Followers

Monday, 11 March 2019

सोशिय मिडिया संबंधित आपराधिक कानून पार्ट 2

https://navbharattimes.indiatimes.com/india/sc-calls-for-new-law-to-regulate-social-media/championstrophy_articleshow/48387817.cms#

संबंधित आपराधिक कानून के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही। 

मामले में तमिलनाडु सरकार की ओर से दलील दी गई कि आईटी एक्ट की धारा 66ए के खत्म होने के बाद से आपत्तिजनक कंटेट सोशल साइट्स पर कुछ ही मिनट में वायरल हो जाता है, जिससे व्यक्ति विशेष की सोशल प्लेटफॉर्म पर इमेज बिगड़ जाती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की कि केंद्र सरकार को लगता है कि इसके लिए अलग से कोई कानून बनाया जाना चाहिए तो वह बना सकती है। 

'निर्देश नहीं, सुझाव है'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आईटी एक्ट की धारा 66ए इसलिए हटाई गई क्योंकि वह अभिव्यक्ति के लिए खतरा थी। अगर संसद को लगता है कि इस मामले में कानून की जरूरत है तो वह कानून बना सकता है। जस्टिस दीपक मिश्र और प्रफुल्ल सी पंत की बेंच ने कहा, 'हम इसके लिए केंद्र सरकार को कोई निर्देश जारी नहीं कर सकते, केवल सुझाव ही दे सकते हैं।' 

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से दलील दी गई कि सोशल नेटवर्किंग साइट का दायरा काफी व्यापक है। कुछ ही मिनट में कंटेंट लाखों लोगों के पास पहुंच जाता है। 

नीति की आलोचना मानहानि नहीं
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने कहा था अगर कोई पॉलिसी किसी को पसंद नहीं है तो उसकी आलोचना मानहानि के दायरे में नहीं आती। भारतीय संविधान में सभी को विचार अभिव्यक्ति का अधिकार है। आलोचना में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन ऐसी कोई भी आलोचना, जिससे किसी व्यक्ति विशेष के मान-सम्मान को ठेस पहुंचे तो वह मानहानि के दायरे में होगा। 

मानहानि से संबंधित आपराधिक प्रावधान आईपीसी की धारा 499 और 500 को केजरीवाल के अलावा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी चुनौती दे रखी है। 

आईपीसी की धारा 499 को चैलेंज
याचिकाकर्ता की दलील थी कि आईपीसी का उक्त प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 19 व 21 का उल्लंघन करता है। वह अभिव्यक्ति के अधिकार और लाइफ एंड लिबर्टी के अधिकार का उल्लंघन करता है। केंद्र सरकार की दलील थी कि मानहानि से संबंधित कानूनी प्रावधान सही है और कहा था कि हर व्यक्ति को राइट टु लाइफ ऐंडड लिबर्टी मिली हुई है। राइट टु लाइफ का मतलब मान सम्मान और प्रतिष्ठा के साथ जीवन जीने का अधिकार है। ऐसे में मानहानि से संबंधित कानूनी प्रावधान को बरकरार रखना जरूरी है। 

सोशल मीडिया पर विचारों की आजादी पर बड़ा फैसला

सोशल मीडिया पर विचारों की आजादी पर बड़ा फैसला 

24 मार्च 2015, 01:26 PM

आज विचारो की आजादी के मद्देनजर बहुत महत्वपूर्ण दिन है। कोर्ट ने इंटरनेट कानून की धारा 66ए को रद्द कर दिया है, जिसके तहत सरकार सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कमेंट करने वालों को गिरफ्तार कर रही थी। यानि अब आपत्तिजनक कमेंट करने वाले लोग अपराधी की श्रेणी में नहीं आएंगे। कानून की मजबूत धाराओं में अब आपको जेल की हवा नहीं खानी पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने आज सोशल मीडिया पर कमेंट करने को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए आईटी एक्ट की धारा 66 ए को खत्म करने की बात कही है।

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक धारा 66ए अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ है। कानून के गलत इस्तेमाल न होने की सरकार की दलील खारिज कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 66ए मूल अधिकार का उल्लंघन और असंवैधानिक है। अभिव्यक्ति की आजादी सर्वोपरि रहनी चाहिए। हालांकि सरकार के पास वेबसाइट ब्लॉक करने का अधिकार बरकरार रहेगा।

हम आपको बता दें कि साल 2012 में मुंबई में फेसबुक पर शिवसेना नेता बाल ठाकरे के खिलाफ कमेंट करने पर 2 लडकियों को गिरफ्तार किया गया था। लड़कियों की गिरफ्तारी के बाद देशभर में विरोध जताया गया था। हाल के दिनों में यूपी में एक मामला सामने आया था जिसमें एसपी नेता और अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आजम खान के खिलाफ सोशल मीडिया पर कमेंट करने वाले एक लड़के को गिरफ्तार कर लिया गया था। असीम त्रिवेदी को सोशल मीडिया पर संसद, राष्ट्र चिह्न के खिलाफ आपत्तिजनक कार्टून बनाने के लिए गिरफ्तार किया था। ममता बनर्जी के कार्टून बनाने पर प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा को गिरफ्तार किया गया था। एयर इंडिया के दो कर्मचारियों की कुछ नेताओं के खिलाफ पोस्ट डालने पर गिरफ्तारी 
की गई थी।

कानून की छात्रा श्रेया सिंघल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि आईटी एक्ट की धारा 66ए अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है, इस कानून के तहत तुरंत गिरफ्तारी के प्रावधान को खत्म किया जाए। इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जांच के आदेश देते हुए दिशा निर्देश जारी किया था कि ऐसे मामलों में एसपी रैंक के अधिकारी ही गिरफ्तारी का आदेश दे सकते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट कानून की इस धारा को खत्म कर दिया है।

केंद्र सरकार ने आईटी एक्ट धारा 66-ए को बनाए रखने की वकालत की थी। केंद्र सरकार ने मांग की थी कि एक्ट का इस्तेमाल गंभीर मामलों में किया जाना चाहिए और बड़े पुलिस अफसरों की इजाजत बिना कार्रवाई नहीं की जाए। आईटी एक्ट धारा 66-ए के तहत सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट के खिलाफ पुलिस के पास गिरफ्तारी का अधिकार था। इसके तहत सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट के खिलाफ 3 साल की जेल हो सकती थी।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने जनता को एक बार फिर सोशल नेटवर्क पर अपनी आवाज़ उठाने की आजादी दे दी है। इस मामले में याचिका दायर करने वाली श्रेया सिंघल की लड़ाई रंग लाई है।

कोर्ट में भले ही सरकार का मत अलग हो लेकिन फैसला आने के बाद आईट और टेलीकॉम मंत्री ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि आलोचना को अपराध के दायरे में नहीं लाया जाएगा। लेकिन कुछ राजनीतिक पार्टियां ऐसी भी हैं तो इस फैसले से बेहद नाखुश हैं, और इसे गलत ठहरा रही हैं।

https://m.moneycontrol.com/hi/news/article_116518.html

Sunday, 10 March 2019

मनुस्मृति Kya है जानिए

Aaj na time ma Hindu loko ni Naat-Jaat, bhed bhaav, Uunch-Neech jaanvu jaroori chhe.

