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Monday, 21 September 2020

अस्तख फिरुल्लाह याजिद जिंदा. . . . के नारे लगे पाकिस्तान मे देखे परहे.

SAFTEAM GUJARAT
DATE. 21 SEP 2020

      अस्सला मुअलयकुम व.व.

साथियों दोस्तों  दुनिया मे  इस कोरोना काल मे दज्जाल केआने से पेहले इस्लामी  लिबाज मे  इस्लाम  और मुसलमानो के दुस्मनो ने  अजीब सा  माहोल बनाना सुरु कर दिया हे.

     पिछले  दिनो  4 sep 2020 मक्का हरम शरीफ की मस्जिद मे जुम्मा के दिन  हरम  इमाम  ने   इज़रायल  और  अमेरिका   को  लेकर जो खुत्बा  दिया  वे बहोत ही    हैरत   अंगज   वाकिया  था  जिसकी    लिंक  निचे मे   शेर करता हु.
उपर जो  तस्वीर  हमने आपतक शेर कि हे  वो  पाकिसतान  करांची  मे  13 sep 2020 के रोज  अजमते सहाबा के नामसे रेली का  आयोजन  किया गयाथा जिसमे  यजिद जिंदाबाद के नारे लगाये गये  और शिया समुदाय को  खुल कर चिल्ला चिल्ला कर काफिर कहा गया  ये दिन और सहाबा की  आरमे   मिल्लर को बातने  और  मजलुम बनाने का जो प्रयास हो रहा हे   बहोत ही   हैरत अंगेज हे.
  इस   प्रगाम  मे   एहले  हदीश  और  देवबंद   से जुडे उल्मा  की हाजरी  को नोध किया गया हे, चुंके  इस  मुद्दे  को  ने सोशल मिडिया  से  जानकारी  हासिल की हे  बहोत से   अलग अलग विचारो से जुडे   लोगो ने  इसका पुर जोर विरोध किया हे, बताया जाता हे, ये बहोत बड़ी  साज पाकिस्तान के खिलाफ हो रही हे एहले सुन्नत और शीया समुद्र  मे  नफरत   पैदा करने की साजिश हे.

आप  इस लिंक  पर जाकर देख सकते हे.

Sunday, 20 September 2020

उल्मा से जुडे दलीलें

उल्मा को दुनिया मे फित्ने दिखते हे, फसाद नही दिखते.
21 सदी मे अवाम मे इल्मे इजाफे पर फितना लगता हे.

हम किस उल्मा को मानेंगे ?
जो कुरान के साथ सिरते पाक स.अ.और  अहादीस के साथ तारीख़ पर हक और  सही बात करेंगे.

जो उल्मा  बात करेंगे   वो बात नहिं  प्रेकटीकली  रेहबरी करेंगे.

दुसरा  फिरका वारी बतवा उम्त मे नहीं  करेंगे.


बडे बडे उल्मा कि इज्जतोग करते हे छोटे  गरीब और इल्म के साथ जिंदगी गुजारने वाले उल्मा की  इज्जत पर कोइ बात नही?

 
उल्मा  अंदरो अंदर आपस मे बुखज रखते हे  लेकिन अवाम सवाल करे तो  मुरतद कहा जाता हे.


Wednesday, 9 September 2020

17 Aug 2020 Social Media विवादों का रिपोर्ट जरुर परहे.

NDTv की मुख्य खबर को पढ़ने यंहा क्लिक करे.

Explainer: क्या है बीजेपी-फेसबुक विवाद जिसपर गर्मा गई है देश की सियासत.


फेसबुक पर हेट स्पीच को लेकर अमेरिकी अखबार की प्रकाशित रिपोर्ट पर भारतीय राजनीतिक गलियारे और सोशल मीडिया की दुनिया में जंग छिड़ गई है.


  • वॉल स्ट्रीट जरनल की रिपोर्ट पर भारत में बढ़ा विवाद
  • कांग्रेस बोली- सोशल मीडिया पर BJP-RSS का कब्जा
  • सोशल मीडिया से हेट स्पीच फैलाने का आरोप लगाया
  • आज सूचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है- बीजेपी

एक प्रमुख अमेरिकी अखबार की हाल में प्रकाशित रिपोर्ट पर भारतीय राजनीतिक गलियारे और सोशल मीडिया की दुनिया में जंग छिड़ गई है. इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) फेसबुक और वाट्सऐप को नियंत्रित करते हैं. वे इसके जरिये नफरत फैलाते हैं. वहीं बीजेपी नेता एवं संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पलटवार किया. विवाद इतना बढ़ गया कि फेसबुक को सफाई देनी पड़ी.

