं का सर्वे करा लीजिए आपको वहाँ भी 99% महिला मुस्लिम नहीं मिलेगी तो उनके जीवन का भी सोचिए , गर्भ में मार दी जा रही बच्चियों की माँओं का सर्वे करा लीजिए आपको वहाँ भी 99% मुस्लिम महिलाएँ नहीं मिलेंगी तो उनके जीवन को बचाने का सोचिए , 2-3 साल लिव इन रिलेशनशिप में रहकर धोखा खाईं और फिर छोड़ दी गयीं महिलाओं पर एक सर्वे करा लीजिए वहाँ भी 99% महिलाएँ मुस्लिम नहीं मिलेंगी उनके बारे में भी सोचिए, प्रेम संबंधों में सहमति से शारीरिक संबंध बनाकर धोखा खाईं महिलाओं पर भी सर्वे करा लीजिए आपको उसमें भी 99% महिला मुस्लिम नहीं मिलेगी तो उनके न्याय का भी सोचिए, देश में तलाकशुदा और विधवा महिलाओं पर भी सर्वे करा लीजिए आपको 93•7% मुस्लिम महिलाएँ वहाँ भी नहीं मिलेंगी उनके पुनर्उत्थान का सोचिए, और जहाँ मुस्लिम महिलाएँ अधिक प्रतिशत में मिलेंगी वह सर्वे होगा अशिक्षा का बेरोजगारी का , भुखमरी का , गरीबी का जिसे दूर करने के नाम पर संघ आपको धकिया कर कुर्सी से नीचे फेंक देगा। तो बस आप आग लगाईए।

लगातार तीन तलाक इस्लाम में ही मना है और ऐसा करने वालों पर तमाम गुनाह लगाया गया है इसलिए इसपर तो कोई आपत्ति नहीं पर यह भी तो सर्वे कराईए कि मुसलमानों में ही धड़ल्ले से "तीन तलाक" होने का प्रतिशत कितना है ? आप नहीं करा पाएँगे ना सर्वे देख पाएँगे।

परन्तु आपकी दूसरी बात ज़रूर चौकाने वाली है कि "फोन पर तलाक दे दिया जाता है" जबकि आप "डिजिटल इंडिया" के ध्वजवाहक हैं , और इस डिजिटल युग में कोई तलाक का संदेश फोन से देता है तो आपको उसपर आपत्ति है ? कोई व्हाट्सअप करके देता है तो उसपर आपको परेशानी है , गज़ब का दोगलापन है आपमें , खुद सारा काम डिजिटल इंडिया और ट्विटर के सहारे करते हैं और कोई अपने वैवाहिक जीवन को समाप्त करने के लिए इसी तकनीक का इस्तेमाल "तलाक" का संदेश देने के लिए करता है तो आपको उसपर भी आपत्ति है ? प्रधानमंत्री जी दोगलेपन की कोई सीमा है कि नहीं ?

कोई व्यक्ति तलाक के लिए आपके डिजिटल इंडिया का सहारा ना ले तो आपने जशोदाबेन के लिए क्या तकनीक अपनाई ? आपने जशोदाबेन को छोड़ने के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई जो आप कभी पत्नी होना नकारते हैं तो कभी स्वीकारते हैं ?

जवाब दीजिएगा ? मुझे इंतजार रहेगा

■ दोस्तों इतना शेयर कीजिए कि प्रधानमंत्री तक यह पत्र पहुँच जाए।🌳🌳mohmmas  salim ansari
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मुस्लिम औरतों के हक़ और अधिकार की बात करने वाले मोदी पहले इन औरतों को हक़ और इंसाफ दिलायें। - http://hindi.siasat.com/?p=839948

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक है यही कारण है कि सभी राजनीतिक दल मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने और धुर्वीकरण की कोशिश कर रहे हैं। इसका सीधा उदाहरण प्रधानमंत्री मोदी द्वारा महोबा की रैली में दिए गए भाषण में दिखा।


सोमवार को उत्तर प्रदेश के महोबा में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने तीन तलाक़ पर अपना पक्ष साफ़ किया और समान आचार संहिता “एक देश एक कानून” के तहत लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि “अगर कोई फ़ोन पर तीन तलाक़ कह देता है तो एक मुस्लिम बिटिया की जिंदगी बर्बाद हो जाती है।

मोदी ने मुस्लिम महिलाओं कि जिंदगी सवारने की बात बिना किसी हिचकिचाहट के कही। मोदी जब मुस्लिम महिलाओं के हक़ और अधिकार की बात कर रहे थे तब उनके विरोधी इस बात पर हस रहे थे कि मोदी खुद अपनी पत्नी की बात क्यों नहीं करते हैं। मोदी तीन तलाक़ को मुद्दा बना कर और यूसीसी को लागू करने की बात कर के चुनावी धुर्वीकरण करना चाहते हैं।
युसीसी एक ऐसा मुद्दा है जिसे साम्प्रदायिक धुर्वीकरण के लिए हमेश इस्तेमाल किया जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी का मुस्लिम महिलाओं के प्रति प्रेम अचानक ने जाग गया है ऐसे में मोदी पहले इन महिलाओं के हक़ और अधिकार की बात करें।


जकिया जाफ़री,
जकिया जाफ़री 2002 के दंगों में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी हैं। एहसान जाफ़री को 2002 में गुजरात दंगो को दंगाइयों ने अहमदाबाद के गुलबर्ग सोसाइटी में जिन्दा जला कर मार डाला था। चश्मदीद गवाह के अनुसार सोसाइटी के बाहर खड़ी भीड़ को देख कर एहसान जाफ़री ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी को फ़ोन कर मदद मांगी लेकिन जवाब में कथित गली मिली और और मोदी ने कहा तुम्हे अब तक मर जाना चाहिए था। तब से जकिया जाफ़री अपने पति के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ रही हैं। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुस्लिम औरत की कोई मदद नहीं की।
नरोदा पाटिया पीड़ितों में भी हज़ारों मुस्लिम बिटिया, माँ और बहन की जिंदगी बर्बाद हुई, प्रधानमंत्री मोदी को पहले इन मुस्लिम औरतों के लिए हक़ और अधिकार की बात करनी चाहिए।

दिल्ली से सटे हरियाणा के मेवात में 25 अगस्त 2016 को कथिततौर पर गौरक्षकों द्वारा सज़ा के तौर पर उनके साथ गैंग रेप किया गया था। ठीक इसी तरह कश्मीर में भी इंशा मालिक को सुरक्षा कर्मियों ने पेलेट गन से इतनी गोली मारी की उसकी दाई आँख फैट गयी और बाई आँख छिल गयी है जससे वो दुबारा नहीं देख पायेगी। जब के ईशा मालिक ना तो पत्थर फ़ेंक रही थी ना ही किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने गयी थी।

ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिसे यह पता चलता है कि मोदी का मुस्लिम प्रेम झूठा है। आगे वे मुस्लिम औरतों की जिंदगी की इतनी परवाह करते हैं तो पहले वे इन औरतों की जिंदगी बर्बाद नहीं करते और कम से कम बाद में उसकी भरपाई करते हुए उनकी मदद तो कर देते।

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