Manu smruti a Braahammano no nu  Constitution chhe j  mujab RSS raaj laav va maange chhe

मनुस्मृति Kya है
जानिए

ब्राह्मण  -( Genaral) सवर्ण उच्च कोटि

वैश्य - ( Genaral) सवर्ण उच्च कोटि

क्षत्रिय -( obc)  सामान्य शुद्र

शुद्र - (obc) ठाकुर, कुंभार,  सोनार, लोहार, वाघेला,नायी, मकवाना, माली, दरजी, चौधरी, राठोङ,   आदि आदि
 
अति शुद्र -(sc,st) दलित, आदिवासी

मनुस्मृति के अनुसार कौन कया है
जानिए

ब्राह्मण  -( Genaral) सवर्ण उच्च कोटि

वैश्य - ( Genaral) सवर्ण उच्च कोटि

क्षत्रिय -( obc)  सामान्य शुद्र

शुद्र - (obc) ठाकुर, कुंभार,  सोनार, लोहार, वाघेला,नायी, मकवाना, माली, दरजी, चौधरी, राठोङ,   आदि आदि
 
अति शुद्र -(sc,st) दलित, आदिवासी

नारी कुल नासीनी नरक खाय कहेने वाला युरेशीयन मनुवादी अार्य भ्रामण. *👉समस्त झगड़ों की जड़ है= ब्राह्मण👈*

*"जानिए ब्राह्मण के चाल, चरित्र और चेहरे को"*

01. अपने पक्ष में *वेद* लिखने वाले = *ब्राह्मण*
02. धर्म के भ्रमजाल पर *पुराण* लिखने वाले = *ब्राह्मण*
03. धर्म के विस्तार के लिए *उपनिषद* लिखने वाले = *ब्राह्मण*
04. आपसी झगड़ों पर *ग्रंथ* लिखने वाले = *ब्राह्मण*
05. खुद की श्रेष्ठता के लिए *मनुस्मृति* लिखने वाला = *ब्राह्मण*
06. अंधविश्वास में फंसाने के लिए *पंचांग* लिखने वाला = *ब्राह्मण*
07. अपने रोजगार के लिए *मंदिर* बनवाने वाला = *ब्राह्मण*
08. काल्पनिक *भगवान* बनाने वाला = *ब्राह्मण*
09. मिथ्या *पूजापाठ* कराने वाला = *ब्राह्मण*
10. मूर्ख बनाने के लिए *कर्मकांड* करने वाला = *ब्राह्मण*
11. गरीबों में *पाखंड* फैलाने वाला = *ब्राह्मण*
12. अशिक्षितों में *अंधविश्वास* फैलाने वाला = *ब्राह्मण*
13. चमत्कार के नाम पर *ढोंग* फैलाने वाला = *ब्राह्मण*
14. अपनी जाति से दूसरी जातियों को *छोटी* बनाने वाला = *ब्राह्मण*
15. जातियों में *ऊँच-नीच* की भावना फैलाने वाला = *ब्राह्मण*
16. जातियों के *टुकड़ें* करने वाला = *ब्राह्मण*
17. जातियों को काम *बांटने* वाला = *ब्राह्मण*
18. जाति के आधार पर *भेदभाव-छुआछूत* करवाने वाला = *ब्राह्मण*
19. इंसानों को *अछूत* बनाने वाला = *ब्राह्मण*
20. छोटी जातियों पर *अत्याचार* कराने वाला = *ब्राह्मण*
21. जाति देखकर *सजा* देने वाला = *ब्राह्मण*
22. शूद्रों को *नीच* बताने वाला = *ब्राह्मण*
23. महिलाओं को *उपभोग की वस्तु* बताने वाला = *ब्राह्मण*
24. *महिलाओं* को बराबर नहीं मानने वाला = *ब्राह्मण*
25. *कांग्रेस* को बनाने वाले = *ब्राह्मण*
26. *आरएसएस* को बनाने वाले = *ब्राह्मण*
27. *जनसंघ* को बनाने वाले = *ब्राह्मण*
28. *जनता पार्टी* को बनाने वाले = *ब्राह्मण*
29. *भाजपा* को बनाने वाले = *ब्राह्मण*
30. *माकपा-भाकपा-तृणमूल कांग्रेस* को बनाने वाले = *ब्राह्मण*
31. सबसे ज्यादा *प्रधानमंत्री* बनने वाले = *ब्राह्मण*
32. सबसे ज्यादा *राष्ट्रपति* बनने वाले = *ब्राह्मण*
33. सबसे ज्यादा *एमपी-एमएलए* बनने वाले = *ब्राह्मण*
34. सबसे ज्यादा *राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री बनने* वाले = *ब्राह्मण*
35. सबसे ज्यादा *जज* बनने वाले = *ब्राह्मण*
36. सबसे ज्यादा *एसपी-कलेक्टर* बनाने वाले = *ब्राह्मण*
37. *एससी-एसटी* से नफरत करने वाले = *ब्राह्मण*
38. *मुसलमानों* से नफरत करने वाले = *ब्राह्मण*
39. *हिंदू-मुसलमानों* को लड़वाने वाले = ब्राह्मण
40. *आरक्षण* का विरोध करने वाले = *ब्राह्मण*
41. *पदोन्नति में आरक्षण* का विरोध करने वाले = *ब्राह्मण*
42. *एससी-एसटी कानून* का विरोध करने वाले = *ब्राह्मण*
43. *टीवी न्यूज चैनल* चलाने वाले = *ब्राह्मण*
44. *अखबार* छापने वाले = *ब्राह्मण*
45. सबसे ज्यादा *संवाददाता-पत्रकार* बनने वाले = *ब्राह्मण*
46. सबसे बड़े *गायों के कत्लखानें* चलाने वाले = *ब्राह्मण*
47. *सुअरों के कत्लखानें* चलाने वाले = *ब्राह्मण*
48. सबसे ज्यादा *गाय का मीट* खाने वाले = *ब्राह्मण*
49. सबसे ज्यादा *बलात्कार* करने वाले = *ब्राह्मण*
50. सबसे ज्यादा *भ्रष्टाचार* फैलाने वाले = *ब्राह्मण*
51. विदेशों में सबसे ज्यादा *कालाधन* जमा करने वाले = *ब्राह्मण*
52. *ज्योतिबा फुले* को शूद्र कहकर अपमानित करने वाले = *ब्राह्मण*
53. *सावित्रीबाई फुले* पर कीचड़ फेंकने वाले = *ब्राह्मण*
54. बड़ौदा दरबार में *डॉ अंबेडकर* को पानी नहीं पिलाने वाला = *ब्राह्मण*
55. महाड़ तालाब के पानी को छूने पर *बाबा साहब पर हमला* करने वाले : *ब्राह्मण*
56. कालामंदिर में घुसने पर *बाबा साहब पर हमला* करने वाले = *ब्राह्मण*
57. *बाबा साहब की मूर्तियों* को तोड़ने वाले = *ब्राह्मण*
58. अजमेर-मालेगांव(मुम्बई) में *विस्फोट* करने वाले = *ब्राह्मण*
59. *हिंदू आतंकवाद* फैलाने वाले = *ब्राह्मण*
60. *संविधान का विरोध* करने वाले = *ब्राह्मण*
61. पूरे देश में 11.12.1949 को *डॉ अंबेडकर के पुतलें* जलाने वाले = *ब्राह्मण*
62. दिल्ली में 09.08.2018 को *संविधान जलाने* वाले = *ब्राह्मण*
63. *एकलव्य का अंगूठा कटवाने* वाला = *ब्राह्मण*
64. *शंभूक ऋषि की हत्या* कराने वाला = *ब्राह्मण*
65. *बौद्ध राजा बृदहस्त की हत्या* करने वाला = *ब्राह्मण*
66. *महात्मा गांधी की हत्या* करने वाला = *ब्राह्मण*
67. *पत्रकार गौरी लंकेश* की हत्या करने वाले = ब्राह्मण
68. *डाभोलकर की हत्या* करने वाले = *ब्राह्मण*
69. *रोहित वेमुला की हत्या* करने वाले = *ब्राह्मण*
70. *डॉ अंबेडकर की हत्या* करने वाली = *ब्राह्मण*
71. धर्म के नाम पर *लूटने* वाले = *ब्राह्मण*
72. मंदिरों में सबसे ज्यादा *कालाधन* एकत्रित करने वाले = *ब्राह्मण*
73. भगवान के *भय* से डराने वाले = *ब्राह्मण*
74. भगवान के नाम पर *दान* मांगने वाले = *ब्राह्मण*
75. मंदिर के नाम पर *अनुदान* मांगने वाले = *ब्राह्मण*
76. सांसद, विधायक, मेयर, पार्षद, प्रधान, सरपंच बनने के लिए सबसे ज्यादा *मतदान मांगने* वाले = *ब्राह्मण*
77. शिवाजी माहाराजांच्या डोक्यावर वार करणारा *ब्राह्मण*