कांग्रेस-बीजेपी में वॉर

अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट के बाद भारत में राजनीति गर्मा गई. सोशल मीडिया के मंचों पर बहस छिड़ गई. राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट किया, 'जो लूजर स्वयं अपनी पार्टी में भी लोगों को प्रभावित नहीं कर सकते वे इस बात का हवाला देते रहते हैं कि पूरी दुनिया को बीजेपी-आरएसएस नियंत्रित करती है.' राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वो कहते रहते हैं कि पूरी दुनिया बीजेपी, आरएसएस से नियंत्रित है. चुनाव से पहले डेटा को हथियार बनाते हुए आप रंगे हाथ पकड़े गए थे. कैंब्रिज एनालिटिका, फेसबुक से आपका गठजोड़ पकड़ा गया. ऐसे लोग आज बेशर्मी से सवाल खड़े करते हैं.

बीजेपी नेताओं का फेसबुक के अधिकारियों से सांठगांठ.

स्क्रीनशॉट इमेज 


रविशंकर प्रसाद के ट्वीट पर कांग्रेस ने पलटवार किया. कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, 'ऐसा लगता है कि झूठे ट्वीट और झूठा एजेंडा ही एकमात्र रास्ता बन गया है. कांग्रेस ने कभी कैम्ब्रिज एनेलिटिका की सेवाएं नहीं लीं.' सुरजेवाला ने दावा किया कि बीजेपी कैम्ब्रिज एनेलिटिका की क्लाइंट रही है. कानून मंत्री यह क्यों नहीं बताते.

भारत में सिर्फ कांग्रेस-बीजेपी में सियासी वॉर ही नहीं जारी है बल्कि राजनीतिक दलों के नेताओं ने फेसबुक की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपने ट्वीट में कहा, 'मार्क जकरबर्ग कृपया इस पर बात करें. प्रधानमंत्री मोदी के समर्थक अंखी दास को फेसबुक में नियुक्त किया गया जो खुशी-खुशी मुस्लिम विरोधी पोस्ट को सोशल मीडिया पर अप्रूव करता है. आपने साबित कर दिया कि आप जो उपदेश देते हैं उसका पालन नहीं करते.'

वहीं एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने फेसबुक पर सवाल उठाए. उन्होंने ट्वीट किया. 'अलग-अलग लोकतंत्र में फेसबुक के अलग-अलग मानक क्यों हैं? यह किस तरह का निष्पक्ष मंच है? यह रिपोर्ट बीजेपी के लिए नुकसानदेह है- बीजेपी के फेसबुक के साथ संबंधों का खुलासा हो गया है और फेसबुक कर्मचारी पर बीजेपी के नियंत्रण की भी प्रकृति सामने आई है.'

फेसबुक की सफाई

भारत में उठ रहे सवालों के बीच फेसबुक ने रविवार को कहा, 'हम हेट स्पीच और ऐसी सामग्री पर बंदिश लगाते हैं जो हिंसा को भड़काता है. हम ये नीति वैश्विक स्तर पर लागू करते हैं. हम किसी की राजनीतिक स्थिति या जिस भी पार्टी से नेता संबंध रख रहा, नहीं देखते हैं.' फेसबुक के प्रवक्ता ने आगे कहा, 'हम जानते हैं कि इस क्षेत्र में (हेट स्पीच और भड़काऊ कंटेंट को रोकने) और ज्यादा काम करने की जरूरत है. हम आगे बढ़ रहे हैं. निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी प्रक्रिया का नियमित ऑडिट करते हैं.'

रिपोर्ट में क्या है, जिससे हुआ विवाद

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल में 'फेसबुक हेट-स्पीच रूल्स कोलाइड विद इंडियन पॉलिटिक्स' हेडिंग से प्रकाशित रिपोर्ट से पूरा विवाद खड़ा हुआ है. रिपोर्ट में दावा किया गया कि फेसबुक भारत में सत्तारूढ़ बीजेपी नेताओं के भड़काऊ भाषा के मामले में नियम कायदों में ढील बरतता है. फेसबुक कर्मचारियों का कहना था कि भारत में ऐसे कई लोग हैं जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नफरत फैलाते हैं. कर्मचारियों का कहना है कि वर्चुअल दुनिया में नफरत वाली पोस्ट करने से असली दुनिया में हिंसा और तनाव बढ़ता है.

