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Tuesday, 7 August 2018

इन्सानियत को पैगाम

एक च्यूँटी एक सेंटी मीटर देख सकती है, आपने उसकी लाइन देखि है कैसे बनाती है? वो ज़मीन के निचे घर कैसे बनाती है? फिर ख़ुराक़ लेकर उसमें आती है, दाने को चार टुकड़ों में तोड़ देती है ताकि नमी की वजह से उड़ ना पड़े। बारिश की आमद से पहले ही उसे पता चल जाता है। उसके पास कहाँ साइंस के आलात है? इंसान के अलावा हर मखलूक़ तालीम याफ्ता है। आप शेर के आगे घास रख दो वो भूखा मर जाएगा, नहीं खायेगा। बकरी के आगे पुलाव,बिरयानी,गोश्त रख दो वो भूखी मर जायेगी नहीं खाएगी। उनके अंदर पैदाइशी तौर पर एक इल्म फिट है। शेर को पता है घास मेरी गिज़ा नहीं है, बकरी जानती है गोश्त, मटन मेरा खाना नहीं है इसलिए नहीं खाएगी। परिंदों को उड़ने,झपटने,पलटने का इल्म अंडे में रहते ही सिखा दिया जाता है। सांप के मुंह में ज़हर है उसे कौन बताता है? मादा सांप अंडे देकर चली जाती है रूकती नहीं क्यूंकि रुके तो सांप एक ऐसी अकेली मख्लूक़ है जो बच्चे खुद ही खा जाती है। उस बच्चे को ज़िन्दा रखने केलिए अंडे देकर निकल जाती है। सांप के अंडे से बच्चा निकलकर उसे कौन बताता है के मेरे मुंह में एक थैली है जिसमें ज़हर है, जिसे निकालकर मुझे डसना है। कुत्ता भागा भागा आता है और पानी में छलांग लगाता है क्यूंकि उसे तैरना आता है। हिरन आएगा छलांग लगाएगा क्यूंकि उसे तैरना आता है। हाथी आएगा लेकिन छलांग नहीं लगाएगा, पानी देखकर खड़ा होजायेगा, पहले वो अपना पाँव पानी में रखेगा, चेक करेगा पैर अंदर रुकता है के नहीं? फिर पैर लग जाता है तो वो अन्दर चलना शुरू करेगा। इन बातों से पता चलता है के इंसान के अलावा तमाम मखलूक के पास ज़िन्दगी गुज़ारने का इल्म है। ये उनके अपने पैदाइशी इल्म का कमाल है के ये उसके खिलाफ कभी नहीं जाते। आप बकरी को मारो वो मटन नहीं खाएगी। आप शेर को हंटर से मारो वो घास नहीं खायेगा।

एक मछली जिसका नाम इल है जो सांप की तरह होती है। इस मछली को अंडे देने केलिए सात समंदर में एक जगह बरमुडा जो साउथ अमेरिका में है वो वहां जाकर अंडे देती है। ये भारत से सफ़र करेगी, यूरोप से करेगी, नार्थ अमेरिका से करेगी,साउथ अफ्रीका से करेगी और ये सब वहां जाकर अंडे देती है।पुरे सात समंदर में कोई ऐसा टेम्प्रेचर नहीं जहाँ उसका अंडा परवान चढ़ता हो। रास्ते में साईन बोर्ड कोई नहीं उसे कौन बताता है के तुम्हे वहां जाकर अंडा देना है? रात,दिन कई रोज़ अँधेरे उजाले में सफ़र करते करते वो उस जगह पहुँच जाती है। अंडे देती है, जिंदा नहीं रहती फ़ौरन मर जाती है। फिर उसके बच्चे पैदा होते है,उन्हें पता नहीं है की मेरी माँ कहाँ से किस जगह से आई थी लेकिन जब वो बड़े होकर परवान चढ़ते है तो कभी ऐसा नहीं हुआ के भारत की इल मछली का बच्चा कैप टाउन साउथ अफ्रीका गया, नार्थ अमेरिका का बच्चा यूरोप गया हो और अरब की इल भटक के साउथ अफ्रीका चली गयी हो, ऐसा आजतक नहीं हुआ।अगर इंसान का कमाल भी यही तक हो के गाडी कैसे बनानी है, जहाज़ कैसे बनाना है,घर कैसे बनाना है, कपड़ा कैसे बनाना है, खाना कैसे बनाना है तो इंसान और जानवर में क्या फर्क़ रह जाएगा?

इंसान क्यूँ पैदा हुआ? किसने उसे पैदा किया? ये कायनात किसने बनाई? क्यूँ बनाई? जबतक इसका इल्म हासिल नहीं करता उसका इल्म नाक़िस है।

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