*यह है ब्राह्मणों का काला इतिहास। अर्थात एक बार सांप पर विश्वास कर लेना, परंतु किसी भी हालत में ब्राह्मणों पर विश्वास मत करना....*

*ब्राह्मण* भारत की कुल जनसंख्या के *मात्र 3.5%* हैं, परंतु ब्राह्मण का भारत की कार्यपालिका, व्यवस्थापिका, न्यायपालिका, चुनाव आयोग, भारतीय रिजर्व बैंक आदि की *80% व्यवस्था* पर कब्जा है....

*कुल मिलाकर समस्त झगड़ों की जड़ है = ब्राह्मण*
*समस्त जातियों के पिछड़ेपन की जड़ है = ब्राह्मण*

इसीलिए जनता को अपने हक और अधिकारों के लिए जागरूक होना बहुत जरूरी है, अन्यथा भारत की गैरब्राह्मण जनसंख्या यानि भारत के मूलनिवासी कभी भी विकास नहीं कर पाएंगे।

_*इसीलिए ब्राह्मण को ब्राह्मण के द्वारा रचित धार्मिक व्यवस्था के जातीय मकड़जाल में फंसाना बहुत जरूरी है....*_

*1. ब्राह्मण* को सिर्फ पूजापाठ, कर्मकांड, हवन, यज्ञ आदि करने चाहिए, इसके अलावा कुछ नहीं....
*2. क्षत्रिय* को सिर्फ देश की सुरक्षा करनी चाहिए, इसके अलावा कुछ नहीं....
*3. वैश्यों* को सिर्फ व्यापार करना चाहिए, इसके अलावा कुछ नहीं....

और

*4. शूद्रों* को राष्ट्रपति से लेकर चपरासी तक के पदों पर चयनित होकर सिर्फ देश की सेवा करनी चाहिए, इसक अलावा कुछ नहीं....

आइए, देश के शासन-प्रशासन से ब्राह्मणों के 80% अनावश्यक कब्जे को खाली करवाते हैं....

_*हमें चाहिए आजादी।*_
_*ब्राह्मणवाद से आजादी।।*_

_*मताधिकार हमारा संवैधानिक अधिकार है जो ब्राह्मणवादी अत्याचारों से लड़ने का सबसे कारगर और जबरदस्त हथियार है जिसका प्रयोग करके हम अपनी संवैधानिक आजादी प्राप्त कर सकते हैं....*_
*नारी को सम्मानित करने वाला ‘विश्व महिला दिवस’ तो पश्चिम का त्योहार है.। भारत की ब्राह्मणवादी परंपरा का त्योहार तो महिला को जलाने, प्रताड़ित करने व उसके अंग विच्छेदन कर मज़े लूटने का है विश्व महिला दिवस बह्मणवादी संस्कृति के ख़िलाफ़ है.. इसलिए ब्राह्मणवादी परंपराएँ तोड़ने वाली महिलाएँ ही महिला दिन की बधाई की हक़दार है.. भा्राह्मणवादी परंपराएँ तोड़ने वाली सभी क्रांतिकारी महिलाओं को विश्व महिला दिवस की अग्रिम शुभकामनाएँ. बाक़ी महिलाओं को ब्राह्मणवादी ग़ुलामी मुबारक.*

सिबिर भरूच वेल्फेर हॉस्पिटल

तारीख :-10/03/2019

वक्त 
60 वर्ष सुधि कसू विचारवू नय परे
सरकारी कर्मचारी नो पावर गाड़ी पार्किन माते आने टोल टैक्स बाबत

महिला वक्त
भरपूर रजाओ
पगार सरो मले

आदर्श आचार संहिता के बारेमे जाने

तारीख:-10/03/2019




Model Code of Conduct: क्या होती है चुनाव आचार संहिता, क्या है इसका मतलब?