इसमें तेलंगाना से बीजेपी सांसद टी राजा सिंह की एक पोस्‍ट का जिक्र है. पोस्ट में मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा की वकालत की गई है. रिपोर्ट को फेसबुक के कर्मचारियों से बातचीत के हवाले से लिखी गई है. फेसबुक कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने टी राजा सिंह की पोस्‍ट का विरोध किया था और इसे कंपनी के नियमों के खिलाफ माना था, लेकिन कंपनी के भारत में टॉप लेवल पर बैठे अधिकारियों ने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया था.

हेट स्पीच विवाद पर फेसबुक की सफाई- पार्टी और नेता नहीं देखते, हिंसा भड़काने वाले कंटेंट पर रोक

बता दें कि यह पहला मामला नहीं है जब फेसबुक को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने उन पांच बातों के उल्लेख के साथ एक रिपोर्ट में बताया कि फेसबुक के नेटवर्क और डेटा का इस्तेमाल डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी मुहिम को बढ़ावा देने के लिए किया गया था.


बिना सवाल की संसद को लेकर मोदी सरकार पर सवाल.

02 sep 2020 

safteam gujarat 

भारत में संसद सत्र शुरू हो, तो एक हेडलाइन बहुत चर्चा में रहती है- 'संसद सत्र के हंगामेदार होने की आशंका."

कई बार हंगामा प्रश्नकाल में होता है तो कई बार किसी विधेयक पर चर्चा के दौरान हंगामा होता है. कई बार संसद परिसर के अंदर अलग-अलग मुद्दों पर विपक्ष का धरना प्रदर्शन भी होता है.

लेकिन इस बार संसद सत्र शुरू होने के पहले ही हंगामा मचा है. कोरोना की वजह से संसद का मॉनसून सत्र इस बार देर से शुरू हो रहा है. इस कारण इस बार संसद सत्र को लेकर कई तरह के बदलाव भी किए गए हैं.

14 सितंबर से शुरू हो रहे इस सत्र में लोक सभा और राज्यसभा की कार्यवाही पहले दिन को छोड़ कर दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक होगी. पहले दिन दोनों ही सदन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेंगे.

इसके अलावा सांसदों के बैठने की जगह में भी बदलाव किए गए हैं, ताकि कोरोना के दौर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सके.


इतना ही नहीं, इस बार का सत्र शनिवार और रविवार को भी चलेगा, ताकि संसद का सत्र जितने घंटे चलना ज़रूरी है, उस समयावधि को पूरा किया जा सके.

इससे पहले भी कई मौक़ों पर छुट्टी के दिन और ज़रूरत पड़ने पर रात के समय संसद का सत्र चला है. जीएसटी बिल भी ऐसे ही एक सत्र में रात को पास किया गया था.

इस सत्र में प्राइवेट मेम्बर बिजनेस की इजाज़त नहीं दी गई है, शून्य काल होगा और सांसद जनता से जुड़े ज़रूरी मुद्दे भी उठा सकेंगे, लेकिन उसकी अवधि घटा कर 30 मिनट कर दी गई है.

संसद का ये सत्र एक अक्तूबर को ख़त्म हो जाएगा.


लेकिन इस बार का संसद पहले के संसद सत्र की तरह हंगामेदार नहीं होगा. इसकी वजह है प्रश्न काल का ना होना.

इस बार सांसदों को प्रश्न काल के दौरान प्रश्न पूछने की इजाज़त नहीं होगी. सरकार के इस फ़ैसले को लेकर विपक्ष के सांसद आपत्ति जता रहे हैं.

टीएमसी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट किया है, "सांसदों को संसद सत्र में सवाल पूछने के लिए 15 दिन पहले ही सवाल भेजना पड़ता था. सत्र 14 सितंबर से शुरू हो रहा है. प्रश्न काल कैंसल कर दिया गया है? विपक्ष अब सरकार से सवाल भी नहीं पूछ सकता. 1950 के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है? वैसे तो संसद का सत्र जितने घंटे चलना चाहिए उतने ही घंटे चल रहा है, तो फिर प्रश्न काल क्यों कैंसल किया गया. कोरोना का हवाला दे कर लोकतंत्र की हत्या की जा रही है."