By Ankur Sharma

Updated: Mon, Oct 8, 2018, 14:43 [IST]

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। जिन राज्यों में चुनाव का ऐलान हुआ है उनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना शामिल हैं। चुनाव ऐलान के बाद अब इन राज्यों में चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई है लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा कि आखिर 'चुनाव आचार संहिता' होती क्या है और क्यों चुनाव आयोग इसे चुनावों के वक्त लागू करता है।

आदर्श आचार संहिता

चुनाव आचार संहिता / आदर्श आचार संहिता का मतलब है चुनाव आयोग के वो निर्देश जिनका पालन चुनाव खत्म होने तक हर चुनाव लड़ने वाली पार्टी को करना होता है। जो इसका पालन नहीं करता है, उसे इसके लिए सजा सुनाई जाती है।राज्यों में चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही वहां चुनाव आचार संहिता भी लागू हो जाती हैं। चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें, सभी सरकारें चुनाव आचार संहिता के दायरे में आती हैं।




Model Code of Conduct: क्या होती है चुनाव आचार संहिता, क्या है इसका मतलब?

By Ankur Sharma

Updated: Mon, Oct 8, 2018, 14:43 [IST]

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। जिन राज्यों में चुनाव का ऐलान हुआ है उनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना शामिल हैं। चुनाव ऐलान के बाद अब इन राज्यों में चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई है लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा कि आखिर 'चुनाव आचार संहिता' होती क्या है और क्यों चुनाव आयोग इसे चुनावों के वक्त लागू करता है।

आदर्श आचार संहिता

चुनाव आचार संहिता / आदर्श आचार संहिता का मतलब है चुनाव आयोग के वो निर्देश जिनका पालन चुनाव खत्म होने तक हर चुनाव लड़ने वाली पार्टी को करना होता है। जो इसका पालन नहीं करता है, उसे इसके लिए सजा सुनाई जाती है।राज्यों में चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही वहां चुनाव आचार संहिता भी लागू हो जाती हैं। चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें, सभी सरकारें चुनाव आचार संहिता के दायरे में आती हैं।

यह भी पढ़ें:'माया की जिद से भाजपा को एमपी में मिल सकता है तगड़ा फायदा'

प्रदेश सरकार और प्रशासन पर कई अंकुश

आचार संहिता लगने के बाद मुख्यमंत्री या मंत्री अब न तो कोई घोषणा कर सकते हैं, न शिलान्यास, लोकार्पण या भूमिपूजन कर सकते हैं।


सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं होगा, जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचे।


मतदान केंद्र पर गैर जरूरी भीड़ जमा नहींं हो सकती है ।


जिन्हें चुनाव आयोग ने परमिशन ना दी हो वो मतदान केंद्र पर नहीं जा सकते हैं।


राजनीतिक दलों की हरकत पर चुनाव आयोग पर्यवेक्षक नजर रखते हैं।


सरकारी गाड़ी या एयर क्राफ्ट का इस्तेमाल मंत्री नहीं कर सकते हैं।


सरकारी बंगले का या सरकारी पैसे का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के दौरान नहीं किया जा सकता है।




Model Code of Conduct: क्या होती है चुनाव आचार संहिता, क्या है इसका मतलब?

By Ankur Sharma

Updated: Mon, Oct 8, 2018, 14:43 [IST]

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। जिन राज्यों में चुनाव का ऐलान हुआ है उनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना शामिल हैं। चुनाव ऐलान के बाद अब इन राज्यों में चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई है लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा कि आखिर 'चुनाव आचार संहिता' होती क्या है और क्यों चुनाव आयोग इसे चुनावों के वक्त लागू करता है।

आदर्श आचार संहिता

चुनाव आचार संहिता / आदर्श आचार संहिता का मतलब है चुनाव आयोग के वो निर्देश जिनका पालन चुनाव खत्म होने तक हर चुनाव लड़ने वाली पार्टी को करना होता है। जो इसका पालन नहीं करता है, उसे इसके लिए सजा सुनाई जाती है।राज्यों में चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही वहां चुनाव आचार संहिता भी लागू हो जाती हैं। चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें, सभी सरकारें चुनाव आचार संहिता के दायरे में आती हैं।

यह भी पढ़ें:'माया की जिद से भाजपा को एमपी में मिल सकता है तगड़ा फायदा'

प्रदेश सरकार और प्रशासन पर कई अंकुश

आचार संहिता लगने के बाद मुख्यमंत्री या मंत्री अब न तो कोई घोषणा कर सकते हैं, न शिलान्यास, लोकार्पण या भूमिपूजन कर सकते हैं।


सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं होगा, जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचे।


मतदान केंद्र पर गैर जरूरी भीड़ जमा नहींं हो सकती है ।


जिन्हें चुनाव आयोग ने परमिशन ना दी हो वो मतदान केंद्र पर नहीं जा सकते हैं।


राजनीतिक दलों की हरकत पर चुनाव आयोग पर्यवेक्षक नजर रखते हैं।


सरकारी गाड़ी या एयर क्राफ्ट का इस्तेमाल मंत्री नहीं कर सकते हैं।


सरकारी बंगले का या सरकारी पैसे का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के दौरान नहीं किया जा सकता है।


धार्मिक स्थानों का उपयोग चुनाव प्रचार के मंच के रूप में नहीं

राजनीतिक दलों की आलोचना कार्यक्रम व नीतियों तक सीमित हो, न ही व्यक्तिगत।


धार्मिक स्थानों का उपयोग चुनाव प्रचार के मंच के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।


मत पाने के लिए भ्रष्ट आचरण का उपयोग न करें जैसे-रिश्वत देना, मतदाताओं को परेशान करना आदि।


किसी की अनुमति के बिना उसकी दीवार, अहाते या भूमि का उपयोग न करें।


किसी दल की सभा या जुलूस में बाधा न डालें।


राजनीतिक सभाओं से जुड़े नियम


सभा के स्थान व समय की पूर्व सूचना पुलिस अधिकारियों को दी जाए।


दल या अभ्यर्थी पहले ही सुनिश्चित कर लें कि जो स्थान उन्होंने चुना है, वहॉं निषेधाज्ञा तो लागू नहीं है।


सभा स्थल में लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति पहले प्राप्त करें।


सभा के आयोजक विघ्न डालने वालों से निपटने के लिए पुलिस की सहायता करें।


जुलूस संबंधी नियम


जुलूस का समय, शुरू होने का स्थान, मार्ग और समाप्ति का समय तय कर सूचना पुलिस को दें।


जुलूस का इंतजाम ऐसा हो, जिससे यातायात प्रभावित न हो।


राजनीतिक दलों का एक ही दिन, एक ही रास्ते से जुलूस निकालने का प्रस्ताव हो तो समय को लेकर पहले बात कर लें।


जुलूस सड़क के दायीं ओर से निकाला जाए।


जुलूस में ऐसी चीजों का प्रयोग न करें, जिनका दुरुपयोग उत्तेजना के क्षणों में हो सके।

मतदान के दिन संबंधी नियम


अधिकृत कार्यकर्ताओं को बिल्ले या पहचान पत्र दें।


मतदाताओं को दी जाने वाली पर्ची सादे कागज पर हो और उसमें प्रतीक चिह्न, अभ्यर्थी या दल का नाम न हो।


मतदान के दिन और इसके 24 घंटे पहले किसी को शराब वितरित न की जाए।


मतदान केन्द्र के पास लगाए जाने वाले कैम्पों में भीड़ न लगाएं।


कैम्प साधारण होने चाहिए।


मतदान के दिन वाहन चलाने पर उसका परमिट प्राप्त करें।


सत्ताधारी दल के लिए नियम


कार्यकलापों में शिकायत का मौका न दें।


मंत्री शासकीय दौरों के दौरान चुनाव प्रचार के कार्य न करें।


इस काम में शासकीय मशीनरी तथा कर्मचारियों का इस्तेमाल न करें।


सरकारी विमान और गाड़ियों का प्रयोग दल के हितों को बढ़ावा देने के लिए न हो।


हेलीपेड पर एकाधिकार न जताएं।


विश्रामगृह, डाक-बंगले या सरकारी आवासों पर एकाधिकार नहीं हो।


इन स्थानों का प्रयोग प्रचार कार्यालय के लिए नहीं होगा।


सरकारी धन पर विज्ञापनों के जरिये उपलब्धियां नहीं गिनवाएंगे।


मंत्रियों के शासकीय भ्रमण पर उस स्थिति में गार्ड लगाई जाएगी जब वे सर्किट हाउस में ठहरे हों।


कैबिनेट की बैठक नहीं करेंगे।


स्थानांतरण तथा पदस्थापना के प्रकरण आयोग का पूर्व अनुमोदन जरूरी।


  