एक निजी पोर्टल के लिए लिखे लेख में डेरेक ओ ब्रायन ने लिखा है- "संसद सत्र के कुल समय में 50 फ़ीसदी समय सत्ता पक्ष का होता है और 50 फ़ीसदी समय विपक्ष का होता है. लेकिन बीजेपी इस संसद को M&S Private Limited में बदलना चाहती है. संसदीय परंपरा में वेस्टमिंस्टर मॉडल को ही सबके अच्छा मॉडल माना जाता है, उसमें कहा गया है कि संसद विपक्ष के लिए होता है."

वहीं कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर ने भी सोशल मीडिया पर सरकार के इस फ़ैसले की आलोचना की है.

दो ट्वीट के ज़रिए शशि थरूर ने कहा है कि हमें सुरक्षित रखने के नाम पर ये सब किया जा रहा है.

उन्होंने लिखा है, "मैंने चार महीने पहले ही कहा था कि ताक़तवर नेता कोरोना का सहारा लेकर लोकतंत्र और विरोध की आवाज़ दबाने की कोशिश करेंगे. संसद सत्र का जो नोटिफ़िकेशन आया है उसमें लिखा है कि प्रश्न काल नहीं होगा. हमें सुरक्षित रखने के नाम पर इसे सही नहीं ठहराया जा सकता."


अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि सरकार से सवाल पूछना, लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ऑक्सीजन के समान होता है. ये सरकार संसद को एक नोटिस बोर्ड में तब्दील कर देना चाहती है. अपने बहुमत को वो एक रबर स्टैम्प की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं, ताकि जो बिल हो वो अपने हिसाब से पास करा सकें. सरकार की जवाबदेही साबित करने के लिए एक ज़रिया था, सरकार ने उसे भी ख़त्म कर दिया है.


तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के विरोध को लेफ़्ट पार्टी से भी समर्थन मिला है. सीपीआई के राज्यसभा सांसद विनॉय विश्वम ने राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को चिट्ठी लिख कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है.

चिट्ठी में उन्होंने लिखा है कि प्रश्न काल और प्राइवेट मेम्बर बिजनेस को ख़त्म करना बिल्कुल ग़लत है और इसे दोबारा से संसद की कार्यसूची में शामिल किया जाना चाहिए.

संसद में प्रश्नकाल की प्रक्रिया एवं प्रश्नों की श्रेणियां कैसे होती हे पूरा परहे.

ऐसी ही एक चिट्ठी लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखी थी.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रश्न काल स्थगित करने को लेकर विपक्ष के नेताओं से बात की है.

कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने सरकार की कोशिश के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार की तरफ़ से दलील य़े दी गई है कि प्रश्न काल के दौरान जिस भी विभाग से संबंधित प्रश्न पूछे जाएँगे, उनके संबंधित अधिकारी भी सदन में मौजूद होते हैं.

मंत्रियों को ब्रीफ़िंग देने के लिए ये ज़रूरी होता है. इस वजह से सदन में एक समय में तय लोगों की संख्या बढ़ जाएगी, जिससे भीड़ भाड़ बढ़ने का ख़तरा भी रहेगा. उसी को कम करने के लिए सरकार ने ये प्रावधान किया है.

संसद की कार्यवाही प्रश्न काल से ही शुरू होती है, जिसके बाद शून्य काल होता है. हालाँकि सरकार की तरफ़ से विपक्ष को भरोसा दिलाया गया है कि प्रश्न काल की उनकी माँग पर विचार किया जाएगा.

संसद का पिछला सत्र 29 मार्च तक चला था. उस वक्त कुछ सांसदों नें कोरोना के माहौल को देखते हुए संसद सत्र जल्द समाप्त करने की मांग की थी. लेकिन तब उनकी माँग को एक बार ठुकरा दिया था.

प्रश्नकाल क्या होता है, जिसके संसद सत्र में ना होने को लेकर उठ रहे हैं सवाल पूरा परहे.



Friday, 4 September 2020

ગુંડાઓની ખેર નહીં: 'ધ ગુજરાત ગુંડા એન્ડ એન્ટી સોશિયલ એક્ટિવિટીઝ બિલ'ને મંજૂરી

'ધ ગુજરાત ગુંડા એન્ડ એન્ટી સોશિયલ એક્ટિવિટીઝ બિલ'ને મંજૂરી આપવામાં આવી છે. કેબિનેટ બેઠકમાં બિલને મંજૂરી મળી છે. ગુંડાગીરી કરનાર સામે 10 વર્ષ સુધી સજાની જોગવાઈ અને 50 હજારનો દંડ થશે.