Tuesday, 5 March 2019

*भारतीय आतंकवाद का सच* १९९२ के बाद; 21वीं सदी की शुरुआत में विशेषकर 2002 और 2008 के अंतराल में देश में कई जगहों पर जो बड़े बड़े बम धमाके हुए , वे सारे आरएसएस के ही कृत्य हैं। सच कहें तो ऐसे बम धमाके होने के बाद उसकी जाँच की एक परंपरा बन गयी थी।जैसे ही कोई घटना हुई , आईबी (इंटेलीजेन्स ब्युरो) उसी दिन किसी मुस्लिम संगठन को दोष देकर उसके खिलाफ कार्यवाही करती थी।अगले 2-3 दिनों में देश के अलग-अलग स्थानों से बेगुनाह मुस्लिम युवाओं को गिरफ़्तार किया जाता था।और मिडिया इन खबरों को बड़े ज़ोर शोर से प्रकाशित करती थी।इसके बाद टीवी पर प्राइम टाइम चर्चासत्र, समाचार पत्रों में लेख-आलेख आदि में यह एक चर्चा का विषय बना रहता था।जिससे समाज में मुसलमानों के प्रति डर पैदा हो। टाडा, मकोका,... काले कानून संसद में पास कर सके ताकि बेगुनाह मुस्लिम लोगों को दहशतगर्दी के इल्जाम में कैद कर सके। साथ ही नक्सलवाद के आरोप में आदिवासियों को गिरफ्तार करने के लिए कड़े कानून बनाए जा सके, ताकि उनको वहाँ से भगाकर जंगल, वन, पहाड़ों में छुपी खनिज संपत्ति हासिल कर सके। उस घटना को इससे पहले कि आप लोग भूलते तब तक और एक नई घटना हो जाती।उसकी भी इसी प्रकार जाँच की जाती और फिर मीडिया में नया विषय बना रहता। संघ नियंत्रित “आईबी” +संघ और मीडिया के गठजोड़ से पिछले दो दशकोंसे इसी प्रकार इस देश में चल रहा है। संघ को येनकेन प्रकरेण सत्ता इसीलिए चाहिए कि वह अपने आतंकवादियों को सुरक्षा दे सके और अपना मनुस्मृति ऐजेन्डा चला सकें और परमाणु हथियार हासिल कर सके। आँख पर पर्दा डाले लोग सावधान हो जाएँ। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, भारत का पहले नंबर का आतंकवादी संगठन है। देश में किसी भी आतंकवादी संगठन ने आरडीएक्स का इस्तेमाल इस प्रकार से नहीं किया है जिस प्रकार से आरएसएस ने किया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद फैलाने के जुर्म में आरएसएस और इसके सहयोगी दलों विरुद्ध कम से कम 18 चार्जशीटें दाखिल की जा चुकी हैं। देश की सुरक्षा एजेंसी आईबी इंटेलिजेंस ब्यूरो भी आरएसएस के साथ मिलकर काम कर रहा है। इंटेलिजेंस ब्यूरो ऐसी एजेंसी है जो अपने काम के लिए सरकार या किसी और को जवाबदेह नहीं है इसी बात का फायदा उठा कर इसका इस्तेमाल ग़लत तरीके से किया जा रहा है। सरकारें आती हैं और चली जाती हैं लेकिन आईबी अपने काम में जुटी रहती है और उसके हर बयान को सच माना जाता रहा है। पुलवामा हमला आरडीएक्स से लदी कार से कराया गया। कार बम यह मोसाद का भरौसेमंद हथियार है। किसी भी कार को रिमोट से संचालित करने में इजराइली कंपनियों कोे महारत हासिल है। *पिछले साल आरएसएस आतंकवादी संदीप शर्मा ने अमरनाथ यात्रा पर हमला किया, लेकिन मुफ्ती महबूबा के काबिल पुलिस विभाग ने उसे दबोच लिया। अगर अब राष्ट्रपति शासन नही होता तो इसके असली गुनहगार अभी तक दुनिया के सामने होते? यह हमला राष्ट्रपति शासन कि अवधि बढ़ाने के लिए किया गया, ताकि वहाँ पर कभी चुनाव ना हो।* पठाणकोट के हमलावर आरएसएस के आतंकवादी थे। यह हमला देश के सभी एअरफोर्स स्टेशन कि सुरक्षा में तैनात डीएससी ( डिफेंस सिक्युरिटी कॉर्प्स) के चयन प्रक्रिया को और सख्त बनाने के लिए था। दिल्ली से एअरफोर्स कि 'गरूड' कमांडो टिम हमले के एक रात पहले ही क्यों पहुंच गयी थी? वह पहले से ही पठाणकोट एअरफोर्स स्टेशन के टेक्निकल सेक्शन जहा पर सभी जहाज, हैंगर होता है वहाँ पहले से कैसे मौजूद थी? डीएससी में जो जवान रिटायर होते थे वह दोबारा भर्ती होते है। ट्रेड्समन: कुक, धोबी, हजाम, स्वीपर इनका प्रमोशन सिर्फ हवलदार तक सीमित होने कि वजह से यह लोग ज्यादा से ज्यादा २४-२६ साल ही नोकरी कर पाते है। रिटायरमेंट के बाद उन्हें ढंग की नौकरी नही मिलती इसलिए वे १६-१७ साल नौकरी करके दोबारा डीएससी सेना में आते थे। पठाणकोट हमले का मकसद ट्रेड्समन और टेक्निकल सेना के विभागों में काम करनेवाले जवानों को डीएससी में आने से रोकना था। आज तक जितने धमाके, हमले हुए यह सब मोसाद, आयबी, आरएसएस द्वारा नियोजित साजिश है। मुंबई विस्फोट, दिल्ली विस्फोट, संसद हमला,भोपाल, अक्षरधाम मंदिर, रघुनाथ मंदिर, लाल किला, अजमेर, हैदराबाद, मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस, वाराणसी, नांदेड, परभणी, जालना, पुर्णा, कन्नूर, तेन काशी, पनवेल, ठाणे, वाशी, मडगाव विस्फोट, नगरोठा,गुरदासपुर, ऊरी, अमरनाथ यात्रा, पुलवामा हमला,.... यह सब भारत सरकार+आयबी+आरएसएस+ मोसाद कि साजिशे है। ब्राह्मण आतंकवादी कर्नल पुरोहित का कनेक्शन आरडीएक्स मुहैया कराने में भी था।जितने धमाके हुए उन्हें सेना द्वारा आरडीएक्स मुहैया कराया गया। तभी तो पुरोहित अपनी वीडियो में कहता है जनरल जे जे सिंह अपने साथ है। हेमंत करकरे की हत्या में खुफिया एजेंसी आईबी , मोसाद का हाथ है। करकरे, आतंकी गतिविधियों में हिंदू कट्टरवादी संगठनों की भूमिका की जांच कर रहे थे। वे मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्तेट एटीएस के मुखिया थे। करकरे की हत्या में आईबी का हाथ होने के पुख्ता सबूत थे किंतु इसे साबित करने की सारी कोशिशें विफल रहीं। स्वतंत्र जांच की मांग हमेशा नकार दी गई। जब तक इसके लिए बड़े पैमाने पर जन आंदोलन नहीं चलाया जाएगा, तबतक इसे साबित नहीं किया जा सकेगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ , यह ब्राम्हणवादियों का ब्राम्हणवादियों के हित के लिए और ब्राम्हणवादियों द्वारा चलाया जा रहा एक अपंजीकृत संप्रादायिक संगठन है। ब्राम्हणवादियों का झूठा प्रचार है कि यह सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है।बहुजनों और दलित युवाओं को संघ के साथ जोड़ने के लिए यह झूठा प्रचार किया जाता है। पिछले कई सालों से चली आ रही विषमवादी जाति-व्यवस्था को बनाए रखना और सभी जातियों पर ब्राम्हणवादी वर्चस्व बनाए रखना यही इस संगठन का एक मात्र उद्देश्य है। इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं , और परिस्थितियों के अनुसार अलग अलग षड्यंत्रों का उपयोग करते हैं। पूर्वनियोजित हिन्दू-मुस्लिम दंगे करवाना ब्राम्हणवादियों का 20 वीं सदी का सबसे बड़ा षडयंत्र है।लेकिन 21 वीं सदी में आरएसएस ने अपने कार्यों में कुछ बदलाव किए हैं।हिन्दू- मुस्लिम दंगे कराने के अतिरिक्त मुस्लिम आतंकवाद का डर लोगों के दिल-दिमाग़ में भर देने का काम आरएसएस और अन्य ब्राम्हणवादी संगठन कर रहे हैं। इसके अलावा अपने उद्देश्य को पुर्ण करने के लिए 36 नाजायज़ संगठनों में एक “अभिनव भारत”, सनातन , बजरंग दल,विश्व हिंदू परिषद, शि..सेना,... के नाम से और कई संगठन बनाए। इन कार्यकलापों में थोड़ी सी रुकावट उस समय आई थी जब 2006 में नादेड़ बम धमाका हुआ।आरएसएस व बजरंग दल के आतंकी जब बम बना रहे थे उसी समय धमाका हुआ।घटना में दो की मौत हुई और चार लोग घायल हुए।लेकिन मीडिया ने इस घटना का ज्यादा प्रसारण नहीं किया , परिणामतः लोग उसे जल्दी भूल गये। कुछ समय पश्चात फिर से पहले जैसे बड़े बम धमाके होने शुरू हो गये।साथ ही शुरू हुआ इन घटनाओं का आरोप मुस्लिम संगठनों पर लगाना एंव एटीएस जैसी राज्य स्तरीय पुलिस एजेन्सियों द्वारा मुस्लिम युवाओं को गिरफ्तार करना। मीडिया ने भी पहले की तरह इन्हीं खबरों को अधिक प्रकाशित और प्रचारित करना शुरू कर दिया।इस तरह संघ , आईबी , एटीएस और मीडिया के गठजोड़ से इस देश में मुस्लिम आतंकवाद का झूठा माहोल फैलाने में आरएसएस धीरे धीरे कामयाब होने लगा। लेकिन , सैल्यूट शहीद हेमंत करकरे को , इस आईपीएस पुलिस अधिकारी ने आरएसएस की सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया। सितंबर 2008 में मालेगाँव में हुए बम धमाके की जाँच करते समय उन्हें कुछ ऐसे सबूत मिले जिससे स्पष्ट हुआ कि सिर्फ़ मालेगाँव 2008 ही नहीं बल्कि इससे पहले जो भी बम धमाके हुए थे उसमें ज़्यादातर बम धमाके के लिए आरएसएस , अभिनव भारत और उनसे जुड़े ब्राम्हणवादी संगठन ज़िम्मेदार हैं। साथ ही कुछ घटनाओं में बम रखते समय या तैय्यार करते समय धमाके हुए और उनमें भी आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों के आतंकवादी बेनकाब हुए। नालासोपारा में सनातनी आतंकी वैभव राऊत हजारों बम बनाने लायक विस्फोटक के साथ पकड़ा गया। मेरी जानकारी के अनुसार वर्तमान में संघ परिवार के खिलाफ संघ के कार्यकर्ता के कुन्नूर बम धमाके सहीत लगभग 22 मामले लंबित हैं।इनमें 17 केवल और केवल आरएसएस के खिलाफ है।और यदि अन्य मामलों की ईमानदारी से जाँच हो तो यह संख्या और बढ़ सकती है। जेएनयू मामले के पीछे भी आरएसएस का हाथ है। आरएसएस या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऐसी चालों के जरिये भारत को हिन्दू राष्ट्र में परिवर्तित करना चाहता है। उनका कहना था कि आरएसएस, एक व्यवस्था के अन्तर्गत काम रही है और यह ब्राह्मणवादी व्यवस्था है। स्पष्ट है कि पिछले 90 साल से जो संगठन कथित रूप से देश में सामाजिक , सांस्कृतिक , देशप्रेम की भावना जगाने का कार्य कर रहा है , वह हकीकत में देश में आतंक फैलानेवाला एक आतंकवादी संगठन है और वह एक देशव्यापी देशद्रोही साज़िश का सूत्रसंचालन कर रहा है।

तारीख:-05/03/2019

१९९२ के बाद; 21वीं सदी की शुरुआत में विशेषकर 2002 और 2008 के अंतराल में देश में कई जगहों पर जो बड़े बड़े बम धमाके हुए , वे सारे आरएसएस के ही कृत्य हैं।
सच कहें तो ऐसे बम धमाके होने के बाद उसकी जाँच की एक परंपरा बन गयी थी।जैसे ही कोई घटना हुई , आईबी (इंटेलीजेन्स ब्युरो) उसी दिन किसी मुस्लिम संगठन को दोष देकर उसके खिलाफ कार्यवाही करती थी।अगले 2-3 दिनों में देश के अलग-अलग स्थानों से बेगुनाह मुस्लिम युवाओं को गिरफ़्तार किया जाता था।और मिडिया इन खबरों को बड़े ज़ोर शोर से प्रकाशित करती थी।इसके बाद टीवी पर प्राइम टाइम चर्चासत्र, समाचार पत्रों में लेख-आलेख आदि में यह एक चर्चा का विषय बना रहता था।जिससे समाज में मुसलमानों के प्रति डर पैदा हो। टाडा, मकोका,... काले कानून संसद में पास कर सके ताकि बेगुनाह मुस्लिम लोगों को दहशतगर्दी के इल्जाम में कैद कर सके। साथ ही नक्सलवाद के आरोप में आदिवासियों को गिरफ्तार करने के लिए कड़े कानून बनाए जा सके, ताकि उनको वहाँ से भगाकर जंगल, वन, पहाड़ों में छुपी खनिज संपत्ति हासिल कर सके।

उस घटना को इससे पहले कि आप लोग भूलते तब तक और एक नई घटना हो जाती।उसकी भी इसी प्रकार जाँच की जाती और फिर मीडिया में नया विषय बना रहता।

संघ नियंत्रित “आईबी” +संघ और मीडिया के गठजोड़ से पिछले दो दशकोंसे इसी प्रकार इस देश में चल रहा है।

संघ को येनकेन प्रकरेण सत्ता इसीलिए चाहिए कि वह अपने आतंकवादियों को सुरक्षा दे सके और अपना मनुस्मृति ऐजेन्डा चला सकें और परमाणु हथियार हासिल कर सके। आँख पर पर्दा डाले लोग सावधान हो जाएँ।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, भारत का पहले नंबर का आतंकवादी संगठन है।

देश में किसी भी आतंकवादी संगठन ने आरडीएक्स का इस्तेमाल इस प्रकार से नहीं किया है जिस प्रकार से आरएसएस ने किया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद फैलाने के जुर्म में आरएसएस और इसके सहयोगी दलों विरुद्ध कम से कम 18 चार्जशीटें दाखिल की जा चुकी हैं।

देश की सुरक्षा एजेंसी आईबी इंटेलिजेंस ब्यूरो भी आरएसएस के साथ मिलकर काम कर रहा है। इंटेलिजेंस ब्यूरो ऐसी एजेंसी है जो अपने काम के लिए सरकार या किसी और को जवाबदेह नहीं है इसी बात का फायदा उठा कर इसका इस्तेमाल ग़लत तरीके से किया जा रहा है। सरकारें आती हैं और चली जाती हैं लेकिन आईबी अपने काम में जुटी रहती है और उसके हर बयान को सच माना जाता रहा है।

पुलवामा हमला आरडीएक्स से लदी कार से कराया गया। कार बम यह मोसाद का भरौसेमंद हथियार है। किसी भी कार को रिमोट से संचालित करने में इजराइली कंपनियों कोे महारत हासिल है।

        *पिछले साल आरएसएस आतंकवादी संदीप शर्मा ने अमरनाथ यात्रा पर हमला किया, लेकिन मुफ्ती महबूबा के काबिल पुलिस विभाग ने उसे दबोच लिया। अगर अब राष्ट्रपति शासन नही होता तो इसके असली गुनहगार अभी तक दुनिया के सामने होते? यह हमला राष्ट्रपति शासन कि अवधि बढ़ाने के लिए किया गया, ताकि वहाँ पर कभी चुनाव ना हो।*

पठाणकोट के हमलावर आरएसएस के आतंकवादी थे। यह हमला देश के सभी एअरफोर्स स्टेशन कि सुरक्षा में तैनात डीएससी ( डिफेंस सिक्युरिटी कॉर्प्स) के चयन प्रक्रिया को और सख्त बनाने के लिए था। दिल्ली से एअरफोर्स कि 'गरूड' कमांडो टिम  हमले के एक रात पहले ही क्यों पहुंच गयी थी? वह पहले से ही पठाणकोट एअरफोर्स स्टेशन के टेक्निकल सेक्शन जहा पर सभी जहाज, हैंगर होता है वहाँ पहले से कैसे मौजूद थी? डीएससी में जो जवान रिटायर होते थे वह दोबारा भर्ती होते है। ट्रेड्समन: कुक, धोबी, हजाम, स्वीपर इनका प्रमोशन सिर्फ हवलदार तक सीमित होने कि वजह से यह लोग ज्यादा से ज्यादा २४-२६ साल ही नोकरी कर पाते है। रिटायरमेंट के बाद उन्हें ढंग की नौकरी नही मिलती इसलिए वे १६-१७ साल नौकरी करके दोबारा डीएससी सेना में आते थे। पठाणकोट हमले का मकसद ट्रेड्समन और टेक्निकल सेना के विभागों में काम करनेवाले जवानों को डीएससी में आने से रोकना था।

आज तक जितने धमाके, हमले हुए यह सब मोसाद, आयबी, आरएसएस द्वारा नियोजित साजिश है। मुंबई विस्फोट, दिल्ली विस्फोट, संसद हमला,भोपाल, अक्षरधाम मंदिर, रघुनाथ मंदिर, लाल किला,  अजमेर, हैदराबाद, मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस, वाराणसी, नांदेड, परभणी, जालना, पुर्णा, कन्नूर, तेन काशी, पनवेल, ठाणे, वाशी, मडगाव विस्फोट, नगरोठा,गुरदासपुर, ऊरी, अमरनाथ यात्रा, पुलवामा हमला,.... यह सब भारत सरकार+आयबी+आरएसएस+ मोसाद कि साजिशे है।