ગાંધીનગર: 'ધ ગુજરાત ગુંડા એન્ડ એન્ટી સોશિયલ એક્ટિવિટીઝ બિલ'ને મંજૂરી આપવામાં આવી છે. કેબિનેટ બેઠકમાં બિલને મંજૂરી મળી છે. ગુંડાગીરી કરનાર સામે 10 વર્ષ સુધી સજાની જોગવાઈ અને 50 હજારનો દંડ થશે. ઝડપી ન્યાયિક તપાસ માટે સ્પેશિયલ કોર્ટની રચના પણ કરવામાં આવશે. બીલને મંજૂરી મળતા આગામી દિવસોમાં વટ હુકમ બહાર પાડવામાં આવશે.

ગુંડાગીરી છોડો નહીં તો ગુજરાત છોડો... અહિંસા અને શાંતિની ભૂમિ ગણાતા ગુજરાતમાં ગુંડાગીરી ચાલશે નહીં. રાજ્યના મુખ્યમંત્રી વિજય રૂપાણીએ સવારે કેબિનેટની બેઠક બોલાવી હતી. જેમાં ધ ગુજરાત ગુંડા એન્ડ એન્ટી સોશિયલ એક્ટિવિટીઝ બિલને મંજૂરી આપી છે. હવે ગુંડાગીરી કરનારાં અસામાજિક તત્વો સામે 10 વર્ષ સુધીની કડક જેલ અને 50 હજાર રૂપિયાનો દંડ થશે. તેમની મિલકત પણ જપ્ત કરવામાં આવશે.

ઝડપી ન્યાયિક તપાસ માટે સ્પેશિયલ કોર્ટની રચના કરવામાં આવશે. તો ગુંડાગીરી કરતા ટપોરીઓ, મવાલીઓ, અસામાજિક તત્વો અને રોમિયો- સાવધાન... હવે તમારી ખેર નથી. ગુંડા એક્ટ હેઠળ હવે તમારી બદમાશીને ડામીને જેલના સળિયા ગણતા કરી દેવામાં આવશે. ગુજરાતને ગુંડાઓથી બચાવવા માટે મુખ્યમંત્રી ખુદ મેદાનમાં ઉતર્યા છે. હવે ગુંડાઓ, બદમાશો, ચેઇન સ્નેચરો અને લૂંટારાઓથી જનતાને શાંતિ થઇ જશે. કાયદાનો હથોડો એવો વાગશે કે ગુંડાઓ ગુજરાત છોડીને ભાગશે.

આ ઓર્ડિનન્સની મહત્વપૂર્ણ જોગવાઇઓ:- 

  • ગુંડાગીરી કરનારા તત્વોને 10 વર્ષ સુધીની સખત કેદ અને 50 હજાર રૂપિયાનો દંડ કરશે.
  • ગુંડાઓ સામેના કેસ ચલાવી ઝડપી ન્યાયિક તપાસની કાર્યવાહી અને સજા માટે સ્પેશીયલ કોર્ટની રચના કરાશે.
  • ગુંડા તત્વો દ્વારા મેળવવામાં આવેલી મિલકત જિલ્લા મેજિસ્ટ્રેટ ટાંચમાં લઇ શકશે.
  • સાક્ષીઓને પુરતું રક્ષણ આપી નામ-સરનામા ગુપ્ત રાખવામાં આવશે.
  • ગૂનો નોંધતા પહેલા સંબંધિત રેન્જ આઇ.જી અથવા પોલીસ કમિશનરની પૂર્વ મંજૂરી આવશ્યક.
  • દારૂનો વેપાર, જુગાર, ગાયોના કતલ, નશાનો વેપાર, અનૈતિક વેપાર, માનવ વેપાર, બનાવટી દવાનું વેચાણ, વ્યાજખોરી, અપહરણ, ગેરકાયદે કૃત્યો આચરવા કે ગેરકાયદેસર હથિયારો રાખવા જેવી બદીઓને નશ્યત કરવા કડક કાયદાકીય જોગવાઇઓ કરાશે.
  • પાસાની જોગવાઇઓનો વ્યાપ વિસ્તારી મહત્વપૂર્ણ સુધારાના વટહુકમ દરખાસ્ત સાથે શાંત, સલામત, સુરક્ષિત, સમૃદ્ધ ગુજરાતના નિર્માણમાં વધુ એક નક્કર કદમની મુખ્યમંત્રીશ્રીની પ્રતિબદ્ધતા.
  • રાજ્યની વિકાસયાત્રામાં અવરોધક બનનારા, જાહેર વ્યવસ્થાને ખલેલ પહોચાડનારા, હિંસા, ધાકધમકી, બળજબરીથી નિર્દોષ નાગરિકોનું શોષણ કરનારા ગુંડા તત્વોની પ્રવૃત્તિઓને સખ્તાઇથી ડામી દેવા મુખ્યમંત્રીનો નિશ્ચય.
  • ગુંડાઓ જમીન કૌભાંડકારો, ભ્રષ્ટ કર્મચારીઓ તથા ગૌવંશના હત્યારાઓને કાયદાના કડક અમલીકરણથી નશ્યત-નેસ્તનાબૂદ કરવાનો વિજયભાઇ રૂપાણીનો નક્કર અભિગમ.