ब्राह्मण आतंकवादी कर्नल पुरोहित का कनेक्शन आरडीएक्स मुहैया कराने में भी था।जितने धमाके हुए उन्हें सेना द्वारा आरडीएक्स मुहैया कराया गया। तभी तो पुरोहित अपनी वीडियो में कहता है जनरल जे जे सिंह अपने साथ है।

हेमंत करकरे की हत्या में खुफिया एजेंसी आईबी , मोसाद का हाथ है। करकरे, आतंकी गतिविधियों में हिंदू कट्टरवादी संगठनों की भूमिका की जांच कर रहे थे। वे मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्तेट एटीएस के मुखिया थे। करकरे की हत्या में आईबी का हाथ होने के पुख्ता सबूत थे किंतु इसे साबित करने की सारी कोशिशें विफल रहीं। स्वतंत्र जांच की मांग हमेशा नकार दी गई। जब तक इसके लिए बड़े पैमाने पर जन आंदोलन नहीं चलाया जाएगा, तबतक इसे साबित नहीं किया जा सकेगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ , यह ब्राम्हणवादियों का ब्राम्हणवादियों के हित के लिए और ब्राम्हणवादियों द्वारा चलाया जा रहा एक अपंजीकृत संप्रादायिक संगठन है।
ब्राम्हणवादियों का झूठा प्रचार है कि यह सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है।बहुजनों और दलित युवाओं को संघ के साथ जोड़ने के लिए यह झूठा प्रचार किया जाता है।
पिछले कई सालों से चली आ रही विषमवादी जाति-व्यवस्था को बनाए रखना और सभी जातियों पर ब्राम्हणवादी वर्चस्व बनाए रखना यही इस संगठन का एक मात्र उद्देश्य है।
इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं , और परिस्थितियों के अनुसार अलग अलग षड्यंत्रों का उपयोग करते हैं।
पूर्वनियोजित हिन्दू-मुस्लिम दंगे करवाना ब्राम्हणवादियों का 20 वीं सदी का सबसे बड़ा षडयंत्र है।लेकिन 21 वीं सदी में आरएसएस ने अपने कार्यों में कुछ बदलाव किए हैं।हिन्दू- मुस्लिम दंगे कराने के अतिरिक्त मुस्लिम आतंकवाद का डर लोगों के दिल-दिमाग़ में भर देने का काम आरएसएस और अन्य ब्राम्हणवादी संगठन कर रहे हैं।

इसके अलावा अपने उद्देश्य को पुर्ण करने के लिए 36 नाजायज़ संगठनों में एक “अभिनव भारत”, सनातन , बजरंग दल,विश्व हिंदू परिषद, शि..सेना,... के नाम से और कई संगठन बनाए।
इन कार्यकलापों में थोड़ी सी रुकावट उस समय आई थी जब 2006 में नादेड़ बम धमाका हुआ।आरएसएस व बजरंग दल के आतंकी जब बम बना रहे थे उसी समय धमाका हुआ।घटना में दो की मौत हुई और चार लोग घायल हुए।लेकिन मीडिया ने इस घटना का ज्यादा प्रसारण नहीं किया , परिणामतः लोग उसे जल्दी भूल गये।

कुछ समय पश्चात फिर से पहले जैसे बड़े बम धमाके होने शुरू हो गये।साथ ही शुरू हुआ इन घटनाओं का आरोप मुस्लिम संगठनों पर लगाना एंव एटीएस जैसी राज्य स्तरीय पुलिस एजेन्सियों द्वारा मुस्लिम युवाओं को गिरफ्तार करना।

मीडिया ने भी पहले की तरह इन्हीं खबरों को अधिक प्रकाशित और प्रचारित करना शुरू कर दिया।इस तरह संघ , आईबी , एटीएस और मीडिया के गठजोड़ से इस देश में मुस्लिम आतंकवाद का झूठा माहोल फैलाने में आरएसएस धीरे धीरे कामयाब होने लगा।
लेकिन , सैल्यूट शहीद हेमंत करकरे को , इस आईपीएस पुलिस अधिकारी ने आरएसएस की सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया।

सितंबर 2008 में मालेगाँव में हुए बम धमाके की जाँच करते समय उन्हें कुछ ऐसे सबूत मिले जिससे स्पष्ट हुआ कि सिर्फ़ मालेगाँव 2008 ही नहीं बल्कि इससे पहले जो भी बम धमाके हुए थे उसमें ज़्यादातर बम धमाके के लिए आरएसएस , अभिनव भारत और उनसे जुड़े ब्राम्हणवादी संगठन ज़िम्मेदार हैं।
साथ ही कुछ घटनाओं में बम रखते समय या तैय्यार करते समय धमाके हुए और उनमें भी आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों के आतंकवादी बेनकाब हुए। नालासोपारा में सनातनी आतंकी वैभव राऊत हजारों बम बनाने लायक विस्फोटक के साथ पकड़ा गया।

मेरी जानकारी के अनुसार वर्तमान में संघ परिवार के खिलाफ संघ के कार्यकर्ता के कुन्नूर बम धमाके सहीत लगभग 22 मामले लंबित हैं।इनमें 17 केवल और केवल आरएसएस के खिलाफ है।और यदि अन्य मामलों की ईमानदारी से जाँच हो तो यह संख्या और बढ़ सकती है।
जेएनयू मामले के पीछे भी आरएसएस का हाथ है।

आरएसएस या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऐसी चालों के जरिये भारत को हिन्दू राष्ट्र में परिवर्तित करना चाहता है। उनका कहना था कि आरएसएस, एक व्यवस्था के अन्तर्गत काम रही है और यह ब्राह्मणवादी व्यवस्था है।

स्पष्ट है कि पिछले 90 साल से जो संगठन कथित रूप से देश में सामाजिक , सांस्कृतिक , देशप्रेम की भावना जगाने का कार्य कर रहा है , वह हकीकत में देश में आतंक फैलानेवाला एक आतंकवादी संगठन है और वह एक देशव्यापी देशद्रोही साज़िश का सूत्रसंचालन कर रहा है।

कच्छ Demolition 2026 Riport।

कच्छ 2026 डिमोलिशन रिपोर्ट । सोशल मीडिया से तथ्य, घटनाक्रम और ज़मीनी चर्चाओं का संकलन .... साथियों,  इस रिपोर्ट को तैयार करने का...