ગુંડા તત્વોની વ્યાખ્યા

વ્યક્તિગત અથવા જુથમાં  હિંસાની ધમકી આપવી, ધાક ધમકી આપવી અથવા અન્ય રીતે જાહેર વ્યવસ્થાને નુકશાન પહોંચાડવાના ઉદ્દેશથી કામ કરતી અસામાજિક પ્રવૃતિઓમાં સંડોવાયેલી વ્યક્તિઓનો સમાવેશ પણ આ કાયદા અંતર્ગત સજા પાત્રતામાં કરવામાં આવ્યો છે. 

કોઇ ગુંડા તત્વ અસામાજિક પ્રવૃત્તિ સાથે સંકળાયેલ હોય કે તેવી પ્રવૃત્તિ કરવાની તૈયારી કરતા હોય અથવા રાજ્યમાં શાંતિની જાળવણીમાં બાધક બને ત્યારે તેને 7 વર્ષથી ઓછી નહિ અને દસ વર્ષ સુધીની કેદની અને 50 હજાર રૂપિયાથી ઓછો નહિ તેટલા દંડની શિક્ષાની જોગવાઇ પણ આ નવા કાયદૃામાં સુનિશ્ર્ચિત કરી છે. 

સરકારી કર્મચારી હોય તેવી કોઇ વ્યક્તિ આવા ગુંડા તત્વોને ગુનો કરવા પ્રેરિત કરે  તો?

એટલું જ નહિ પણ સરકારી કર્મચારી હોય તેવી કોઇ વ્યક્તિ આવા ગુંડા તત્વોને ગુનો કરવા પ્રેરિત કરે કે મદદ કરે અથવા ગેરકાયદે રીતે કોઇ મદદ કરે કે સાથ આપે તો તેને ઓછામાં ઓછી 3 અને વધુમાં વધુ  10 વર્ષ સુધીની કેદની સજા અને દંડની જોગવાઇ કરવામાં આવી છે. 

આ અધિનિયમના નિયમોનું ઉલ્લંઘન કરીને ગુંડા તત્વોને પણ સજા

આ અધિનિયમના નિયમોનું ઉલ્લંઘન કરીને ગુંડા તત્વો દ્વારા કરવામાં આવેલા કોઇપણ કાર્ય માટે 10 હજાર સુધી દંડ સહિત અથવા દંડ વિના 6 મહિના સુધીની કેદની સજાની જોગવાઇ પણ  કરવામાં આવી છે. આ વટહુકમ હેઠળ કોઇ પણ ગુનો નોંધતા પહેલા સંબંધિત રેન્જ આઇ.જી અથવા પોલીસ કમિશનરની પૂર્વમંજૂરી સિવાય આવો ગુનો નોંધી શકાશે નહી તેવી જોગવાઇ પણ કરવામાં આવી છે.

ગુંડા એક્ટમાં જોગવાઈઓ

માનવ તસ્કરી
ગૌવંશ હત્યા
નાણાંકીય છેતરપિંડી સહિતના ગુનાઓ
જાહેર મિલકતને નુકસાન પહોંચાડવાનો ગુનો
સરકારની વિરૂદ્ધ કોઈ સમાજને ભડકાવવો અથવા તેના જેવું કૃત્ય.


7/11 मुंबई विस्फोट: यदि सभी 12 निर्दोष थे, तो दोषी कौन ❓

सैयद नदीम द्वारा . 11 जुलाई, 2006 को, सिर्फ़ 11 भयावह मिनटों में, मुंबई तहस-नहस हो गई। शाम 6:24 से 6:36 बजे के बीच लोकल ट्रेनों ...